नई दिल्ली: नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा दावा किया है। पुलिस का कहना है कि फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के माध्यम से प्रदर्शन में शामिल 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका किसी न किसी आपराधिक मामले से संबंध रहा है। पुलिस के अनुसार इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, दुष्कर्म, अपहरण, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मामलों में पहले से केस दर्ज हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस द्वारा किसी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड होने का दावा या किसी मामले में आरोपी होना, उसे दोषी सिद्ध नहीं करता। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाता है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर से संसद मार्च निकाला गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने का आरोप लगाया था, जबकि पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए।
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद ली। पुलिस के अनुसार इस तकनीक से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करने के बाद कई ऐसे लोगों की पहचान हुई, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद है।
पुलिस का दावा – 2,873 लोगों का मिला आपराधिक रिकॉर्ड
दिल्ली पुलिस के अनुसार FRS के जरिए कुल 2,873 लोगों की पहचान की गई, जिनका किसी न किसी आपराधिक मामले से संबंध बताया गया है। पुलिस का कहना है कि इनमें से अधिकांश लोग उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, चांद बाग और सीलमपुर, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जामिया नगर, शाहीन बाग और ओखला तथा मध्य दिल्ली के विभिन्न इलाकों से जुड़े हुए हैं।
पुलिस के मुताबिक यह सभी लोग प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर मौजूद थे और उनकी पहचान उपलब्ध आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर की गई है।
989 लोगों पर गंभीर अपराधों के मामले होने का दावा
दिल्ली पुलिस का कहना है कि पहचाने गए 2,873 लोगों में से 989 व्यक्तियों का रिकॉर्ड गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़ा हुआ है। पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इनमें—
- 101 लोगों पर हत्या के मामले,
- 62 लोगों पर हत्या के प्रयास के मामले,
- 284 लोगों पर डकैती एवं लूट के मामले,
- 61 लोगों पर दुष्कर्म के मामले,
- 6 लोगों पर पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामले,
- 25 लोगों पर महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले,
- 229 लोगों पर आर्म्स एक्ट के तहत मामले,
- 135 लोगों पर झपटमारी (Snatching) के मामले,
- 19 लोगों पर अपहरण के मामले,
- तथा 67 लोगों पर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट से जुड़े मामले दर्ज होने का दावा किया गया है।
पुलिस के अनुसार इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि प्रदर्शन में ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनका पहले से गंभीर अपराधों से संबंध रहा है।
कई लोगों को बताया आदतन अपराधी
दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया कि पहचाने गए लोगों में बड़ी संख्या ऐसे व्यक्तियों की है, जिन पर केवल एक नहीं बल्कि कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार हत्या के मामलों में शामिल बताए गए 101 लोगों में से 42 पर दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 12 व्यक्तियों पर दस या उससे अधिक मामले दर्ज होने का रिकॉर्ड सामने आया है।
इसी प्रकार हत्या के प्रयास के 62 मामलों में शामिल बताए गए लोगों में से 25 पर दो या उससे अधिक मुकदमे दर्ज हैं। डकैती और लूट के मामलों में शामिल बताए गए 284 लोगों में से 155 पर दो या उससे अधिक मामले हैं, जबकि 31 लोगों पर दस से अधिक मुकदमे दर्ज होने का दावा किया गया है।
महिलाओं के खिलाफ अपराध और NDPS मामलों के आंकड़े
दिल्ली पुलिस के अनुसार दुष्कर्म के मामलों में शामिल बताए गए 61 लोगों में से 8 पर दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के 25 आरोपियों में से 6 पर एक से अधिक मामले दर्ज होने का दावा किया गया है।
इसी तरह NDPS एक्ट से जुड़े 67 लोगों में से 9 ऐसे बताए गए हैं, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि FRS डेटा और मौजूदा आपराधिक रिकॉर्ड के विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास मौजूद कुछ लोगों का आपराधिक इतिहास केवल एक-दो मामलों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई लोग आदतन अपराधी की श्रेणी में आते हैं। पुलिस का दावा है कि इन व्यक्तियों का संबंध हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, महिलाओं के खिलाफ अपराध, आर्म्स एक्ट, अपहरण, झपटमारी और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों से रहा है।
नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित CJP के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने FRS डेटा के आधार पर 2,873 लोगों की पहचान और उनमें से 989 लोगों के गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड होने का दावा किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि होना शेष है और किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध दर्ज मामला या पुलिस का आरोप उसे स्वतः दोषी सिद्ध नहीं करता। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाता है।












