पूर्णिया: बिहार के Purnia जिले में रविवार को पानी में डूबने की दो अलग-अलग घटनाओं ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। कसबा प्रखंड में मछली पकड़ने के दौरान तीन सगे भाइयों की डूबने से मौत हो गई, जबकि बायसी थाना क्षेत्र में नदी पार करने के दौरान दो चचेरी बहनों की जान चली गई। दोनों घटनाओं के बाद संबंधित गांवों में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
इन दोनों हादसों ने एक बार फिर बरसात के मौसम में ग्रामीण इलाकों में बढ़ते जलस्तर, तेज बहाव और जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कसबा में मछली पकड़ने गए तीन भाइयों की मौत
पहली दर्दनाक घटना कसबा प्रखंड के कुल्लाखास पंचायत के आलमनगर वार्ड संख्या सात में रविवार सुबह हुई। यहां मछली पकड़ने के दौरान तीन सगे भाइयों की पानी में डूबने से मौत हो गई।
मृतकों की पहचान 12 वर्षीय मो. मोफिजूल, 10 वर्षीय तफीजूल और 8 वर्षीय सैराजुल के रूप में हुई है। तीनों भाई एक साथ मछली पकड़ने के लिए घर के पास गए थे।
घटना की खबर मिलते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
चार भाई मछली पकड़ने के लिए गए थे
बताया गया कि आलमनगर निवासी अलांगीर के चार बेटे रविवार सुबह घर के समीप खगजाना के पास गोदाम के पीछे स्थित चाप में मछली पकड़ने गए थे।
चारों भाई जाल की मदद से पानी में मछली पकड़ रहे थे। इसी दौरान अचानक एक भाई गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा।
उसे बचाने की कोशिश में उसके दो अन्य भाई भी पानी के गहरे हिस्से में चले गए। देखते ही देखते तीनों बच्चे पानी में डूब गए।
सात साल के भाई ने गांव पहुंचकर दी जानकारी
घटना के समय तीनों भाइयों के साथ उनका सात वर्षीय भाई अली हुसैन भी मौजूद था। उसने अपने भाइयों को पानी में डूबते देखा तो घबरा गया।
अली हुसैन किसी तरह वहां से दौड़कर गांव पहुंचा और परिवार के लोगों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन और ग्रामीण तत्काल घटनास्थल की ओर दौड़े।
ग्रामीणों ने पानी में उतरकर बच्चों की तलाश शुरू की और काफी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला गया। लेकिन तब तक तीनों बच्चों की मौत हो चुकी थी।
एक साथ तीन बेटों की मौत से परिवार में मातम
एक ही परिवार के तीन बच्चों की एक साथ मौत की खबर सुनते ही पूरे गांव में मातम पसर गया।
मृतकों के पिता अलांगीर, मां दुलहरी, दादा मो. अख्तर और दादी मेहनूर का रो-रोकर बुरा हाल है।
बताया गया कि अलांगीर के कुल आठ पुत्र हैं। इनमें से तीन बेटों की एक साथ मौत हो जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
परिजनों की चीख-पुकार से गांव का माहौल गमगीन हो गया।
मुखिया ने परिवार को सरकारी सहायता देने की मांग की
घटना की जानकारी मिलने के बाद कुल्लाखास पंचायत के मुखिया रंजीत पासवान ने शोक व्यक्त किया।
उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए प्रशासन से परिवार को नियमानुसार सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से पीड़ित परिवार की मदद करने की अपील की है।

अंचलाधिकारी ने कर्मचारी को मौके पर भेजा
कसबा के अंचलाधिकारी निशांत कुमार ने तीन बच्चों की डूबने से मौत की जानकारी मिलने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित कर्मचारी को मौके पर भेजा गया है।
प्रशासन की ओर से घटना से जुड़ी आवश्यक जानकारी और प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
बायसी में नदी पार करते समय दो बच्चियों की मौत
पूर्णिया में दूसरी दर्दनाक घटना बायसी थाना क्षेत्र के जाबर गांव में सामने आई। यहां नदी पार करने के दौरान दो चचेरी बहनों की डूबने से मौत हो गई।

बताया गया कि शनिवार शाम जाबर गांव के वार्ड संख्या नौ की चार बच्चियां मवेशियों के लिए घास लेने गई थीं। घास लेकर लौटने के दौरान वे बलवाधार के पास नदी पार कर रही थीं।
इसी दौरान नदी का तेज बहाव चारों बच्चियों के लिए जानलेवा साबित हुआ।
तेज बहाव की चपेट में आईं चार बच्चियां
नदी पार करने के दौरान चारों बच्चियां अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गईं और पानी में डूबने लगीं।
घटना की जानकारी जैसे ही ग्रामीणों को मिली, वे तत्काल मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने नदी में उतरकर बच्चियों की तलाश शुरू की।
काफी मशक्कत के बाद चारों बच्चियों को पानी से बाहर निकाला गया। हालांकि, तब तक दो बच्चियों की मौत हो चुकी थी।
दो चचेरी बहनों ने गंवाई जान
मृत बच्चियों की पहचान 16 वर्षीय फरीदा, पिता मैनुल आलम और 15 वर्षीय सागरी, पिता स्वर्गीय ऐनुल आलम के रूप में हुई है।
दोनों मृतक बच्चियां आपस में चचेरी बहनें थीं।
हादसे में दो अन्य बच्चियों को भी ग्रामीणों ने गंभीर हालत में पानी से बाहर निकाला। उन्हें उपचार के लिए भेजा गया, जिससे उनकी जान बच गई।
बरसात में नदी पार करना बन रहा जानलेवा
पूर्णिया के ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात के दौरान नदी, नहर और अन्य जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ जाता है। कई जगहों पर पानी का बहाव भी काफी तेज हो जाता है।
ऐसे में ग्रामीणों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के दौरान नदी या धार पार करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है। बच्चों के लिए यह खतरा और भी अधिक बढ़ जाता है।
जाबर गांव की घटना ने बरसात के मौसम में सुरक्षित आवागमन की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है।
जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत
लगातार सामने आ रही डूबने की घटनाएं ग्रामीण इलाकों में जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को उजागर करती हैं।
बरसात के दौरान नदी और चाप जैसे जलस्रोतों में अचानक पानी बढ़ने और तेज बहाव आने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में बच्चों को अकेले जलस्रोतों के पास जाने से रोकना और खतरनाक स्थानों पर सुरक्षा उपाय करना बेहद जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को भी बरसात के दौरान बच्चों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है।
दो हादसों से गांवों में पसरा मातम
पूर्णिया जिले में हुए इन दोनों हादसों के बाद संबंधित गांवों में शोक का माहौल है। एक तरफ कसबा में तीन सगे भाइयों की मौत ने परिवार और ग्रामीणों को झकझोर दिया, वहीं दूसरी ओर बायसी में दो चचेरी बहनों की मौत से परिजनों में मातम है।

दोनों घटनाओं में परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया। ग्रामीण भी इन घटनाओं से बेहद दुखी हैं।
लगातार हादसों ने बढ़ाई चिंता
कुछ ही समय के अंतराल में पानी में डूबने से पांच बच्चों की मौत की इन घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषकर बारिश के मौसम में जब नदियों, धाराओं, चाप और अन्य जलस्रोतों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ता है, तब छोटे बच्चों का इन स्थानों के आसपास जाना बेहद खतरनाक हो सकता है।
प्रशासन और ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती
इन घटनाओं के बाद प्रशासन के सामने भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जलस्रोतों के खतरों के प्रति जागरूक करने की चुनौती है।
जरूरत है कि बरसात के दौरान संवेदनशील इलाकों को चिह्नित किया जाए और ग्रामीणों को तेज बहाव वाले पानी से दूर रहने के लिए जागरूक किया जाए। खासकर बच्चों को नदी, चाप और गहरे पानी वाले स्थानों पर जाने से रोकना जरूरी है।
Purnia में मछली पकड़ने गए तीन सगे भाइयों और नदी पार करने के दौरान दो चचेरी बहनों की मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। कसबा के आलमनगर में 12 वर्षीय मोफिजूल, 10 वर्षीय तफीजूल और 8 वर्षीय सैराजुल की मौत हुई, जबकि बायसी के जाबर गांव में 16 वर्षीय फरीदा और 15 वर्षीय सागरी ने जान गंवाई।
दोनों घटनाओं ने बरसात के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के बढ़ते खतरे और सुरक्षित आवागमन की जरूरत को सामने ला दिया है। ऐसे हादसों को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जागरूकता के साथ-साथ ग्रामीणों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सबसे जरूरी है कि बच्चों को तेज बहाव वाली नदियों, गहरे चाप और अन्य जलस्रोतों से दूर रखा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।





















