
गिरिडीह: जिले के Sariya थाना क्षेत्र में पुलिस कार्रवाई को लेकर शनिवार को राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया। एक वारंटी के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सरिया थाना के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे भाजपा नेताओं और समर्थकों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

यह पूरा मामला पोखरियाडीह निवासी प्रेम कुमार मंडल से जुड़ा हुआ है, जिन्हें एक पुराने मामले में पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद थाना परिसर में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, जिससे स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया।
प्रेम कुमार मंडल के साथ कथित मारपीट का आरोप
भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस हिरासत में लेने के बाद प्रेम कुमार मंडल के साथ थाना परिसर में मारपीट की गई। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जो कानून और मानवाधिकार दोनों के खिलाफ है।
कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि थाना इंस्पेक्टर अजय कुमार ने कथित रूप से नशे की हालत में अनुचित व्यवहार किया। इस आरोप के सामने आने के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस ही कानून का उल्लंघन करने लगे तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था से उठ जाएगा।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया और हिरासत में लिए गए व्यक्ति के साथ गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं किया गया।
थाना गेट पर भाजपा कार्यकर्ताओं का धरना-प्रदर्शन
शनिवार को बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता सरिया थाना पहुंचे और थाना गेट के सामने धरना पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि किसी भी आरोपी या वारंटी के साथ कानून के दायरे में कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन मारपीट और अमानवीय व्यवहार स्वीकार्य नहीं हो सकता।
धरना-प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने इंस्पेक्टर अजय कुमार को तत्काल हटाने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई।
स्थिति को देखते हुए थाना परिसर के बाहर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया। पुलिस बल भी सतर्क नजर आया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
भाजपा नेताओं ने पुलिस प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
धरना के दौरान भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन निष्पक्ष तरीके से कार्य करने के बजाय दबाव और मनमानी के तहत कार्रवाई कर रहा है।
नेताओं ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज है तो पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन हिरासत में प्रताड़ित करना पूरी तरह गलत है। भाजपा नेताओं ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी जनता की सुरक्षा करना है, न कि लोगों के साथ दुर्व्यवहार करना।
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा।
एसडीपीओ धनंजय राम पहुंचे थाना प्रदर्शनकारियों से की बातचीत
धरना-प्रदर्शन और बढ़ते तनाव की सूचना मिलने के बाद एसडीपीओ धनंजय राम सरिया थाना पहुंचे। उन्होंने भाजपा प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली।
एसडीपीओ ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है और यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
उनके आश्वासन के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई और प्रदर्शनकारियों ने अपना धरना समाप्त किया।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को सौंपा लिखित आवेदन
धरना समाप्त होने के बाद भाजपा नेताओं ने प्रशासन को एक लिखित आवेदन भी सौंपा। आवेदन में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ित को न्याय दिलाने की मांग की गई।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे मामले की निष्पक्ष जांच होने तक इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि लोगों के बीच पारदर्शिता बनी रहे।
प्रदर्शन में शामिल रहे कई भाजपा नेता और कार्यकर्ता
इस प्रदर्शन में भाजपा और युवा मोर्चा के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। धरना में युवा मोर्चा अध्यक्ष मनीष मंडल, हेमलाल उर्फ छोटू मंडल, पूर्व प्रमुख रामपति वर्मा, नकुल मंडल, बबलू मंडल, सतीश मंडल, विपिन शर्मा, बिनोद यादव, हरिहर मंडल, नरेश रज्जक, पवन मंडल, पंकज मंडल, राहुल मंडल समेत सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ के कारण थाना परिसर के बाहर काफी देर तक हलचल बनी रही।
पुलिस विभाग की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
समाचार लिखे जाने तक पुलिस विभाग की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने जांच का भरोसा जरूर दिलाया है।
स्थानीय लोग अब इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर कार्रवाई संभव हो सकेगी।
मानवाधिकार और पुलिस कार्रवाई पर फिर उठे सवाल
सरिया थाना की इस घटना ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है। अक्सर हिरासत में मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप सामने आते रहे हैं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिस को मानवीय संवेदनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। किसी भी आरोपी के साथ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो इससे न केवल सच्चाई सामने आएगी बल्कि जनता का प्रशासन पर भरोसा भी कायम रहेगा।
Sariya थाना की यह घटना फिलहाल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और आने वाले दिनों में इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।
यह समाचार स्थानीय लोगों भाजपा कार्यकर्ताओं और संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों एवं उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की आधिकारिक जांच और प्रशासनिक रिपोर्ट आने तक किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि नहीं मानी जाएगी।








