- पूर्व सैनिक सेवा परिषद पूर्वी सिंहभूम के कोषाध्यक्ष मिथिलेश सिंह के बेटे हर्ष ने एयर फोर्स में ऑफिसर ट्रेनिंग पूरी की, वहीं केरला पब्लिक गम्हरिया के ही पुष्पेंद्र कुमार सिंह ने एनडीए के बाद थल सेना ज्वाइन की।
जमशेदपुर : पूर्व सैनिक सेवा परिषद पूर्वी सिंहभूम के कोषाध्यक्ष मिथिलेश सिंह के पुत्र हर्ष ने एयर फोर्स में ऑफिसर के रूप में ट्रेनिंग पूरी कर लखनऊ पोस्टिंग जॉइन की। इसी स्कूल के उनके सहपाठी पुष्पेंद्र कुमार सिंह ने एनडीए के बाद थल सेना ज्वाइन की। संगठन और स्कूल के लिए यह गर्व का क्षण है और युवाओं के लिए प्रेरणा।
पूर्व सैनिक सेवा परिषद पूर्वी सिंहभूम के लिए गर्व का दिन रहा, जब संगठन के कोषाध्यक्ष और नौसेना 1993 बैच के पूर्व सैनिक मिथिलेश सिंह के बेटे हर्ष एयर फोर्स ऑफिसर बनकर घर लौटे। हर्ष ने भारतीय वायु सेना में ऑफिसर के रूप में अपना प्रशिक्षण पूरा किया और अब वे अपनी पहली पोस्टिंग के लिए लखनऊ रवाना हो गए हैं।
हर्ष के घर लौटने की खबर मिलते ही संगठन और परिवार के सदस्यों ने मिलकर उनका सम्मान किया। भारत भारती के प्रदेश सचिव सुशील कुमार सिंह, पूर्व सैनिक सेवा परिषद पूर्वी सिंहभूम के जिला सचिव दिनेश सिंह, नौसेना 1993 बैच के शिव विचार सिंह, मनोज ठाकुर के साथ रीना सिंह, बबली और आकांक्षा सिंह ने हर्ष को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और मुँह मीठा कराया।

संगठन के सदस्यों ने कहा कि सेना में ऑफिसर बनना आसान नहीं होता, लेकिन हर्ष ने कड़ी मेहनत और अनुशासन से यह उपलब्धि हासिल की है। यह हर सदस्य के लिए गर्व का क्षण है और शहर के युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश है कि लगन से तैयारी करने पर हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।
इसी बीच केरला पब्लिक गम्हरिया स्कूल के लिए एक और गर्व की बात सामने आई। हर्ष की ही क्लास के छात्र पुष्पेंद्र कुमार सिंह ने थल सेना ज्वाइन की है। उन्होंने एनडीए की कठिन ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी की और पहले अहमदनगर में ट्रेनिंग के बाद अब आगे की सेवा के लिए सूरतगढ़ के लिए प्रस्थान किया।
पूर्व सैनिक सेवा परिषद और जुड़े संगठनों का कहना है कि उनका लगातार प्रयास रहता है कि शहर के हर स्कूल में जाकर बच्चों का करियर काउंसलिंग किया जाए।
तीनों सेनाओं – थल, जल और वायु – तथा उनकी अलग‑अलग ब्रांचों के बारे में सही जानकारी देकर बच्चों को डिफेंस सर्विसेज में जाने के लिए प्रेरित किया जाता है। संगठन मानता है कि हर्ष और पुष्पेंद्र जैसे उदाहरणों से ज्यादा से ज्यादा छात्र सेना में जाने का सपना देखेंगे और देशसेवा का रास्ता चुनेंगे।
हर्ष का एयर फोर्स ऑफिसर बनना और पुष्पेंद्र का थल सेना ज्वाइन करना, दोनों ही उपलब्धियां पूर्व सैनिकों के मार्गदर्शन, स्कूल के माहौल और स्वयं छात्रों की मेहनत का मिला‑जुला परिणाम हैं। ऐसी सफलताएं न केवल परिवार और संगठन का मान बढ़ाती हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं को डिफेंस सेक्टर में करियर बनाने के लिए प्रेरित करती हैं।













