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Tata स्टील के जोड़ा क्लस्टर स्थित आयरन एवं मैंगनीज माइंस को 14 पुरस्कारों से किया गया सम्मानित 

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On: March 29, 2026 11:57 PM
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ओडिशा के जोड़ा क्लस्टर में Tata स्टील की आयरन और मैंगनीज माइंस ने खान पर्यावरण और खनिज संरक्षण के क्षेत्र में देश‑भर में चर्चा बटोरी है। 27वें खान पर्यावरण एवं खनिज संरक्षण (MEMC) सप्ताह 2025–26 के दौरान भारतीय खान ब्यूरो (IBM) के तत्वावधान में भुवनेश्वर में आयोजित पुरस्कार समारोह में इस क्लस्टर की खदानों को कुल 14 पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न सिर्फ़ टाटा स्टील की सतत खनन नीतियों को दर्शाती है, बल्कि देश में खनन उद्योग के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बनती है।

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Tata स्टील का खान पर्यावरण एवं खनिज संरक्षण सप्ताह से जुड़ा सम्मान

खान पर्यावरण एवं खनिज संरक्षण सप्ताह (MEMC Week) भारतीय खान ब्यूरो (IBM) के तत्वावधान में हर वर्ष मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य खनन क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, खनिजों के दक्ष उपयोग और सतत विकास की प्राथमिकता को बढ़ावा देना है।
27वें MEMC सप्ताह 2025–26 के दौरान भुवनेश्वर में आयोजित पुरस्कार समारोह में सरकारी और निजी खनन संस्थानों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाता है। इसी कड़ी में Tata स्टील की जोड़ा क्लस्टर की आयरन एवं मैंगनीज माइंस को 14 अलग‑अलग पुरस्कार मिले, जो उनकी पर्यावरण‑अनुकूल खनन प्रथाओं की मज़बूत गवाही है।

Tata स्टील ने जोड़ा ईस्ट आयरन माइन की उपलब्धियाँ

Tata स्टील के जोड़ा क्लस्टर की जोड़ा ईस्ट आयरन माइन समारोह में श्रेणी‑ए के तहत सबसे ज़्यादा चर्चित रही। इस खदान को “मिनरल बेनिफिशिएशन, रिक्लेमेशन एंड रिहैबिलिटेशन” के लिए दो अलग‑अलग द्वितीय पुरस्कार मिले। मिनरल बेनिफिशिएशन से तात्पर्य खनिजों की गुणवत्ता को बढ़ाने और अपव्यय को कम करने से है, जबकि रिक्लेमेशन एंड रिहैबिलिटेशन भूमि की पुनर्स्थापना और वनीकरण से जुड़ा होता है।

इसके अलावा, उसी श्रेणी में “समग्र प्रदर्शन” के तहत इस माइन को भी द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह इस बात को दर्शाता है कि जोड़ा ईस्ट न सिर्फ़ वैज्ञानिक तरीके से खनन और उपचार कर रही है, बल्कि आसपास के पर्यावरण को भी न्यूनतम नुकसान पहुँचाने का ध्यान रख रही है।

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खोंदबोंद आयरन एवं मैंगनीज माइन का योगदान

जोड़ा क्लस्टर में खोंदबोंद आयरन एवं मैंगनीज माइन भी खास तौर पर उभरी। इस माइन को श्रेणी‑ए के अंतर्गत “मिनरल बेनिफिशिएशन” और “रिक्लेमेशन एंड रिहैबिलिटेशन” दोनों क्षेत्रों में अलग‑अलग तृतीय पुरस्कारों से नवाज़ा गया।

खनिजों की गुणवत्ता में सुधार के साथ‑साथ यहाँ भूमि की पुनर्स्थापना, वनीकरण और जल संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। इससे न केवल माइन की दीर्घ‑काल उपयोगिता बढ़ती है, बल्कि आसपास के ग्रामीण और जैव‑विविधता को भी सुरक्षा मिलती है।

काटामाटी आयरन माइन की प्रथम श्रेणी की सफलता

काटामाटी आयरन माइन भी इस समारोह में खास चमक बिखेरते हुए नज़र आई। इसे “सिस्टेमेटिक साइंटिफिक डेवलपमेंट” के लिए प्रथम पुरस्कार और “खनिज संरक्षण” के लिए तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सिस्टेमेटिक साइंटिफिक डेवलपमेंट का अर्थ है कि खनन की सारी प्रक्रियाएँ वैज्ञानिक तरीके से नियोजित, नियंत्रित और निरंतर सुधारे जा रहे हैं। खनिज संरक्षण के लिए मिला पुरस्कार यह सुनिश्चित करता है कि कच्चे लौह अयस्क की हानि कम‑से‑कम हो और अधिकतम उपयोग हो सके, जिससे दीर्घकाल में देश की खनिज सुरक्षा भी बनी रहे।

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नीलाचल, जोड़ा वेस्ट और अन्य खदानों की उपलब्धियाँ

श्रेणी‑बी के तहत नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (NINL) की नीलाचल माइन को “रिक्लेमेशन एंड रिहैबिलिटेशन” के क्षेत्र में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह दर्शाता है कि सरकारी‑निजी भागीदारी वाले उपक्रम भी पर्यावरण‑अनुकूल खनन में बराबरी की भूमिका निभा रहे हैं।

जोड़ा वेस्ट आयरन एवं मैंगनीज माइन को “वनीकरण” और “सिस्टेमेटिक साइंटिफिक डेवलपमेंट” में दोनों ही क्षेत्रों में प्रथम पुरस्कार मिले। साथ ही, इस माइन को “समग्र प्रदर्शन” के लिए भी प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो इसकी व्यापक रूप से संतुलित और ज़िम्मेदार खनन‑नीति की झलक देता है।

बामेबारी आयरन एवं मैंगनीज माइन ने “पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन” में प्रथम पुरस्कार और “सतत विकास” में तृतीय पुरस्कार जीते, जबकि तिरिंगपहाड़ आयरन एवं मैंगनीज माइन को वनीकरण के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। ये सभी पुरस्कार टाटा स्टील की खानों की पर्यावरणीय संवेदनशीलता और दीर्घकालिक योजनाबद्ध खनन‑प्रबंधन की तस्वीर खींचते हैं।

Tata स्टील पुरस्कार वितरण समारोह और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कंट्रोलर जनरल ऑफ माइंस, IBM के पंकज कुलश्रेष्ठ ने विभिन्न खदानों के अधिकारियों को पुरस्कार प्रदान किए।
इसके साथ ही जी. काले (Chief Controller of Mines, IBM), पुखराज नेनीवाल (Controller of Mines, East Zone), राजेश कुमार (Chief, Joda, Tata Steel), G. V. Satyanarayan (Chief, Khondbond Mine), शंभु नाथ झा (Chief, Manganese Mines) और राहुल किशोर (Chief, Neelachal Mine) जैसे विशेषज्ञ इस आयोजन में उपस्थित रहे।

जोड़ा वेस्ट आयरन एवं मैंगनीज माइन ने “वनीकरण” और “सिस्टेमेटिक साइंटिफिक डेवलपमेंट” दोनों क्षेत्रों में प्रथम पुरस्कार जीते। इसके अलावा, इस माइन को “समग्र प्रदर्शन” के लिए भी प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो इसकी व्यापक रूप से संतुलित और योजनाबद्ध खनन‑नीति की गवाही देता है।

बामेबारी आयरन एवं मैंगनीज माइन को “पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन” में प्रथम पुरस्कार और “सतत विकास” में तृतीय पुरस्कार मिले। वहीं तिरिंगपहाड़ आयरन एवं मैंगनीज माइन को वनीकरण क्षेत्र में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। ये सभी

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