जमशेदपुर: Raksha Bandhan का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर जमशेदपुर पूर्वी की लोकप्रिय विधायिका श्रीमती पूर्णिमा साहू ने प्रदेशवासियों, विशेषकर बहनों के नाम एक भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने सभी से अपील की है कि इस वर्ष रक्षाबंधन को केवल एक पारंपरिक त्योहार के रूप में न मनाकर, इसे ‘लोकल फॉर वोकल’, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से भी जोड़ें।
विधायिका ने कहा कि राखी केवल एक धागा नहीं होती, बल्कि यह प्रेम, सुरक्षा, विश्वास और परिवार के मजबूत रिश्ते का प्रतीक है। इसलिए इस त्योहार को भावनाओं और भारतीय संस्कृति के अनुरूप मनाया जाना चाहिए।
राखी केवल धागा नहीं, बल्कि प्रेम का पवित्र बंधन
अपने संदेश में श्रीमती पूर्णिमा साहू ने कहा कि भाई-बहन का रिश्ता दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक है। राखी का धागा केवल कलाई पर नहीं बंधता, बल्कि यह दो दिलों को जोड़ने वाला विश्वास का प्रतीक होता है।

उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में तकनीक ने जीवन को आसान जरूर बनाया है, लेकिन रिश्तों की गर्माहट और भावनाओं का महत्व आज भी उतना ही है। इसलिए इस पर्व को पूरी आत्मीयता और पारंपरिक तरीके से मनाने का प्रयास करना चाहिए।
लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा देने की अपील
विधायिका पूर्णिमा साहू ने अपनी सबसे महत्वपूर्ण अपील में कहा कि इस वर्ष बहनें अपने भाइयों के लिए स्थानीय स्तर पर बनी हुई राखियां ही खरीदें।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह (SHGs), स्थानीय महिला कारीगर और छोटे उद्यमी बड़ी मेहनत से सुंदर एवं आकर्षक राखियां तैयार करते हैं। यदि लोग इन्हीं राखियों को खरीदेंगे तो इससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और कई परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि संभव हो तो बहनें अपने हाथों से राखी बनाकर अपने भाइयों को भेजें। हाथों से बनी राखी में प्रेम, अपनापन और भावनाओं का विशेष महत्व होता है।
पर्यावरण-अनुकूल (Eco-Friendly) राखियों को अपनाने की सलाह
विधायिका ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अपील की कि इस वर्ष प्लास्टिक और रासायनिक सामग्री से बनी राखियों के बजाय इको-फ्रेंडली (Eco-Friendly) राखियों का उपयोग करें।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और जैविक सामग्री से बनी राखियां पर्यावरण के लिए सुरक्षित होती हैं और इससे प्रकृति का संरक्षण भी होता है। आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है।
ऑनलाइन नहीं, डाक विभाग के माध्यम से भेजें राखी
श्रीमती पूर्णिमा साहू ने अपने संदेश में कहा कि आजकल लोग ऑनलाइन माध्यम से सीधे राखी भेज देते हैं, लेकिन इससे रिश्तों की आत्मीयता कहीं न कहीं कम हो जाती है।
उन्होंने बहनों से आग्रह किया कि वे अपनी राखियों को अपने हाथों से पैक करें और भारत सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग की स्पीड पोस्ट (Speed Post) सेवा के माध्यम से अपने भाइयों तक भेजें।
उनका कहना है कि जब बहन स्वयं अपने हाथों से राखी तैयार कर उसे डाक के माध्यम से भेजती है, तो उसमें भावनाओं का स्पर्श भी शामिल होता है। यही इस पर्व की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
सीमा पर तैनात वीर जवानों को भी भेजें राखी
अपने संदेश में विधायिका ने देश की रक्षा में लगे सैनिकों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि हमारी सीमाओं पर हजारों सैनिक अपने परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा में दिन-रात लगे रहते हैं।
ऐसे में समाज की हर बहन का यह कर्तव्य है कि वह उन वीर जवानों को भी राखी भेजे और उनके प्रति सम्मान एवं स्नेह व्यक्त करे। इससे सैनिकों का मनोबल बढ़ेगा और उन्हें यह महसूस होगा कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
रिश्तों में अपनापन बनाए रखने का संदेश
श्रीमती पूर्णिमा साहू ने कहा
जब तक बहन के हाथों का स्पर्श राखी की डोर को नहीं छुएगा, तब तक भाई की कलाई तक वह सच्चा प्यार कैसे पहुंचेगा? ऑनलाइन के इस दौर में आइए, डाक विभाग के माध्यम से अपनी भावनाओं को अपने भाइयों तक पहुंचाएं और इस रिश्ते को और मजबूत बनाएं।”
उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाओं का उपयोग जरूर करें, लेकिन पारिवारिक रिश्तों की भावनाओं और भारतीय संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए
आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को करें मजबूत
विधायिका ने कहा कि यदि हर परिवार स्थानीय उत्पादों को अपनाएगा तो इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को नई मजबूती मिलेगी। स्थानीय महिलाओं, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार राखियां खरीदने से उनके परिवारों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
Raksha Bandhan के पावन अवसर पर जमशेदपुर पूर्वी की विधायिका श्रीमती पूर्णिमा साहू का यह संदेश केवल एक शुभकामना नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति को मजबूत करने का प्रेरणादायक आह्वान है। उन्होंने सभी बहनों से अपील की है कि वे इस वर्ष इको-फ्रेंडली और स्वदेशी राखियां अपनाएं, डाक विभाग की स्पीड पोस्ट के माध्यम से अपने भाइयों तक प्रेम का संदेश पहुंचाएं तथा देश की रक्षा में तैनात वीर जवानों को भी राखी भेजकर उनके प्रति सम्मान प्रकट करें। उनका यह संदेश रक्षाबंधन को केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में मनाने की प्रेरणा देता है।














