समाहरणालय के कर्मी बोधा मुंडा की साहित्यिक उपलब्धि, स्थानीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम समाहरणालय में कार्यरत जिला भू-अर्जन कार्यालय के कर्मचारी श्री बोधा मुंडा द्वारा रचित मुंडारी-हिंदी द्विभाषी गीत-संग्रह पुस्तक “ओमोन- मुंडारी साइति पुथी” का मंगलवार को समाहरणालय परिसर में भव्य विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने किया और लेखक को उनकी इस महत्वपूर्ण साहित्यिक उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अपर उपायुक्त तथा जिला भू-अर्जन कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। अपर उपायुक्त ने भी पुस्तक की प्रति प्राप्त कर श्री बोधा मुंडा के साहित्यिक योगदान की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।
स्थानीय भाषा और संस्कृति को सहेजने का सराहनीय प्रयास
पुस्तक के विमोचन के अवसर पर उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने कहा कि झारखंड की स्थानीय भाषाएं और सांस्कृतिक विरासत राज्य की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि मुंडारी जैसी समृद्ध जनजातीय भाषा के संरक्षण और उसके साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इस प्रकार के प्रयास अत्यंत प्रेरणादायी और स्वागतयोग्य हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक न केवल मुंडारी भाषा के साहित्य को समृद्ध करेगी, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
डीएम लाइब्रेरी में भी उपलब्ध रहेगी पुस्तक
लेखक श्री बोधा मुंडा की यह पुस्तक अधिसूचित क्षेत्र समिति, जमशेदपुर द्वारा संचालित डीएम लाइब्रेरी, साकची में भी पाठकों के लिए उपलब्ध रहेगी। इससे साहित्य प्रेमियों, शोधार्थियों और स्थानीय भाषा में रुचि रखने वाले लोगों को इस महत्वपूर्ण कृति का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
मुंडारी साहित्य को मिलेगा नया आयाम
“ओमोन- मुंडारी साइति पुथी” एक मुंडारी-हिंदी द्विभाषी गीत-संग्रह है, जो मुंडारी भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। द्विभाषी स्वरूप होने के कारण यह पुस्तक मुंडारी भाषा से परिचित और अपरिचित दोनों तरह के पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में प्रेरक पहल
समाहरणालय के एक कर्मचारी द्वारा साहित्य के क्षेत्र में किया गया यह उल्लेखनीय कार्य यह दर्शाता है कि प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ समाज, भाषा और संस्कृति के संरक्षण के प्रति भी कर्मचारियों की गहरी प्रतिबद्धता है। “ओमोन- मुंडारी साइति पुथी” निश्चित रूप से झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और मुंडारी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।













