मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

Bindi-Tilak Controversy: TCS के बाद Lenskart की ड्रेस कोड नीति पर बवाल

Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427
On: April 17, 2026 9:58 PM
Follow Us:
The News Frame 11
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

A 2

कॉरपोरेट जगत में ड्रेस कोड और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। Lenskart की कथित ड्रेस कोड गाइडलाइन सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कंपनी आलोचनाओं के घेरे में आ गई है। यह विवाद Tata Consultancy Services (TCS) के नासिक HR पॉलिसी विवाद के बाद सामने आया, जिससे बहस और तेज हो गई है।

विवाद का केंद्र बिंदु

सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित “ग्रूमिंग गाइड” में दावा किया गया कि:

  • हिजाब पहनने की अनुमति दी गई है
  • जबकि बिंदी, तिलक और कलावा जैसे हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर रोक का उल्लेख है

इस दस्तावेज़ के सामने आते ही लोगों ने इसे धार्मिक भेदभाव का मामला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या कॉरपोरेट नीतियां किसी एक धर्म के प्रति पक्षपाती हो सकती हैं।

कंपनी की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal, जो लेंसकार्ट के फाउंडर और CEO हैं, ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की।

उन्होंने कहा:

  • वायरल दस्तावेज़ पुराना और अप्रासंगिक है
  • वर्तमान नीति में किसी भी धर्म विशेष के प्रतीकों पर प्रतिबंध नहीं है
  • कंपनी सभी कर्मचारियों के लिए समान और समावेशी नियम लागू करती है

साथ ही उन्होंने इस भ्रम के लिए सार्वजनिक रूप से खेद भी जताया।

सोशल मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रिया

यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड करने लगा।

  • Shehzad Poonawalla समेत कई नेताओं ने इसे हिंदू संस्कृति पर हमला बताया
  • #HinduRights और #ReligiousFreedom जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे
  • कुछ यूजर्स ने इसे TCS और अन्य मामलों से जोड़कर “पैटर्न” करार दिया

विवाद के असर से Tata Consultancy Services ने नासिक ऑफिस को अस्थायी रूप से बंद कर वर्क फ्रॉम होम लागू करने का फैसला भी लिया।

गहराता मुद्दा: कॉरपोरेट नीतियां बनाम धार्मिक स्वतंत्रता

यह पूरा विवाद एक बड़े सवाल को जन्म देता है—
क्या कॉरपोरेट ड्रेस कोड धार्मिक पहचान को सीमित कर सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • ड्रेस कोड का उद्देश्य प्रोफेशनलिज़्म बनाए रखना होता है
  • लेकिन यदि नियम असंतुलित या अस्पष्ट हों, तो वे विवाद और विभाजन पैदा कर सकते हैं
  • कंपनियों को चाहिए कि वे पारदर्शी, समान और संवेदनशील नीतियां बनाएं

लेंसकार्ट ड्रेस कोड विवाद ने यह साफ कर दिया है कि आज के दौर में कॉरपोरेट निर्णय केवल आंतरिक नीति नहीं रहते, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाते हैं।

ऐसे में कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे:

  • स्पष्ट और अपडेटेड गाइडलाइंस जारी करें
  • कर्मचारियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करें
  • और किसी भी भ्रम की स्थिति में तुरंत पारदर्शी संवाद करें

यह विवाद फिलहाल शांत होता दिख रहा है, लेकिन इससे उठे सवाल आने वाले समय में कॉरपोरेट नीतियों को जरूर प्रभावित करेंगे।

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM
Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Comment

Link copied