जम्मू: संभाग में पिछले कुछ वर्षों के दौरान रोहिंग्या और Bangladeshi नागरिकों की गिरफ्तारी के कई मामले सामने आए हैं। इन मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले लोग जम्मू तक कैसे पहुंच रहे हैं और उनके पीछे किस तरह का नेटवर्क सक्रिय है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक सामने आए मामलों में यह स्पष्ट हुआ है कि सभी लोग एक ही तरीके से जम्मू नहीं पहुंचे। कुछ मामलों में दलालों की भूमिका सामने आई, तो कुछ में फर्जी पहचान पत्र और स्थानीय स्तर पर मदद करने वाले लोगों की संलिप्तता के आरोप सामने आए। सुरक्षा एजेंसियां इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच कर रही हैं।
हर व्यक्ति का जम्मू पहुंचने का तरीका अलग-अलग
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की जांच के अनुसार, जम्मू पहुंचने वाले सभी विदेशी नागरिकों का तरीका एक जैसा नहीं था।
कुछ लोग कथित तौर पर दलालों की मदद से सीमा पार कर भारत में दाखिल हुए, जबकि कुछ मामलों में फर्जी आधार कार्ड, डोमिसाइल और अन्य भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार कराने के प्रयास सामने आए। इसके अलावा बस और ट्रेन जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर देश के अलग-अलग हिस्सों से जम्मू पहुंचने के मामले भी सामने आए हैं।
इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए अवैध घुसपैठ और दस्तावेजों के दुरुपयोग को रोकना एक बड़ी चुनौती बना दिया है।
रोहिंग्या नागरिकों का भारत आने का प्रमुख मार्ग
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, म्यांमार से विस्थापित रोहिंग्या समुदाय का एक हिस्सा पहले बांग्लादेश पहुंचा और वहां से विभिन्न माध्यमों से भारत में प्रवेश किया।
इसके बाद इनमें से कुछ लोग देश के अलग-अलग राज्यों में पहुंचे। जम्मू में वर्ष 2021 के दौरान दस्तावेज सत्यापन अभियान के समय पुलिस ने 148 से 155 रोहिंग्या नागरिकों को वैध यात्रा दस्तावेज नहीं होने के कारण हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें कठुआ स्थित उप-जेल में बनाए गए होल्डिंग सेंटर में रखा गया।
यह कार्रवाई दस्तावेजों के सत्यापन अभियान का हिस्सा थी।
दलालों की भूमिका जांच के केंद्र में
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में कई मामलों में दलालों की भूमिका सामने आई है।
विशेष रूप से नवंबर 2023 में जम्मू पुलिस द्वारा पकड़ी गई छह बांग्लादेशी महिलाओं और युवतियों के मामले में प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इनमें से पांच महिलाएं कथित रूप से एक दलाल की सहायता से जम्मू पहुंची थीं। पुलिस के अनुसार, वे आगे कश्मीर की ओर जा रही थीं, लेकिन उन्हें जम्मू के बठिंडी क्षेत्र में हिरासत में ले लिया गया।
इस मामले ने यह संकेत दिया कि सीमा पार कराने और अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाने के लिए कथित मानव तस्करी या दलालों का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। हालांकि प्रत्येक मामले की जांच अलग-अलग आधार पर की जाती है।
फर्जी पहचान दस्तावेजों का भी सामने आया मामला
जांच एजेंसियों ने ऐसे मामले भी दर्ज किए हैं जिनमें विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार कराने के आरोप लगे।

दिसंबर 2023 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 10 विदेशी नागरिकों और उनके कथित मददगारों के खिलाफ आधार कार्ड, डोमिसाइल और अन्य भारतीय दस्तावेज प्राप्त करने के आरोप में तीन प्राथमिकी दर्ज की थीं।
पुलिस ने इन मामलों में दस्तावेजों की वैधता और उन्हें तैयार कराने वाले नेटवर्क की भी जांच शुरू की थी।
क्या रोजगार की तलाश भी बन रहा है एक रास्ता?
जम्मू क्षेत्र में निर्माण कार्य, मजदूरी और अन्य छोटे रोजगारों के लिए बड़ी संख्या में बाहरी श्रमिक पहुंचते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि कुछ मामलों में इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर अवैध रूप से भारत में दाखिल लोग भी मजदूर बनकर विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल मजदूरी करने के आधार पर किसी व्यक्ति को अवैध घुसपैठिया नहीं माना जा सकता।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि किसी संगठित योजना के तहत जनसंख्या परिवर्तन या सुनियोजित बसावट जैसे दावों की पुष्टि केवल जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है। ऐसे दावों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियां और न्यायिक प्रक्रिया ही तय करती हैं।
घुसपैठ से जम्मू तक पहुंचने की संभावित श्रृंखला
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जांच किए गए मामलों के आधार पर एक संभावित प्रक्रिया इस प्रकार सामने आई है—
- अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील हिस्सों से अवैध प्रवेश।
- सीमा क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए कथित दलालों की मदद।
- बस या ट्रेन के माध्यम से दूसरे राज्यों तक यात्रा।
- वहां से जम्मू पहुंचना।
- स्थानीय स्तर पर किराए का मकान या अस्थायी ठिकाना बनाना।
- पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर भारतीय दस्तावेज प्राप्त करने का प्रयास।
हालांकि यह पैटर्न सभी मामलों पर लागू नहीं होता और प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
जम्मू में सामने आए प्रमुख मामले
नवंबर 2023
जम्मू पुलिस ने छह बांग्लादेशी महिलाओं और युवतियों को हिरासत में लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उनमें से पांच कथित रूप से एक दलाल की सहायता से जम्मू पहुंची थीं। पुलिस के अनुसार, वे आगे कश्मीर की ओर जा रही थीं।
दिसंबर 2023
डोडा जिले में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों समेत 10 विदेशी नागरिकों के खिलाफ भारतीय पहचान दस्तावेज प्राप्त करने के आरोप में मामले दर्ज किए गए। जांच में आधार कार्ड और डोमिसाइल जैसे दस्तावेजों की भी पड़ताल की गई।

मई 2024
जम्मू के बाहरी क्षेत्र खौड़ में सुरक्षा बलों ने एक बांग्लादेशी नागरिक को हिरासत में लिया। जांच के दौरान उसके पास से बांग्लादेशी मुद्रा, सिम कार्ड और अन्य सामान मिलने की जानकारी सामने आई।
पुलिस का फोकस सत्यापन और निगरानी पर
जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए लगातार सत्यापन अभियान चलाए जा रहे हैं।
इन अभियानों के तहत—
- किरायेदारों का सत्यापन,
- संदिग्ध श्रमिकों की पहचान,
- दस्तावेजों की जांच,
- विदेशी नागरिकों को आश्रय देने वालों की भूमिका की जांच,
- और स्थानीय स्तर पर निगरानी
जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
पुलिस का मानना है कि समय पर सत्यापन और स्थानीय लोगों के सहयोग से ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
जम्मू में रोहिंग्या और Bangladeshi नागरिकों से जुड़े विभिन्न मामलों ने अवैध प्रवेश, कथित दलालों के नेटवर्क और फर्जी पहचान दस्तावेजों के उपयोग जैसे कई गंभीर पहलुओं को सामने लाया है। हालांकि प्रत्येक मामला अलग परिस्थितियों वाला है और सभी आरोप जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार सत्यापन अभियान, दस्तावेजों की जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रख रही हैं ताकि कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आने वाले समय में इन मामलों की जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगा कि इन नेटवर्कों का वास्तविक स्वरूप क्या है और इनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है।













