जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान NIT जमशेदपुर ने एक बार फिर वैश्विक शोध जगत में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के तीन प्रतिष्ठित संकाय सदस्य प्रो. सतीश कुमार, डॉ. सैकत रंजन मैती और डॉ. विशेष रंजन कर को साईरैंक ग्लोबल रजिस्ट्री 2025 में दुनिया के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। यह उपलब्धि न केवल इन तीनों शिक्षकों की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि एनआईटी जमशेदपुर की बढ़ती वैश्विक शोध प्रतिष्ठा और अकादमिक उत्कृष्टता का भी प्रमाण है।
यह सम्मान शोध उत्पादकता, उच्च गुणवत्ता वाले शोध-पत्रों, वैज्ञानिक उद्धरण (Citations), नवाचार तथा समग्र वैज्ञानिक योगदान के व्यापक मूल्यांकन के बाद प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि ने पूरे संस्थान, विद्यार्थियों और शोध समुदाय में उत्साह का माहौल बना दिया है।
साईरैंक ग्लोबल रजिस्ट्री में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
साईरैंक ग्लोबल रजिस्ट्री दुनिया भर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का मूल्यांकन करने वाली एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली है। इसमें शोधकर्ताओं के वैज्ञानिक योगदान का आकलन कई महत्वपूर्ण मानकों के आधार पर किया जाता है।
इन मानकों में शोध-पत्रों की संख्या, उनकी गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशन, शोध कार्यों को मिले उद्धरण (Citations), नवाचार और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय पर पड़े प्रभाव को प्रमुखता से देखा जाता है।
इन्हीं सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एनआईटी जमशेदपुर के तीनों फैकल्टी सदस्यों ने विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों में अपनी जगह बनाई है।
तीनों शिक्षकों ने बढ़ाया संस्थान का गौर
मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. सतीश कुमार, डॉ. सैकत रंजन मैती और डॉ. विशेष रंजन कर लंबे समय से अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

इनके शोध कार्य ऊर्जा, विनिर्माण (Manufacturing), उन्नत सामग्री, डिजाइन इंजीनियरिंग, थर्मल सिस्टम तथा आधुनिक यांत्रिक अभियांत्रिकी के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
इनकी उपलब्धि ने न केवल विभाग बल्कि पूरे संस्थान का गौरव बढ़ाया है।
अनुसंधान और नवाचार के प्रति समर्पण का परिणाम
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी तकनीकी संस्थान की पहचान उसके शोध कार्यों और नवाचार क्षमता से होती है।
एनआईटी जमशेदपुर के इन तीनों वैज्ञानिकों ने वर्षों की मेहनत, निरंतर अनुसंधान और उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक कार्यों के माध्यम से यह मुकाम हासिल किया है।
उनके शोध कार्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से उद्धृत किए गए हैं, जिससे वैज्ञानिक समुदाय में उनकी विशेष पहचान बनी है।
विभागाध्यक्ष ने दी बधाई
इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष डॉ. परमानंद कुमार ने तीनों संकाय सदस्यों को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि यह सम्मान उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां विभाग के शोध वातावरण को और अधिक मजबूत बनाती हैं तथा विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा शिक्षकों को विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करती हैं।
निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने बताया महत्वपूर्ण उपलब्धि
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने भी तीनों शिक्षकों को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल तीन संकाय सदस्यों की व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि पूरे संस्थान के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि वैश्विक शोध परिदृश्य में एनआईटी जमशेदपुर की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
वैश्विक शोध जगत में मजबूत हो रही एनआईटी जमशेदपुर की पहचान
पिछले कुछ वर्षों में एनआईटी जमशेदपुर ने शोध, नवाचार और तकनीकी विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
संस्थान लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं में भागीदारी बढ़ा रहा है। आधुनिक प्रयोगशालाओं, उन्नत अनुसंधान सुविधाओं और उद्योगों के साथ सहयोग के कारण यहां का शोध वातावरण लगातार बेहतर हो रहा है।
यही कारण है कि संस्थान के वैज्ञानिकों और शिक्षकों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी संस्थान के शिक्षक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होते हैं तो उसका सीधा लाभ विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी मिलता है।
ऐसे शिक्षक अपने अनुभव, ज्ञान और नवीन शोध पद्धतियों के माध्यम से छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
इससे विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिसर्च करने, प्रतिष्ठित जर्नलों में शोध प्रकाशित करने और वैश्विक संस्थानों के साथ सहयोग करने का अवसर मिलता है।
नवाचार और तकनीकी समाधान को मिलेगा बढ़ावा
एनआईटी जमशेदपुर लगातार ऐसे शोध कार्यों को प्रोत्साहित कर रहा है जो उद्योग, समाज और देश की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।
संस्थान के शोधकर्ता ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक विनिर्माण तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
इस प्रकार के शोध भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही प्रतिष्ठा
NIT जमशेदपुर देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल है और समय-समय पर उसके शिक्षक एवं शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते रहे हैं।
साईरैंक ग्लोबल रजिस्ट्री 2025 में तीन संकाय सदस्यों का चयन इस बात का प्रमाण है कि संस्थान की शोध गुणवत्ता वैश्विक मानकों के अनुरूप लगातार मजबूत हो रही है।
शोध संस्कृति को मिलेगा नया प्रोत्साहन
इस उपलब्धि से संस्थान में शोध और नवाचार की संस्कृति को और अधिक मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी संस्थान के शिक्षक वैश्विक स्तर पर सम्मानित होते हैं, तो वहां के छात्र और युवा शोधकर्ता भी उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान की ओर प्रेरित होते हैं।
यह उपलब्धि भविष्य में और अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग, शोध परियोजनाओं तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगी।
NIT जमशेदपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. सतीश कुमार, डॉ. सैकत रंजन मैती और डॉ. विशेष रंजन कर का साईरैंक ग्लोबल रजिस्ट्री 2025 में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल होना संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह सम्मान उनके उत्कृष्ट शोध, नवाचार और वैज्ञानिक योगदान का प्रमाण है। साथ ही, यह उपलब्धि वैश्विक शोध जगत में एनआईटी जमशेदपुर की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रभाव को भी मजबूती प्रदान करती है। आने वाले समय में यह सफलता विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी तथा संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
















