गिरिडीह: जमुआ-देवघर मुख्य मार्ग स्थित उसरी नदी तट पर खरगडीही में स्थित लंगटा बाबा के 116 वीं समाधि लेने की वर्षगांठ पर चादरपोशी व पूजा अर्चना करने के लिए बाबा के भक्तों की भीड़ उमड़ी. लगंटा बाबा का समाधि स्थल सर्वधर्म सद्भाव की मिसाल है. इस समाधि स्थल पर सभी समुदाय के लोगों की आस्था है.
पौष पूर्णिमा के दिन यहां बाबा की समाधि पर चादर चढ़ाने की परंपरा है. हिंदू, मुस्लिम के साथ विभिन्न धर्म में आस्था रखने वाले लोग इस समाधिस्थल पर पहुंचे और माथा टेका. इस दौरान लोगों ने चादर भी चढ़ाकर मन्नत मांगी. शनिवार की सुबह 3:15 बजे नियमानुसार जमुआ के थाना प्रभारी ने सबसे पहले चादरपोशी की. इसके बाद भक्त कतार में लगकर चादर चढ़ाने लगे.
क्या है बाबा की मान्यता
बताया जाता है कि ब्रिटिश राज के समय साधु-संत के साथ देवघर जा रहे लंगटा (लंगेश्वरी) बाबा खरगडीहा स्थित थाना में रुके थे. उस वक्त के थाना प्रभारी ने बाबा को जाने को कहा इस पर बाबा ने कहा कि तू ही चला जायेगा. इस कथन के बाद खरगडीहा से हटकर थाना जमुआ आ गया.
वर्ष 1910 में पौष पूर्णिमा के दिन बाबा ब्रह्मलीन हो गये. इसके बाद यहां बाबा का समाधि स्थल बनाया गया. बताया जाता है कि मानव के अलावा पशु, पक्षी से भी बाबा को काफी लगाव था. इनके पास आने वाले लोगों का दुख भी दूर हो जाता था. यही कारण है कि विभिन्न धर्म के लोगों की बाबा के प्रति गहरी आस्था है.
सुरक्षा का था पुख्ता इंतजाम
लंगटा बाबा के प्रति लोगों की गहरी आस्था है. यहां कई प्रदेश के लोग पौष पूर्णिमा पर पहुंचते हैं. इस बार भी विभिन्न प्रदेश के लोग यहां पहुंचे. भीड़ को देखते हुए यहां सुरक्षा का भी पुख्ता इंतजाम किया गया है. खोरीमहुआ के एसडीएम अनिमेष रंजन, एसडीपीओ राजेंद्र कुमार के नेतृत्व में बीडीओ, सीओ व कई थाना के प्रभारी सदल-बल मौजूद थे.













