🌞 कोडईकनाल सौर वेधशाला की 125वीं वर्षगांठ पर डाकविभाग ने जारी किया स्मारक टिकट
- भारत की सौर वैज्ञानिक विरासत को मिला सम्मान, विज्ञान प्रेमियों में हर्ष
नई दिल्ली/बेंगलुरु: भारतीय डाकविभाग ने कोडईकनाल सौर वेधशाला (Kodaikanal Solar Observatory – KSO) की स्थापना की 125वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया है। यह ऐतिहासिक पहल देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों को सम्मानित करने की दिशा में एक अहम कदम है, जो भारत के सौर अनुसंधान की समृद्ध विरासत को वैश्विक मंच पर रेखांकित करता है।
🏛️ विमोचन समारोह में शामिल हुए प्रतिष्ठित वैज्ञानिक
इस स्मारक डाकटिकट का विमोचन बेंगलुरु स्थित भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) में आयोजित समारोह में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्नाटक सर्कल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल श्री एस. राजेंद्र कुमार ने की। समारोह में ISRO के पूर्व अध्यक्ष एवं IIA के गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन श्री ए.एस. किरण कुमार सहित अन्य गणमान्य वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे।

Read More : भीषण सड़क हादसा: एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत
🌄 कोडईकनाल सौर वेधशाला: भारत की वैज्ञानिक धरोहर
तमिलनाडु के पलानी हिल्स में स्थित यह वेधशाला 1 अप्रैल 1899 को स्थापित की गई थी और तब से यह भारत में सौर अनुसंधान का अग्रणी केंद्र बनी हुई है। यह न केवल देश की सबसे पुरानी खगोलीय वेधशाला है, बल्कि सूर्य के बारे में लगातार सबसे लंबे समय तक दर्ज किए गए दैनिक रिकॉर्ड में से एक का भी हिस्सा है।
🔭 125 वर्षों का अद्वितीय योगदान
KSO के वैज्ञानिकों ने सनस्पॉट (सौर धब्बे), सौर ज्वालाएं, सौर प्रमुखताएं और सौर प्रभामंडल पर गहन अध्ययन किए हैं। इनके कार्यों ने सौर गतिविधियों और पृथ्वी पर उनके प्रभाव की समझ को नए आयाम दिए हैं।
✉️ टिकट खरीदने की सुविधा और आमंत्रण
यह स्मारक टिकट अब देशभर के फिलैटेलिक ब्यूरो में उपलब्ध है और इसे ऑनलाइन www.epostoffice.gov.in के माध्यम से भी खरीदा जा सकता है। डाकविभाग ने सभी नागरिकों, विज्ञान प्रेमियों और डाक टिकट संग्रहकर्ताओं से इस विशेष डाक टिकट को प्राप्त कर सौर विज्ञान के 125 वर्षों की उत्कृष्टता को सम्मानित करने की अपील की है।
🌟 विशेष बातें:
- कोडईकनाल सौर वेधशाला को समर्पित डाक टिकट
- ISRO और IIA के वैज्ञानिकों की उपस्थिति में विमोचन
- 125 वर्षों से सौर अनुसंधान में अग्रणी भूमिका
- अब ऑनलाइन और डाक केंद्रों पर टिकट उपलब्ध
🔚 निष्कर्ष:
यह स्मारक डाक टिकट भारतीय विज्ञान की उस चमकती धरोहर को सलाम है, जिसने न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सौर भौतिकी के क्षेत्र में भारत की पहचान को मजबूत किया है।















