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भारत-उज़्बेकिस्तान संबंधों को नई मजबूती: संसदीय सहयोग से रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

On: August 4, 2026 8:06 PM
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नई दिल्ली भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच दशकों नहीं, बल्कि सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध आज आधुनिक रणनीतिक साझेदारी के रूप में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उस समय देखने को मिला जब उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री श्री बख्तियार सैदोव ने संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग, व्यापार, निवेश, शिक्षा, संस्कृति, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

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बैठक के दौरान लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच मौजूद ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध केवल अतीत की विरासत नहीं हैं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की साझेदारी की मजबूत नींव भी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के बीच बढ़ता राजनीतिक विश्वास, आर्थिक सहयोग और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएंगे।

सदियों पुराना रिश्ता, आधुनिक साझेदारी की ओर

भारत और उज़्बेकिस्तान का संबंध प्राचीन सिल्क रूट के दौर से जुड़ा हुआ है। व्यापार, संस्कृति, साहित्य, संगीत और सूफी परंपराओं ने दोनों देशों को लंबे समय से एक-दूसरे के करीब रखा है। आज यही ऐतिहासिक विरासत आधुनिक आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक सहयोग का आधार बन रही है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि दोनों देशों के बीच मित्रता समय की कसौटी पर हमेशा खरी उतरी है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यह संबंध केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

संसदीय मैत्री समूह देगा संबंधों को नई दिशा

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय मार्च 2026 में गठित भारत-उज़्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह रहा। श्री ओम बिरला ने कहा कि यह समूह दोनों देशों की संसदों के बीच संवाद को और अधिक मजबूत करेगा। इससे विधायी अनुभवों का आदान-प्रदान बढ़ेगा तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि संसदीय सहयोग केवल सांसदों की मुलाकात तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे नीति निर्माण, सुशासन, संसदीय प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलता है। यह पहल व्यापार, शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-जन के बीच संबंधों को और गहरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारतीय लोकतंत्र की विशेषताओं से कराया परिचय

श्री ओम बिरला ने उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री को भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की विशेषताओं से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां 543 सदस्यीय लोकसभा देश के करोड़ों नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती है।

उन्होंने कहा कि भारत की बहुदलीय संसदीय प्रणाली विभिन्न विचारों और मतों को समान अवसर प्रदान करती है। संसद में होने वाली बहसें लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करती हैं और जनता की आकांक्षाओं को नीति निर्माण तक पहुंचाने का माध्यम बनती हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी बताया कि भारतीय संसद प्रत्येक वर्ष तीन प्रमुख सत्रों—बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र—में कार्य करती है। वर्तमान मानसून सत्र में भी अनेक राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर गंभीर चर्चा और विधायी कार्य जारी हैं।

विकास के नए भारत की तस्वीर

बैठक के दौरान श्री बिरला ने भारत में तेजी से हो रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत ने अवसंरचना निर्माण, डिजिटल प्रौद्योगिकी, नवाचार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

उन्होंने बताया कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था दुनिया में तेजी से उभर रही है। डिजिटल भुगतान प्रणाली, ई-गवर्नेंस, स्टार्टअप इकोसिस्टम और तकनीकी नवाचारों ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भारतीय युवा आज विश्वभर में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा रहे हैं। उच्च शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में भारत का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और दुनिया के अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों के साथ सहयोग का दायरा भी विस्तृत हो रहा है।

आईपीयू सम्मेलन की यादें भी हुईं साझा

श्री ओम बिरला ने अप्रैल 2025 में उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 150वीं सभा में अपनी भागीदारी को भी याद किया।

उन्होंने बताया कि उस दौरान उनकी मुलाकात उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव, सीनेट की अध्यक्ष तंज़िला नरबायेवा तथा विधायी कक्ष के अध्यक्ष नुरिद्दीन इस्माइलोव से हुई थी।

उन्होंने कहा कि इन उच्चस्तरीय बैठकों ने दोनों देशों के संसदीय संबंधों को नई मजबूती प्रदान की और आपसी विश्वास को और अधिक गहरा किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्तमान यात्रा भी दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देगी।

उज़्बेकिस्तान ने जताई सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता

उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव ने भी भारत के साथ अपने देश की साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने कहा कि ताशकंद भारत के साथ राजनीतिक, आर्थिक और संसदीय सहयोग को अत्यधिक महत्व देता है। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसदीय अनुभव से उज़्बेकिस्तान बहुत कुछ सीख सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों की संसदों के बीच नियमित संवाद और सांसदों के आदान-प्रदान से रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूती मिलेगी। उनके अनुसार व्यापार, निवेश, औद्योगिक सहयोग, संयुक्त परियोजनाओं और उभरते क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें मिलकर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

व्यापार और निवेश में मौजूद हैं अपार संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों में अभी भी व्यापक संभावनाएं हैं। फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा, खनन, वस्त्र उद्योग, पर्यटन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का दायरा तेजी से बढ़ सकता है।

दोनों देश मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के बीच आर्थिक संपर्क को मजबूत बनाने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं। बेहतर कनेक्टिविटी, परिवहन नेटवर्क और निवेश सहयोग से दोनों देशों के उद्योगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

सांस्कृतिक संबंध भी हैं बेहद मजबूत

भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं। सूफी परंपरा, साहित्य, संगीत, कला और ऐतिहासिक विरासत दोनों देशों को एक साझा सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ते हैं।

दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक संस्थानों और शोध केंद्रों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। छात्र आदान-प्रदान, भाषा अध्ययन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच निकटता और बढ़ रही है।

स्मारक प्रकाशन किया भेंट

बैठक के अंत में उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री श्री बख्तियार सैदोव ने लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को एक विशेष स्मारक प्रकाशन भी भेंट किया। इस प्रकाशन में उज़्बेकिस्तान द्वारा आयोजित अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 150वीं सभा का विस्तृत विवरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। यह उपहार दोनों देशों के संसदीय सहयोग और मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है।

भविष्य की साझेदारी होगी और मजबूत

विश्लेषकों का मानना है कि भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच बढ़ता संसदीय संवाद केवल औपचारिक कूटनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह व्यापक रणनीतिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच विश्वास, आर्थिक सहयोग, शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और जन-जन के बीच बढ़ते संपर्क भविष्य में दोनों देशों को और अधिक करीब लाएंगे।

भारत की “कनेक्ट सेंट्रल एशिया” नीति और उज़्बेकिस्तान की क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की रणनीति एक-दूसरे की पूरक हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के बीच सहयोग के नए अवसर भी पैदा करेगी।

भारत और उज़्बेकिस्तान के नेताओं की यह मुलाकात स्पष्ट संकेत देती है कि दोनों देश अपने ऐतिहासिक संबंधों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप नई ऊर्जा और नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संसदीय सहयोग, आर्थिक भागीदारी और सांस्कृतिक निकटता के माध्यम से यह मित्रता आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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