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यह संघ कार्यालय पर नहीं राष्ट्रवादी विचार पर हमला है अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद Jharkhand

On: June 17, 2026 6:08 PM
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रांची: अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, Jharkhand ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यालय पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे केवल किसी भवन पर हमला नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा पर आघात बताया है। परिषद ने अपने बयान में कहा कि इस प्रकार की हिंसक घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द के लिए चिंता का विषय हैं तथा ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

परिषद ने कहा – वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, हिंसा नहीं

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परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विभिन्न विचारधाराओं का होना स्वाभाविक है और मतभेद भी लोकतंत्र का हिस्सा हैं। लेकिन किसी भी संगठन, संस्था या विचारधारा के विरोध में हिंसा, तोड़फोड़ या हमला करना लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। परिषद के अनुसार संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया ही किसी भी विवाद के समाधान का उचित माध्यम है।

यह केवल कार्यालय नहीं राष्ट्रवादी विचारों पर हमला परिषद

अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने अपने वक्तव्य में कहा कि संघ लंबे समय से समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक जागरण के विभिन्न कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। परिषद के प्रतिनिधियों ने कहा कि कार्यालय पर हमला उन विचारों और मूल्यों पर हमला माना जाना चाहिए, जिनके लिए लाखों स्वयंसेवक समर्पित भाव से कार्य करते हैं।

परिषद के अनुसार, “यह केवल संघ कार्यालय पर हमला नहीं है, बल्कि राष्ट्रवादी मूल्यों और वैचारिक प्रतिबद्धता पर हमला है।”

दोषियों की शीघ्र पहचान कर कार्रवाई की मांग

परिषद ने राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की कि घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की जल्द पहचान की जाए और कानून के अनुसार उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। परिषद का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

कानून व्यवस्था बनाए रखने पर दिया जोर

परिषद ने कहा कि समाज में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रशासन को सतर्क रहना होगा। किसी भी प्रकार की हिंसक घटना से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, इसलिए समय रहते प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। परिषद ने उम्मीद जताई कि संबंधित एजेंसियां निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएंगी।

लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान की अपील

पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने अपने बयान में कहा कि भारत का लोकतंत्र विचारों की विविधता और संवाद की संस्कृति पर आधारित है। ऐसे में किसी भी प्रकार की हिंसा लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। परिषद ने सभी पक्षों से संयम बनाए रखने और संविधान तथा कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की अपील की।

सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने का आह्वान

परिषद ने देशवासियों से शांति, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की। परिषद के अनुसार किसी भी प्रकार की उग्रता, हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना राष्ट्रहित के विरुद्ध है। समाज में आपसी विश्वास और भाईचारे का वातावरण बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

पूर्व सैनिकों ने संवाद और शांति का दिया संदेश

परिषद से जुड़े पूर्व सैनिकों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में राष्ट्र की सुरक्षा और एकता के लिए सेवा दी है, इसलिए वे समाज में शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था को सर्वोच्च मानते हैं। उनका कहना है कि किसी भी मतभेद का समाधान हिंसा नहीं बल्कि संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की उम्मीद

परिषद ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुरूप कार्रवाई करेगा। परिषद का कहना है कि न्यायपूर्ण और पारदर्शी जांच से ही लोगों का कानून व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

लोकतांत्रिक समाज में हिंसा के लिए नहीं है कोई स्थान

परिषद के अनुसार भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में किसी भी संगठन, संस्था या विचारधारा के खिलाफ हिंसक कार्रवाई का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। विचारों का विरोध लोकतांत्रिक तरीके से किया जा सकता है, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ समाज को विभाजित करने का कार्य करती है और इससे लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंचता है।

अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, झारखंड ने अपने बयान के माध्यम से संघ कार्यालय पर हुए कथित हमले की निंदा करते हुए शांति, कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया है। परिषद ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि वे सामाजिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों को सर्वोपरि रखते हुए किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि से दूर रहें। लोकतंत्र की मजबूती संवाद, कानून के सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में ही निहित है।

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