जमशेदपुर: Karim सिटी कॉलेज के विमेंस सेल की ओर से छात्राओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को कॉलेज के ई-क्लास रूम-1 में मेंस्ट्रुअल हेल्थ एंड हाइजीन विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़ी सही जानकारी देना, स्वच्छता के महत्व को समझाना तथा पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं ने भाग लिया और विशेषज्ञों से खुले मन से अपने सवाल पूछे।
महिला स्वास्थ्य और जागरूकता को लेकर विशेष पहल
करीम सिटी कॉलेज का विमेंस सेल समय-समय पर छात्राओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता है। इसी कड़ी में आयोजित इस कार्यशाला में मासिक धर्म के दौरान अपनाई जाने वाली स्वच्छता, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं था, बल्कि छात्राओं को ऐसे विकल्पों से परिचित कराना भी था, जो उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बेहतर हों।
फेमफ्यूचर कलेक्टिव की सुश्री मोनू शर्मा ने किया संबोधित
कार्यक्रम की रिसोर्स पर्सन फेमफ्यूचर कलेक्टिव की सुश्री मोनू शर्मा थीं। उन्होंने बेहद सरल और संवादात्मक शैली में छात्राओं को मेंस्ट्रुअल हेल्थ और हाइजीन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मासिक धर्म एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है और इससे जुड़े मिथकों एवं झिझक को दूर करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि सही जानकारी और उचित स्वच्छता अपनाकर वे अपने स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल कर सकती हैं।
डिस्पोजेबल सैनिटरी पैड के पर्यावरणीय प्रभाव पर डाली रोशनी
कार्यशाला के दौरान सुश्री मोनू शर्मा ने पारंपरिक डिस्पोजेबल सैनिटरी पैड के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिकांश सैनिटरी पैड में प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है, जो लंबे समय तक नष्ट नहीं होता और पर्यावरण प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनता है।
उन्होंने छात्राओं को यह समझाया कि यदि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक उत्पादों का उपयोग किया जाए, तो प्लास्टिक कचरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इको-फ्रेंडली विकल्प अपनाने के लिए किया प्रेरित
रिसोर्स पर्सन ने कार्यशाला में रीयूज़ेबल कॉटन क्लॉथ पैड, पीरियड अंडरवियर और मेंस्ट्रुअल कप जैसे पर्यावरण अनुकूल विकल्पों की जानकारी दी। उन्होंने इन उत्पादों के उपयोग, उनकी सुरक्षा, स्वच्छता और दीर्घकालिक लाभों के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि ये विकल्प न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि लंबे समय में आर्थिक रूप से भी लाभदायक और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। छात्राओं को इन विकल्पों पर विचार करने और जागरूकता फैलाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
इंटरैक्टिव सवाल-जवाब सत्र रहा आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम का सबसे रोचक हिस्सा इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र रहा, जिसमें छात्राओं ने खुलकर भाग लिया। उन्होंने मेंस्ट्रुअल हेल्थ, व्यक्तिगत स्वच्छता, विभिन्न मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स, उनके उपयोग और उनसे जुड़े भ्रमों को लेकर कई सवाल पूछे।
सुश्री मोनू शर्मा ने सभी प्रश्नों के सरल और वैज्ञानिक आधार पर उत्तर दिए, जिससे छात्राओं की कई शंकाओं का समाधान हुआ। इस सत्र ने छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें सही जानकारी भी उपलब्ध कराई।
महाविद्यालय की शिक्षिकाओं ने भी किया उत्साहवर्धन
कार्यक्रम में विमेंस सेल की कोऑर्डिनेटर डॉ. कौसर तस्नीम के साथ डॉ. फरज़ाना अंजुम और डॉ. अनुपमा मिश्रा भी उपस्थित रहीं। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मासिक धर्म से जुड़ी जागरूकता प्रत्येक छात्रा के लिए आवश्यक है।
उन्होंने छात्राओं को अपने परिवार, मित्रों और समाज में भी पीरियड्स से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा स्वच्छता और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों के उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक करने का संदेश दिया।
स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास
कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि छात्राएं सही जानकारी के आधार पर सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प अपनाती हैं, तो वे अपने स्वास्थ्य की रक्षा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
Karim सिटी कॉलेज के विमेंस सेल द्वारा आयोजित यह मेंस्ट्रुअल हेल्थ एंड हाइजीन कार्यशाला छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और जागरूकता बढ़ाने वाली पहल साबित हुई। इस कार्यक्रम ने छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों, व्यक्तिगत स्वच्छता, सुरक्षित स्वास्थ्य आदतों और पर्यावरण के अनुकूल मेंस्ट्रुअल उत्पादों के महत्व से परिचित कराया। महाविद्यालय की यह पहल न केवल महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफल रही, बल्कि स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार समाज के निर्माण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

















