
जमशेदपुर: एक ऐसे महान चिकित्सक को याद कर रहे हैं जिनका जीवन सेवा, करुणा और मानवता का प्रतीक था। DR. एस. के. भटनागर का निधन 17 अप्रैल 2026 को हुआ और उनका अंतिम संस्कार 18 अप्रैल 2026 को पार्वती घाट पर संपन्न हुआ। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची सफलता व्यक्तिगत लाभ में नहीं, बल्कि दूसरों की मदद में है।

DR. एस. के. भटनागर का प्रारंभिक जीवन और विदेश से वापसी
DR. एस. के. भटनागर ने 1970 के दशक में विदेशों में अपना सुस्थापित करियर छोड़कर भारत लौटने का साहसी निर्णय लिया। उस समय गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं दुर्लभ थीं, और उन्होंने अपनी पत्नी DR. रीता भटनागर के साथ मिलकर देश की सेवा का संकल्प लिया। जमशेदपुर को अपनी कर्मभूमि बनाते हुए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
उनकी पत्नी DR. रीता भटनागर भी एक समर्पित चिकित्सक हैं, जो भिलाई पहाड़ी के रोटरी क्लीनिक और राजेंद्र विद्यालय के नि:शुल्क क्लीनिक में सेवा देती हैं। यह दंपति न केवल चिकित्सा विशेषज्ञ थे, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के सहारा भी बने। डॉ. भटनागर टीएमएच (टाटा मेन हॉस्पिटल) में कार्यरत रहे और सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा जारी रखी।
जमशेदपुर में उनकी अनमोल सेवाएं
जमशेदपुर के बिष्टूपुर स्थित पार्वती घाट पर डॉ. एस. के. भटनागर 20 साल से अधिक समय से हर रविवार नि:शुल्क चिकित्सा सेवा दे रहे थे। 83 वर्ष की उम्र में भी वे शाम 5 से 7 बजे तक मरीजों का इलाज करते, खासकर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, स्किन डिजीज और जॉइंट पेन के रोगियों को। रोटरी क्लब की मदद से मुफ्त दवाएं वितरित की जातीं।
उनकी निजी प्रैक्टिस में फीस मात्र 200 रुपये रखी, ताकि गरीब असहाय न महसूस करें। वे आईएमए के आजीवन सदस्य और आईओएएच के जिलाध्यक्ष भी थे। उनका योगदान औद्योगिक शहर जमशेदपुर के मजदूरों और परिवारों तक फैला, जहां संसाधन सीमित थे।
DR. भटनागर मरीजों को कभी ‘केस’ नहीं मानते थे, बल्कि व्यक्ति के रूप में उनका सम्मान करते। उनकी सहानुभूति ने स्वास्थ्य सेवा को मानवीय रूप दिया। पार्वती घाट क्लीनिक आसपास के लोगों के लिए वरदान था।

नि:शुल्क सेवा की प्रेरणादायक यात्रा
20 साल से जारी यह सेवा रोटरी क्लब के सहयोग से चलती थी। डॉ. भटनागर ने कहा था कि गरीबों को कम फीस पर इलाज मिले, इसलिए उन्होंने ऐसा किया। उनकी उम्र के बावजूद उत्साह लोभनीय था। यह क्लीनिक सामान्य बीमारियों के लिए प्रमुख केंद्र बना।
DR. रीता भटनागर का सहयोग और संयुक्त विरासत
DR. रीता भटनागर, 79 वर्षीया, सप्ताह में दो दिन बुधवार और शनिवार को रोटरी क्लीनिक मदर एंड चाइल्ड सेंटर में सेवा देती हैं। वे राजेंद्र विद्यालय साकची के नि:शुल्क क्लीनिक में भी सक्रिय हैं। इस दंपति ने मिलकर पीढ़ियों को प्रभावित किया।
उनकी संयुक्त सेवा ने जमशेदपुर की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किया। गरीबों, महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान दिया। यह विरासत आज भी प्रेरणा देती है।
उनके मूल्य और दर्शन
DR. भटनागर का मानना था कि चिकित्सा विज्ञान के साथ सहानुभूति जरूरी है। वे कभी मरीज को अनसुना न होने देते। सीमित संसाधनों में भी सभी को इलाज सुनिश्चित किया। उनका जीवन निस्वार्थ सेवा का उदाहरण है।
ऐसे दौर में जब विदेशी अवसर लुभाते थे, उन्होंने देश चुना। यह निर्णय हजारों जीवन बचाने का कारण बना। उनकी दयालुता सभी को छू गई।
समाज पर प्रभाव
उनके क्लीनिक ने अनगिनत परिवारों को राहत दी। औद्योगिक मजदूरों के लिए सहारा बने। स्वास्थ्य जागरूकता फैलाई। आज उनका शून्य महसूस हो रहा है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा
DR. एस. के. भटनागर का जीवन सिखाता है कि सच्ची सफलता दूसरों के जीवन में बदलाव लाने में है। उनकी विरासत मार्गदर्शन करेगी। युवा डॉक्टरों को प्रेरित करेगी। सेवा का भाव कभी न मिटे।
हम शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को चिर शांति प्रदान करें, और उनकी सेवा की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग आलोकित करती रहे













