
पूर्वी सिंहभूम: Tata स्टील फाउंडेशन और स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने जलग्रहण विकास और जलवायु अनुकूलन परियोजना का विस्तार किया है। यह तीन साल की योजना दिसंबर 2028 तक चलेगी, जो झारखंड के पूर्वी सिंहभूम और ओडिशा के क्योंझर जिले में 12,500 लोगों को लाभ पहुंचाएगी। Tata स्टील फाउंडेशन और स्टैंडर्ड चार्टर्ड का यह सहयोग जल संकट से जूझते ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान है। जलग्रहण विकास से 37.74 मिलियन क्यूबिक फीट जल भंडारण और 1,545 एकड़ नई सिंचाई भूमि बनेगी। आइए, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को विस्तार से समझें।

परियोजना का उद्देश्य और महत्व
Tata स्टील फाउंडेशन और स्टैंडर्ड चार्टर्ड की यह परियोजना जलग्रहण विकास पर केंद्रित है। ये क्षेत्र वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर हैं, जहां जल संकट और जलवायु परिवर्तन आजीविका को प्रभावित कर रहे हैं। परियोजना क्षतिग्रस्त संसाधनों का पुनर्स्थापन करेगी, सामुदायिक लचीलापन बढ़ाएगी।
प्रमुख लक्ष्य
- जल सुरक्षा: बांध, ट्रेंच, सिंचाई विकास।
- मिट्टी सुधार: भूजल पुनर्भरण, खेत मेड़।
- आजीविका सशक्तिकरण: आदिवासी समुदायों को लाभ।
- जलवायु अनुकूलन: मौसम जोखिमों से सुरक्षा।
यह साझेदारी 2024 से चल रही है। अब तक 15 गांवों में 7,500 लोगों को फायदा, 50+ संरचनाएं बनीं। जलग्रहण विकास ने 14.8 मिलियन क्यूबिक फीट जल संरक्षित किया।
कार्यान्वयन क्षेत्र और प्रभाव
झारखंड का पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर के पास) और ओडिशा का क्योंझर आदिवासी बहुल हैं। यहां सूखा, बाढ़ आम समस्या। टाटा स्टील फाउंडेशन की परियोजना से:
अपेक्षित परिणाम
- 12,500 लाभार्थी: ग्रामीण परिवार।
- 37.74 मिलियन क्यूबिक फीट: नया जल भंडारण।
- 1,545 एकड़: अतिरिक्त सिंचाई।
- कृषि उत्पादकता: वृद्धि, आय में सुधार।
मुख्य कार्य: चेक डैम, कंटूर ट्रेंच, फार्म पॉन्ड, गली प्लग। ये भूजल बढ़ाएंगे, मिट्टी कटाव रोकेंगे। जलग्रहण विकास से सतत कृषि संभव।
अब तक की उपलब्धियां
2024 से Tata स्टील फाउंडेशन और स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने मिलकर कमाल किया। 7,500 लोगों को लाभ, 300 एकड़ सिंचाई। 50 संरचनाओं से जल संरक्षण। यह आधार पर नई परियोजना खड़ी होगी।
पिछले प्रभाव
- 15 गांव: झारखंड-ओडिशा।
- 14.8 मिलियन क्यूबिक फीट: जल क्षमता।
- सामुदायिक समितियां: स्थानीय सुशासन।
- आजीविका: कृषि, मत्स्य पालन।
जलवायु अनुकूलन ने समुदायों को सशक्त बनाया।
नेताओं के विचार और प्रतिबद्धता
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की करुणा भाटिया ने कहा, “जलग्रहण विकास से सतत कृषि और पारिस्थितिकी स्थिरता आएगी।” Tata स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव रॉय बोले, “संवेदनशील समुदायों के लिए जलवायु कार्रवाई जरूरी।”
विशेषताएं
- समुदाय नेतृत्व: स्थानीय भागीदारी।
- नवाचार: डेटा-आधारित प्रबंधन।
- सतत विकास: SDGs से जुड़ा।
- दीर्घकालिक: 2028 तक प्रभाव।
दोनों संस्थाएं जिम्मेदार विकास में अग्रणी।
Tata स्टील फाउंडेशन का जल संरक्षण में योगदान
Tata स्टील फाउंडेशन झारखंड-ओडिशा में 1.5 मिलियन लोगों को लाभ पहुंचाता है। जल, शिक्षा, स्वास्थ्य पर फोकस। पहले प्रोजेक्ट्स में 162 मिलियन क्यूबिक फीट जल संरक्षित। जलग्रहण विकास उनकी रणनीति का हिस्सा।
अन्य पहलें
- ड्रिंकिंग वाटर: वेल, ट्यूबवेल।
- इंटीग्रेटेड फार्मिंग: फल, सब्जी।
- वाटरशेड: NABARD, HDFC के साथ।
यह साझेदारी मॉडल बनेगी।
ग्रामीण भारत के लिए सबक
भारत में 60% कृषि वर्षा पर निर्भर। जल संकट से 40% उपज प्रभावित। जलग्रहण विकास जैसे प्रोजेक्ट्स जरूरी। सरकार की जल जीवन मिशन से तालमेल।
सुझाव
- जागरूकता: किसानों को ट्रेनिंग।
- सरकारी सहयोग: सब्सिडी, फंडिंग।
- मॉनिटरिंग: डिजिटल ट्रैकिंग।
- महिला भागीदारी: आजीविका में।
Tata स्टील फाउंडेशन आदर्श प्रस्तुत कर रहा।
Tata स्टील फाउंडेशन और स्टैंडर्ड चार्टर्ड का जलग्रहण विकास सहयोग ग्रामीण भारत के लिए मील का पत्थर है। जलवायु अनुकूलन से किसानों का भविष्य सुरक्षित होगा। 12,500 परिवारों को नई उम्मीद। ऐसी साझेदारियां बढ़ें, जल संकट हल हो















