रांची: Jharkhand में बंगला भाषा की शिक्षा के संरक्षण और विकास को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है। बुधवार, 5 अगस्त 2026 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड बांग्ला-भाषी उन्नयन समिति ने राज्य सरकार पर बंगला भाषा की शिक्षा की लगातार उपेक्षा करने का आरोप लगाया। समिति ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी बांग्ला अकादमी की स्थापना नहीं हो सकी है, जिसके कारण प्राथमिक स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक बंगला भाषा की शिक्षा का ढांचा लगातार कमजोर होता जा रहा है।
समिति ने घोषणा की कि बंगला भाषा की शिक्षा को बचाने और सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करने के लिए 7 अगस्त 2026 को झारखंड विधानसभा के समक्ष निर्धारित सरकारी स्थल कुटे मैदान में एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी नहीं बनी बांग्ला अकादमी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि झारखंड राज्य के गठन के बाद से बंगला भाषा की शिक्षा को अपेक्षित महत्व नहीं मिला। राज्य बने 26 वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक बांग्ला अकादमी की स्थापना नहीं की गई है।

समिति का कहना है कि यदि समय रहते बांग्ला अकादमी की स्थापना की जाती, तो भाषा के संरक्षण, शोध, साहित्यिक गतिविधियों और शैक्षणिक विकास को नई दिशा मिल सकती थी। लेकिन लगातार उपेक्षा के कारण आज बंगला भाषा की शिक्षा संकट के दौर से गुजर रही है।
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बांग्ला विभागों पर संकट
समिति ने हाल के दिनों में विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बांग्ला विभागों को बंद करने अथवा उनकी पढ़ाई सीमित करने के निर्णय पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
समिति के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों में बांग्ला विषय के अवसर लगातार कम किए जा रहे हैं। इससे न केवल विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई का संकट उत्पन्न हो रहा है, बल्कि भविष्य में बंगला भाषा के शिक्षक, शोधकर्ता और साहित्यकार तैयार होने की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी।
प्राथमिक से स्नातकोत्तर तक पहले उपलब्ध थी पढ़ाई
झारखंड बांग्ला-भाषी उन्नयन समिति ने बताया कि राज्य गठन से पहले विद्यार्थियों को प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक बंगला भाषा में शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध थी।
लेकिन राज्य गठन के बाद धीरे-धीरे विद्यालयों और महाविद्यालयों में बंगला भाषा की पढ़ाई सीमित होती चली गई। परिणामस्वरूप आज बड़ी संख्या में बंगाली भाषी विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
सरकार को कई बार सौंपे गए आवेदन और ज्ञापन
समिति ने बताया कि पिछले 26 वर्षों के दौरान बंगला भाषा की शिक्षा के संरक्षण और विकास के लिए राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, अधिकारियों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल को कई बार ज्ञापन और आवेदन सौंपे गए।
समिति का कहना है कि बार-बार आग्रह किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण बंगाली भाषी समाज में निराशा और असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
सर्वे रिपोर्ट में भी सामने आई थी बंगाली भाषियों की बड़ी संख्या
प्रेस कॉन्फ्रेंस में समिति ने यह भी दावा किया कि सरकार द्वारा पूर्व में कराए गए सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया था कि झारखंड में घरेलू स्तर पर बंगाली भाषा बोलने वाले विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है।
इसके बावजूद शिक्षा व्यवस्था में बंगला भाषा को पर्याप्त स्थान नहीं मिलना चिंता का विषय है। समिति का कहना है कि जब बड़ी संख्या में विद्यार्थी बंगाली भाषा का उपयोग करते हैं, तब उनके लिए शिक्षा की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
7 अगस्त को विधानसभा के समक्ष होगा शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन
झारखंड बांग्ला-भाषी उन्नयन समिति ने घोषणा की कि 7 अगस्त 2026 को झारखंड विधानसभा के समक्ष निर्धारित सरकारी स्थल कुटे मैदान में एक दिवसीय शांतिपूर्ण सामूहिक धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
धरने का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार का ध्यान बंगला भाषा की शिक्षा की वर्तमान स्थिति की ओर आकर्षित करना तथा इसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग करना है।
ये हैं समिति की प्रमुख मांगें
धरना-प्रदर्शन के माध्यम से समिति राज्य सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखेगी, जिनमें प्रमुख हैं—

- झारखंड में शीघ्र बांग्ला अकादमी की स्थापना।
- प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक बंगला भाषा में शिक्षा की समुचित व्यवस्था।
- विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में बांग्ला विभागों को बंद करने की प्रक्रिया पर रोक।
- रिक्त पदों पर बांग्ला भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति।
- बंगला भाषा को उसके संवैधानिक एवं शैक्षणिक अधिकारों के अनुरूप संरक्षण और प्रोत्साहन।
राज्यभर से जुटेंगे विद्यार्थी और सामाजिक संगठन
समिति ने बताया कि इस कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों से विद्यार्थी, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार, कलाकार और बंगाली समाज के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
धरना-प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा, ताकि सरकार तक समाज की मांग प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सके।
बुद्धिजीवियों और आम जनता से सहयोग की अपील
झारखंड बांग्ला-भाषी उन्नयन समिति ने राज्य के सभी बंगाली संगठनों, शिक्षकों, साहित्यकारों, लेखकों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों तथा आम नागरिकों से इस जन-आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।
समिति का कहना है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और पहचान का आधार होती है। इसलिए बंगला भाषा की शिक्षा को बचाने के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर आगे आना चाहिए।
भाषाई अधिकारों के संरक्षण की उठी मांग
समिति ने कहा कि भारतीय संविधान सभी भाषाओं के संरक्षण और उनके विकास का अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में झारखंड में बंगला भाषा की शिक्षा को कमजोर होना न केवल शैक्षणिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है।
समिति का मानना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार से वंचित हो सकती हैं।
Jharkhand बांग्ला-भाषी उन्नयन समिति का यह आंदोलन केवल एक भाषा की शिक्षा को बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि मातृभाषा आधारित शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और भाषाई अधिकारों के संरक्षण की मांग भी है। 7 अगस्त 2026 को विधानसभा के समक्ष प्रस्तावित शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के माध्यम से समिति राज्य सरकार से अपेक्षा कर रही है कि वह बांग्ला अकादमी की स्थापना, प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक बंगला भाषा की पढ़ाई सुनिश्चित करने तथा विश्वविद्यालयों में बांग्ला विभागों को मजबूत करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए।





















