
जमशेदपुर: DM कर्ण सत्यार्थी ने इसे बर्दाश्त नहीं किया। जमशेदपुर समाहरणालय परिसर के विभिन्न कार्यालयों का औचक निरीक्षण कर उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति, साफ-सफाई और कार्य संस्कृति की पोल खोल दी। कई कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जिससे साफ हुआ कि समाहरणालय निरीक्षण में सुधार की सख्त जरूरत है। यह घटना न सिर्फ स्थानीय प्रशासन के लिए सबक है, बल्कि पूरे झारखंड के अफसरों के लिए चेतावनी भी। आइए, जानते हैं DM के समाहरणालय निरीक्षण की पूरी डिटेल और दिए गए दिशा-निर्देश।

DM कर्ण सत्यार्थी: एक परिचय
DM श्री कर्ण सत्यार्थी जमशेदपुर के जिला प्रशासन के प्रमुख हैं। वे प्रशासनिक सुधारों के लिए जाने जाते हैं। उनके नेतृत्व में पूर्वी सिंहभूम जिले में विकास कार्य तेज हैं। समाहरणालय परिसर निरीक्षण उनकी शून्य सहनशीलता नीति का हिस्सा है। सत्यार्थी जी का मानना है कि साफ-सुथरा दफ्तर ही अच्छा प्रशासन की निशानी है। पहले भी उन्होंने अंचल कार्यालयों और बाजारों का दौरा किया है।
DM निरीक्षण का दायरा कौन-कौन से कार्यालय चेक हुए?
DM ने समाहरणालय परिसर के कई महत्वपूर्ण कार्यालयों का जायजा लिया। इसमें शामिल थे:
- सामाजिक सुरक्षा शाखा
- राजस्व विभाग
- निर्वाचन कार्यालय
- नजारत शाखा
- विधि शाखा
- कोर्ट कक्ष
- समाज कल्याण विभाग
- डीआईओ कार्यालय
- झारनेट
- सामान्य शाखा
- गोदाम
- यूआईडी केंद्र
हर कार्यालय में उपस्थिति पंजी की गहन जांच हुई। अनुपस्थित कर्मियों पर सवाल उठे। साफ-सफाई की कमी देखकर नाराजगी जताई गई। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य कार्य अनुशासन और कार्य संस्कृति मजबूत करना था।

मुख्य खामियां क्या-क्या मिला गलत?
DM के औचक निरीक्षण में कई कमियां सामने आईं:
- कर्मचारी अनुपस्थिति: कई जगह स्टाफ गायब मिला। कारण बताओ नोटिस जारी होंगे।
- गंदगी: कार्यालयों में धूल-मिट्टी का अंबार।
- पंजी रख-रखाव: रजिस्टर असंगठित।
- सुरक्षा कमजोर: प्रवेश-निकास पर लापरवाही।
- अनुपयोगी सामान: पुराने फर्नीचर और मशीनें जगह घेर रही।
DM ने कहा कि ये सब तुरंत ठीक हो। बायोमेट्रिक हाजिरी सख्त करें। दस्तावेज व्यवस्थित रखें। अनुपयोगी वस्तुओं की नीलामी जिला स्तर पर कराएं। पार्किंग और वेटिंग एरिया भी चेक किया।
दिए गए दिशा-निर्देश
DM कर्ण सत्यार्थी ने स्पष्ट निर्देश दिए:
- समयबद्ध कार्य: कर्मचारी देरी न करें।
- नियमित बायोमेट्रिक: रोज हाजिरी अनिवार्य।
- सुरक्षा मजबूत: सीसीटीवी और गार्ड बढ़ाएं।
- नीलामी: पुराना सामान बेचें।
- नागरिक सुविधा: आने वालों की समस्याएं तुरंत सुलझाएं।
ये निर्देश लागू न होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।

जनता से संवाद: समस्याओं का समाधान
समाहरणालय निरीक्षण के दौरान DM ने जनता से भी बात की। जमीन विवाद, प्रमाण पत्र और पेंशन जैसे मुद्दे सुने। मौके पर ही पदाधिकारियों को कार्रवाई के आदेश दिए। इससे लोगों में भरोसा बढ़ा। एक नागरिक ने कहा, “ऐसे अफसर चाहिए जो खुद देखें।” यह कदम प्रशासन-जनता के बीच पुल का काम करेगा।
उपस्थित अधिकारी
निरीक्षण में ये नेता साथ थे:
- उप विकास आयुक्त श्री नागेन्द्र पासवान
- नजारत उपसमाहर्ता श्री डेविड बलिहार
- डीटीओ श्री धनंजय
- विधि शाखा प्रभारी श्री चंद्रजीत सिंह
सभी ने नोट्स लिए और अमल का भरोसा दिलाया।
DM झारखंड में प्रशासनिक सुधार व्यापक नजरिया
झारखंड के समाहरणालयों में ऐसी लापरवाही आम है। रांची, चाईबासा जैसे जिलों में भी उपायुक्त निरीक्षण होते रहते हैं। लेकिन DM कर्ण सत्यार्थी का स्टाइल अलग है – बिना पूर्व सूचना। इससे कर्मचारी सतर्क रहेंगे। स्वच्छ भारत अभियान के तहत साफ-सफाई पर जोर जरूरी। बायोमेट्रिक से भ्रष्टाचार रुकेगा।

सुधार के फायदे
- कार्यक्षमता बढ़ेगी: समय पर काम होगा।
- जनता खुश: शिकायतें कम।
- अनुशासन: कर्मचारी ड्यूटी पर।
- पारदर्शिता: दस्तावेज सही।
- सुरक्षा: अपराध रुकेंगे।
सरकार को ऐसे निरीक्षण अभियान चलाना चाहिए।
समाहरणालय में स्टाफ की कमी, पुरानी व्यवस्था बड़ी समस्या। लेकिन औचक निरीक्षण से डर बनेगा। डिजिटल पंजी और ऐप से ट्रैकिंग आसान। जनता को भी रिपोर्टिंग का अधिकार दें। भविष्य में साप्ताहिक चेक जरूरी।
DM कर्ण सत्यार्थी का समाहरणालय औचक निरीक्षण प्रशासनिक क्रांति का संकेत है। साफ-सफाई, उपस्थिति और सुरक्षा पर सख्ती से जिला बेहतर बनेगा। सभी अफसरों से अपील – ऐसे निरीक्षण नियम बनाएं। समाहरणालय परिसर अब मिसाल बनेगा।









