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TATA स्टील फाउंडेशन ने धतकीडीह कम्युनिटी सेंटर में फ्लडलाइट्स के माध्यम से युवाओं के सपनों को दी नई उम्मीद

On: March 25, 2026 9:18 AM
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जमशेदपुर जैसे शहर में खेलों का जुनून हमेशा से ही युवाओं के दिलों में बसता है। लेकिन क्या हो जब शाम ढलते ही अभ्यास रुक जाए? TATA स्टील फाउंडेशन ने धतकीडीह कम्युनिटी सेंटर के बास्केटबॉल कोर्ट में फ्लडलाइट्स लगाकर इस समस्या का समाधान कर दिया है। यह पहल न सिर्फ युवाओं को नई ऊर्जा दे रही है, बल्कि जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

धतकीडीह कम्युनिटी सेंटर खेलों का महत्वपूर्ण केंद्र

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धतकीडीह कम्युनिटी सेंटर जमशेदपुर में बास्केटबॉल के शौकीनों के लिए एक खास जगह है। यहां TATA स्टील फाउंडेशन ने इस कोर्ट को विकसित किया है, और शहर में सामुदायिक स्तर पर सिर्फ दो ही ऐसे कोर्ट हैं—सोनारी और धतकीडीह। इन केंद्रों पर स्थानीय प्रतिभाएं निखरती हैं। रोजाना 82 बच्चे सुबह-शाम यहां अभ्यास करते हैं।

स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए शाम का समय ही अभ्यास का मुख्य मौका होता है। सूर्यास्त के बाद भी वे खेलना चाहते हैं, लेकिन पहले रोशनी की कमी से मुश्किल होती थी। अब फ्लडलाइट्स से सब कुछ बदल गया है। कोर्ट पर छह पोलों में 24 फ्लडलाइट्स लगी हैं, हर एक 300-300 वाट की, जिनकी कुल लागत करीब 11 लाख रुपये है। इससे मैदान रात तक जगमगा रहा है।

यह सुविधा न सिर्फ अभ्यास को आसान बनाती है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है। पहले अंधेरे में चोट लगने का डर रहता था, अब खिलाड़ी बेफिक्र होकर खेल सकते हैं। भागीदारी बढ़ गई है, और नए बच्चे जुड़ रहे हैं। TATA स्टील फाउंडेशन की यह पहल खेलों को ग्रासरूट स्तर पर मजबूत कर रही है।

फ्लडलाइट्स लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

पहले धतकीडीह के खुले मैदान वाले कोर्ट पर शाम होते ही विजिबिलिटी कम हो जाती थी। अभ्यास की क्वालिटी गिर जाती, और सुरक्षा खतरे में पड़ जाती। समुदाय समिति, कोच, अभिभावक और खिलाड़ियों ने कई बार यह मुद्दा उठाया। TATA स्टील फाउंडेशन ने उनकी सुन ली और फ्लडलाइट्स लगवा दीं।

इससे शाम के सत्र लंबे हो गए हैं। छात्र जो दिनभर पढ़ाई करते हैं, वे अब रात तक प्रैक्टिस कर पाते हैं। उत्साह बढ़ा है, और प्रदर्शन में सुधार आया है। कोर्ट अब जिला-राज्य स्तर के टूर्नामेंट्स की बेहतर मेजबानी कर सकता है। उद्घाटन समारोह में टीएसएफ के चीफ पीपल ऑफिसर सुधीर कुमार सिंह मुख्य अतिथि थे, और झारखंड बास्केटबॉल एसोसिएशन के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

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विशेषज्ञों और खिलाड़ियों की राय

झारखंड बास्केटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष और ओलंपियन हरभजन सिंह ने कहा, “यह जमशेदपुर में बास्केटबॉल के लिए बड़ा कदम है। पहले शाम के मैच सीमित थे, अब पेशेवर वातावरण मिलेगा। जिला-राज्य टूर्नामेंट्स यहां होंगे।” उनकी यह बात सही है, क्योंकि फ्लडलाइट्स से कोर्ट प्रोफेशनल लगने लगा है।

खिलाड़ी स्नेहा कुमारी ने खुशी जताई, “अब शाम को फोकस के साथ अभ्यास होता है। पढ़ाई और खेल का बैलेंस आसान हो गया। TATA स्टील फाउंडेशन का शुक्रिया।” इसी तरह उदय नायर ने बताया, “कोर्ट जीवंत हो गया। आत्मविश्वास बढ़ा, और ज्यादा बच्चे जुड़ रहे हैं।” ये आवाजें बताती हैं कि पहल कितनी प्रभावी है।

TATA स्टील फाउंडेशन की अन्य खेल पहलें

TATA स्टील फाउंडेशन सिर्फ फ्लडलाइट्स तक सीमित नहीं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं, और खेलों को भी बढ़ावा देते हैं। धतकीडीह ने हाल ही में इंटर सेंटर बास्केटबॉल टूर्नामेंट जीता। सोनारी सेंटर में भी अच्छी सुविधाएं हैं। फाउंडेशन 4500 ग्राम पंचायतों में 15 लाख लोगों तक पहुंचता है।

राष्ट्रीय खेल दिवस पर उनके वीडियो में ग्रामीण युवाओं की कहानियां दिखाई गईं, जैसे अशीष पुरती की। खेल टीमवर्क, अनुशासन सिखाते हैं। फाउंडेशन ऐसी पहलों से सामुदायिक विकास करता है। जमशेदपुर में बास्केटबॉल को बढ़ावा देकर वे युवाओं के सपनों को हकीकत बना रहे हैं।

फ्लडलाइट्स से टूर्नामेंट्स का भविष्य

अब धतकीडीह कोर्ट जिला-राज्य प्रतियोगिताओं के लिए तैयार है। पहले रात के मैच असंभव थे, अब देर तक खेल हो सकते हैं। इससे खिलाड़ी ज्यादा अनुभव पाएंगे। TATA स्टील फाउंडेशन की यह निवेश लंबे समय तक फल देगी। स्थानीय प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेंगी।

ऐसी सुविधाएं ग्रामीण इलाकों में भी फैलानी चाहिए। फाउंडेशन का मॉडल दोहराया जा सकता है। युवा स्वस्थ रहेंगे, और खेल संस्कृति मजबूत होगी।

खेलों में CSR की भूमिका

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) से कंपनियां समाज को लौटाती हैं। TATA स्टील फाउंडेशन इसका बेहतरीन उदाहरण है। वे झारखंड-ओडिशा में बड़े पैमाने पर काम करते हैं। खेलों पर फोकस से युवा ड्रग्स, बेरोजगारी से दूर रहते हैं। यह निवेश भविष्य की पीढ़ी बनाता है।

TATA स्टील फाउंडेशन ने धतकीडीह कम्युनिटी सेंटर में फ्लडलाइट्स लगाकर युवाओं के सपनों को नई उम्मीद दी है। यह पहल जमीनी खेलों को मजबूत करेगी, प्रतिभाओं को निखारेगी। ऐसी कोशिशें बढ़ें, तो भारत खेलों में आगे बढ़ेगा। TATA स्टील फाउंडेशन धतकीडीह फ्लडलाइट्स जैसी पहलें भविष्य की नींव हैं।

TATA स्टील फाउंडेशन ने धतकीडीह कम्युनिटी सेंटर में फ्लडलाइट्स लगाकर न सिर्फ एक खेल कोर्ट को रोशन किया है, बल्कि युवाओं के सपनों को भी नई उम्मीद की किरण दी है। यह पहल जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने का जीता-जागता उदाहरण है, जहां 82 बच्चे रोजाना अभ्यास कर रहे हैं और अब शाम के अंधेरे का डर खत्म हो गया है।

इससे प्रतिभाओं को निखारने का रास्ता साफ हो गया है। पहले सूर्यास्त के बाद अभ्यास रुक जाता था, जिससे छात्रों का जुनून ठंडा पड़ जाता। लेकिन अब 24 फ्लडलाइट्स से जगमगाता मैदान सुरक्षा और उत्साह का प्रतीक बन गया है। झारखंड बास्केटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष हरभजन सिंह की तरह सभी मानते हैं कि यह पेशेवर वातावरण जिला-राज्य टूर्नामेंट्स को आमंत्रित करेगा। खिलाड़ी स्नेहा कुमारी और उदय नायर की खुशी देखिए—पढ़ाई के साथ खेल का संतुलन अब आसान है, आत्मविश्वास बढ़ा है।

TATA स्टील फाउंडेशन धतकीडीह फ्लडलाइट्स जैसी पहलें भविष्य की नींव हैं। ऐसी कोशिशें बढ़ेंगी तो भारत खेलों में विश्व पटल पर चमकेगा। सोनारी जैसे अन्य केंद्रों की तरह यहां से निकलेंगे राष्ट्रीय चैंपियन। CSR के जरिए सामुदायिक विकास को बढ़ावा देकर फाउंडेशन युवाओं को स्वस्थ, अनुशासित भविष्य दे रहा है। जमीनी खेलों का यही तो असली मंत्र है—सपनों को रोशनी देकर उड़ान भरना। यह कदम न सिर्फ जमशेदपुर, बल्कि पूरे झारखंड के लिए प्रेरणा बनेगा।

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