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Jamshedpur मासिक लोक अदालत में 97 मामलों का निष्पादन 6.58 लाख रुपये का राजस्व संग्रह

On: May 30, 2026 8:21 PM
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जमशेदपुर: जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) Jamshedpur की ओर से मई माह के अंतिम शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस लोक अदालत में विभिन्न श्रेणियों के मामलों का त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान करते हुए कुल 97 मामलों का निष्पादन किया गया। इसके साथ ही न्यायालय में लंबित मामलों के निपटारे से कुल 6 लाख 58 हजार रुपये का राजस्व भी प्राप्त हुआ। लोक अदालत के सफल आयोजन से न केवल पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिला, बल्कि न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में भी मदद मिली।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि मासिक लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य ऐसे मामलों का निपटारा करना है जिन्हें आपसी सहमति और समझौते के आधार पर सुलझाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस बार आयोजित लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन और न्यायालय में लंबित मामलों सहित कुल 97 मामलों का निष्पादन किया गया।

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उन्होंने बताया कि लोक अदालत में कुल 33 प्री-लिटिगेशन मामलों की सुनवाई हुई। प्री-लिटिगेशन मामलों में वे विवाद शामिल होते हैं जो अभी न्यायालय तक नहीं पहुंचे होते, लेकिन पक्षकारों के बीच विवाद की स्थिति बनी रहती है। ऐसे मामलों का प्रारंभिक स्तर पर समाधान होने से लोगों को न्यायालयी प्रक्रिया में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और समय तथा धन दोनों की बचत होती है।

इसके अलावा न्यायालय में लंबित 64 मामलों को भी लोक अदालत के माध्यम से निपटाया गया। इन मामलों में विभिन्न प्रकार के सिविल, आपराधिक, बैंकिंग, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक और अन्य प्रकृति के मामले शामिल थे, जिन्हें दोनों पक्षों की सहमति से सुलझाया गया। सचिव ने बताया कि लंबित मामलों के निष्पादन से न केवल न्यायालयों के कार्यभार में कमी आती है, बल्कि पक्षकारों को भी लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है।

लोक अदालत के दौरान समझौते के आधार पर निपटाए गए मामलों से कुल 6 लाख 58 हजार रुपये का राजस्व संग्रह हुआ। यह राशि विभिन्न मामलों के निस्तारण के दौरान निर्धारित शुल्क और अन्य देय मदों के माध्यम से प्राप्त हुई। राजस्व संग्रहण की यह उपलब्धि दर्शाती है कि लोक अदालतें न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाती हैं, बल्कि सरकारी राजस्व संग्रहण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कुमार सौरभ त्रिपाठी ने बताया कि लोक अदालत को सफल बनाने के लिए व्यवहार न्यायालय जमशेदपुर में छह बेंचों तथा घाटशिला अनुमंडल न्यायालय में चार बेंचों का गठन किया गया था। कुल 10 बेंचों में न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई थी। इन बेंचों ने विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई कर आपसी समझौते के आधार पर उनका निष्पादन कराया।

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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA) और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA) के निर्देशानुसार नियमित रूप से लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य आम लोगों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लोक अदालतें काफी लाभकारी साबित होती हैं, क्योंकि यहां मामलों का निपटारा बिना किसी अतिरिक्त न्यायालय शुल्क के किया जाता है।

लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां दिए गए निर्णय दोनों पक्षों की सहमति से होते हैं और उनके खिलाफ सामान्य रूप से अपील का प्रावधान नहीं होता। इससे विवादों का स्थायी समाधान संभव हो पाता है। यही कारण है कि देशभर में लोक अदालतों को वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली के रूप में प्रभावी माना जाता है।

Jamshedpur में आयोजित इस मासिक लोक अदालत में बड़ी संख्या में पक्षकारों ने भाग लिया और अपने मामलों का समाधान कराया। कई ऐसे मामले भी थे जो लंबे समय से लंबित थे और पक्षकार न्यायालयी प्रक्रिया से थक चुके थे। लोक अदालत के माध्यम से इन मामलों का समाधान होने पर लोगों ने संतोष व्यक्त किया।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि लोक अदालतें भारतीय न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। बढ़ते न्यायालयी मामलों के बीच यह व्यवस्था आम नागरिकों को राहत देने का काम कर रही है। आपसी समझौते और संवाद के माध्यम से विवादों का समाधान सामाजिक सौहार्द को भी बढ़ावा देता है।

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डालसा सचिव ने आम लोगों से अपील की कि जिन मामलों का समाधान आपसी सहमति से संभव है, वे लोक अदालतों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि लोक अदालत न्याय प्राप्त करने का एक सरल, त्वरित और प्रभावी माध्यम है। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि आर्थिक बोझ भी कम होता है।

उन्होंने बताया कि आने वाले समय में भी जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा नियमित रूप से लोक अदालतों का आयोजन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों को न्याय का लाभ मिल सके। इसके साथ ही विधिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को उनके अधिकारों और कानूनी सहायता संबंधी सुविधाओं की जानकारी भी दी जाएगी।

मई माह की इस मासिक लोक अदालत की सफलता यह दर्शाती है कि वैकल्पिक विवाद समाधान की व्यवस्था लोगों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रही है। 97 मामलों का निष्पादन और 6.58 लाख रुपये का राजस्व संग्रह इस बात का प्रमाण है कि लोक अदालतें न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ समाज में विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही हैं।

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