
जमशेदपुर | विशेष रिपोर्टझारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में इन दिनों बिजली संकट गहराता जा रहा है। एक तरफ लगातार बिजली कटौती से लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली दरों में बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को अब बिजली की उपलब्धता और महंगाई—दोनों का सामना करना पड़ रहा है।
🔌 लगातार बिजली कटौती से बढ़ी परेशानी
जमशेदपुर के गैर-कंपनी इलाकों और खासकर मानगो क्षेत्र में लंबे समय तक बिजली कटौती की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में बिजली की आंख-मिचौली से दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।राजनीतिक प्रतिनिधियों और संगठनों ने भी इस मुद्दे को लेकर झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के अधिकारियों से मुलाकात कर समाधान की मांग की है।
📈 बिजली दरों में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर असर
1 अप्रैल 2026 से झारखंड में बिजली के नए टैरिफ लागू हो चुके हैं, जिससे घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर असर पड़ा है।- शहरी क्षेत्रों में प्रति यूनिट दर 6.85 रुपये से बढ़कर करीब 7.40 रुपये हो गई
- ग्रामीण क्षेत्रों में भी दरों में बढ़ोतरी दर्ज की गई
- उद्योगों और व्यवसायों की लागत भी बढ़ी
🏭 DVC क्षेत्रों में और ज्यादा बोझ
डैमोडर वैली कॉरपोरेशन (DVC) से बिजली लेने वाले क्षेत्रों में टैरिफ में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ उपभोक्ताओं को लगभग 40% तक अधिक भुगतान करना पड़ सकता है, जिससे उद्योग और घरेलू उपभोक्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।⚙️ सिस्टम लॉस और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर बड़ी समस्या
झारखंड के बिजली सिस्टम में तकनीकी और वितरण संबंधी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।- DVC नेटवर्क में लगभग 4.30% ऊर्जा हानि
- JBVNL सिस्टम में कुल वितरण हानि करीब 28% तक
ये आंकड़े बताते हैं कि बिजली आपूर्ति में बड़ी मात्रा में नुकसान हो रहा है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है।

⚡ JBVNL की भूमिका और चुनौतियां
Jharkhand Bijli Vitran Nigam Limited (JBVNL) राज्य की प्रमुख बिजली वितरण कंपनी है, लेकिन इसे हर साल भारी वित्तीय नुकसान और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। खराब प्रबंधन, बिजली चोरी और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी समस्याएं स्थिति को और जटिल बना रही हैं।जमशेदपुर में बिजली संकट केवल कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक समस्या बन चुकी है जिसमें
👉 महंगी बिजली
👉 खराब वितरण व्यवस्था
👉 तकनीकी नुकसान
👉 और प्रशासनिक चुनौतियां शामिल हैयदि जल्द ही इन समस्याओं पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है—जिसका सीधा असर आम जनता और उद्योगों दोनों पर पड़ेगा।














