
- Ex Muslim यूट्यूबर सलीम वास्तिक की बढ़ी मुश्किलें, रिपोर्ट्स की मानें तो वह निकला हत्यारा।
Kidnapping-Murder Case : दिल्ली-एनसीआर से एक बेहद सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। “एक्स-मुस्लिम यूट्यूबर” के नाम से चर्चित Salim Vastik दरअसल 1995 के किडनैपिंग और मर्डर केस में उम्रकैद की सजा पाया हुआ वही आरोपी निकला, जो जमानत पर छूटने के बाद 26 साल से फरार चल रहा था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे गाजियाबाद के लोनी इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।

1995: अपहरण के बाद हत्या, देश को हिला देने वाला मामला
20 जनवरी 1995 को दिल्ली के गोकलपुरी इलाके से 13 वर्षीय छात्र Sandeep Bansal स्कूल जाते समय लापता हो गया था। जांच में सामने आया कि उस समय रामजस स्कूल, दरियागंज में मार्शल आर्ट ट्रेनर रहे सलीम खान ने बच्चे का अपहरण किया। परिवार से 30,000 रुपये की फिरौती मांगी गई, लेकिन रकम मिलने से पहले ही बच्चे की हत्या कर दी गई और शव नाले में फेंक दिया गया। इस निर्मम घटना ने उस समय दिल्ली में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था।
1997 में उम्रकैद, 2000 में जमानत और फरारी
मामले की सुनवाई के बाद 1997 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई। लेकिन 2000 में हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद सलीम जेल से बाहर आया और फिर फरार हो गया। इसके बाद करीब 26 साल तक वह पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।
Kidnapping-Murder Case: पहचान मिटाने की चाल, खुद को “मृत” दिखाया
फरारी के दौरान आरोपी ने सिस्टम को चकमा देने के लिए खुद को कागज़ों में “मृत” घोषित करवा दिया। इसके बाद उसने अपना नाम बदलकर “सलीम अहमद” रख लिया और हरियाणा के करनाल, अंबाला सहित कई जगहों पर ठिकाना बदलता रहा। यह रणनीति उसे वर्षों तक पुलिस की नजरों से बचाए रखने में कारगर रही।
लोनी में नई जिंदगी: दुकानदार से “यूट्यूबर” तक
आखिरकार वह गाजियाबाद के लोनी में बस गया, जहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली और सामान्य कारोबारी की तरह जीवन जीने लगा। धीरे-धीरे उसने सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाई और खुद को “एक्स-मुस्लिम एक्टिविस्ट” के रूप में पेश करने लगा। उसका यूट्यूब चैनल हजारों सब्सक्राइबर के साथ धर्म, समाज और राजनीति पर वीडियो के लिए चर्चा में रहने लगा।
सोशल मीडिया पहचान और बढ़ती लोकप्रियता
रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके यूट्यूब चैनल पर 28 हजार से अधिक सब्सक्राइबर और 170+ वीडियो थे। वह कई ऑनलाइन डिबेट और टीवी चर्चाओं में भी हिस्सा लेने लगा, जिससे उसकी नई पहचान और मजबूत हो गई। किसी को अंदाजा नहीं था कि वह एक पुराने हत्या मामले का दोषी है।
2026: जानलेवा हमला और शक की शुरुआत
27 फरवरी 2026 को लोनी में उसके घर/ऑफिस में घुसकर दो हमलावरों ने उस पर चाकू से हमला किया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद जब उसका मेडिकल और रिकॉर्ड खंगाला गया, तो पुलिस को शक हुआ कि उसकी असली पहचान कुछ और है।
फिंगरप्रिंट से खुला राज
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एआरएससी टीम ने पुराने केस रिकॉर्ड और फिंगरप्रिंट से मिलान किया। जांच में पुष्टि हुई कि “सलीम वास्तिक” असल में वही फरार आरोपी सलीम खान है, जो 1995 के केस में उम्रकैद पा चुका था।
गिरफ्तारी: 26 साल की फरारी का अंत
सत्यापन के बाद पुलिस ने लोनी से उसे गिरफ्तार कर लिया और आगे की कार्रवाई के लिए जेल भेज दिया। करीब 26 साल तक पहचान बदलकर, खुद को “मृत” दिखाकर और नई छवि बनाकर कानून से बचता रहा आरोपी आखिरकार तकनीकी साक्ष्यों के सामने नहीं टिक सका।
बड़ा सवाल ?
यह मामला कई अहम सवाल खड़े करता है—
- क्या जमानत के बाद निगरानी व्यवस्था में खामियां थीं?
- क्या पहचान बदलना इतना आसान है?
- और क्या सोशल मीडिया पहचान के पीछे छिपे अतीत की जांच जरूरी है?
यह घटना दिखाती है कि अपराध चाहे कितना पुराना क्यों न हो, तकनीक और जांच की गहराई आखिरकार सच को सामने ले ही आती है।











































