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Srinath विश्वविद्यालय में शिष्टाचार और व्यावसायिक संप्रेषण पर लेक्चर का आयोजन

On: March 27, 2026 11:30 PM
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Srinath विश्वविद्यालय जमशेदपुर आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे कार्यक्रम की जो न सिर्फ छात्रों के लिए बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने करियर और व्यक्तिगत जीवन में सफल होना चाहता है। Srinath विश्वविद्यालय, जमशेदपुर के अंग्रेजी विभाग ने हाल ही में शिष्टाचार और व्यावसायिक संप्रेषण पर लेक्चर का आयोजन किया। यह लेक्चर “शिष्टाचार और व्यावसायिक संप्रेषण का महत्व” विषय पर केंद्रित था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप यह ऑफलाइन कार्यक्रम विभिन्न विभागों के छात्रों और शिक्षकों के बीच खूब उत्साह लाया। मुख्य वक्ता बनारस हिंदू Srinath विश्वविद्यालय की प्रो. धृति रे दलई रहीं, जिन्होंने शिष्टाचार को जीवन का मूल मंत्र बताया। इस लेख में हम इस कार्यक्रम की पूरी जानकारी, शिष्टाचार के महत्व और व्यावसायिक संप्रेषण की बारीकियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। अगर आप भी अपने संप्रेषण कौशल को निखारना चाहते हैं, तो अंत तक पढ़ते रहिए!

Srinath कार्यक्रम का विवरण एक यादगार आयोजन

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Srinath विश्वविद्यालय में शिष्टाचार और व्यावसायिक संप्रेषण पर लेक्चर का आयोजन बेहद सफल रहा। यह कार्यक्रम Srinath विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें सैकड़ों छात्र और शिक्षक शामिल हुए। कुलपति प्रो. डॉ. एस. एन. सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने इसे और खास बना दिया। संचालन डॉ. रिया बसु ने किया, जो अंग्रेजी विभाग की सहायक प्राध्यापिका हैं। उन्होंने पूरे सत्र को इतनी सहजता से चलाया कि हर कोई बंधा रहा।

प्रो. धृति रे दलई ने अपने व्याख्यान में कहा कि शिष्टाचार सिर्फ शब्दों का खेल नहीं, बल्कि व्यवहार का आईना है। उन्होंने उदाहरण दिए कि कैसे डिजिटल युग में ईमेल, सोशल मीडिया पर भी विनम्रता जरूरी है। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जहां छात्रों ने डिजिटल शिष्टाचार, इंटरव्यू टिप्स जैसे सवाल पूछे। कुल मिलाकर, यह लेक्चर छात्रों को व्यावसायिक दुनिया के लिए तैयार करने वाला साबित हुआ।

शिष्टाचार का महत्व व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में

शिष्टाचार वह चीज है जो आपको भीड़ से अलग करती है। शिष्टाचार और व्यावसायिक संप्रेषण पर लेक्चर का आयोजन ने साबित कर दिया कि विनम्रता आज की जरूरत है। प्रो. दलई ने बताया कि शिष्टाचार सम्मान, संवेदनशीलता और विनम्रता पर टिका होता है। व्यक्तिगत जीवन में यह रिश्तों को मजबूत बनाता है। उदाहरण के लिए, परिवार में छोटी-छोटी बातों पर ‘धन्यवाद’ कहना विश्वास बढ़ाता है।

Srinath व्यावसायिक जीवन में शिष्टाचार और भी जरूरी है। कल्पना कीजिए, आप जॉब इंटरव्यू में हैं। अगर आप मुस्कुराते हुए ‘सर, आपका समय देने के लिए शुक्रिया’ कहेंगे, तो इम्प्रेशन गहरा पड़ेगा। प्रो. दलई ने जोर दिया कि कार्यस्थल पर शिष्टाचार टीम वर्क सुधारता है। एक सर्वे के अनुसार, 70% प्रमोशन शिष्टाचार वाले लोगों को मिलते हैं। डिजिटल संप्रेषण में भी, जैसे व्हाट्सएप पर ‘कृपया’ जोड़ना, गलतफहमियां रोकता है। Srinath विश्वविद्यालय का यह लेक्चर छात्रों को यही सिखा गया कि शिष्टाचार कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि सफलता का राज है।

Srinath विश्वविद्यालय में शिष्टाचार के प्रकार और उदाहरण

शिष्टाचार कई रूपों में आता है। पहला, मौखिक शिष्टाचार – जैसे ‘नमस्ते’ से बात शुरू करना। दूसरा, लिखित – ईमेल में विषय साफ रखना। तीसरा, डिजिटल – सोशल मीडिया पर नेगेटिव कमेंट न करना। लेक्चर में प्रो. दलई ने एक केस स्टडी शेयर की: एक कंपनी में रूड ईमेल से प्रोजेक्ट फेल हो गया, लेकिन शिष्टाचार से ठीक हो गया। छात्रों ने नोट किया कि भारत जैसे देश में सांस्कृतिक शिष्टाचार, जैसे बड़ों को प्रणाम, अभी भी प्रासंगिक है।

व्यावसायिक संप्रेषण आधुनिक दुनिया की कुंजी

शिष्टाचार और व्यावसायिक संप्रेषण पर लेक्चर का आयोजन ने संप्रेषण को नया आयाम दिया। व्यावसायिक संप्रेषण वह कला है जो विचारों को साफ, प्रभावी तरीके से पहुंचाती है। प्रो. दलई ने कहा कि 93% संप्रेषण नॉन-वर्बल होता है – बॉडी लैंग्वेज, आई कॉन्टैक्ट। आज डिजिटल युग में वीडियो कॉल पर मुस्कान जरूरी है।

कार्यस्थल पर प्रभावी संप्रेषण नेतृत्व बनाता है। उदाहरण लीजिए, मीटिंग में अपनी बात रखते हुए दूसरों को बोलने दें। लेक्चर में चर्चा हुई कि NEP छात्रों को ऐसे स्किल्स सिखाती है। श्रीनाथ विश्वविद्यालय ने इसे अपनाया। छात्रों ने सीखा कि संप्रेषण में 7C का नियम – Clear, Concise, Concrete, Correct, Coherent, Complete, Courteous। यह शिष्टाचार से जुड़ा है। डिजिटल टूल्स जैसे Zoom में बैकग्राउंड साफ रखना भी व्यावसायिक शिष्टाचार है।

Srinath डिजिटल युग में व्यावसायिक संप्रेषण की चुनौतियां

आज 80% संप्रेषण ऑनलाइन है। चुनौतियां हैं – टोन समझ न आना, इमोजी का गलत इस्तेमाल। प्रो. दलई ने सलाह दी: हमेशा पॉजिटिव लैंग्वेज यूज करें। लेक्चर में एक एक्टिविटी हुई जहां छात्रों ने रोल प्ले किया। इससे पता चला कि शिष्टाचार से कन्फ्यूजन कम होता है। जमशेदपुर जैसे शहर में इंडस्ट्रीज ज्यादा हैं, तो 이런 स्किल्स जॉब दिलाएंगे।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति और जीवन कौशल का समावेश

Srinath विश्वविद्यालय में शिष्टाचार और व्यावसायिक संप्रेषण पर लेक्चर का आयोजन NEP के अनुरूप था। NEP 2020 कहती है कि शिक्षा सिर्फ किताबी न हो, जीवन कौशल सिखाए। कुलपति प्रो. सिंह ने सराहा कि अंग्रेजी विभाग ने मूल्य-आधारित शिक्षा दी। शिष्टाचार और संप्रेषण सॉफ्ट स्किल्स हैं जो प्लेसमेंट में मदद करते हैं। Srinath विश्वविद्यालय ने ऐसे और कार्यक्रम प्लान किए हैं। छात्रों के लिए यह प्रेरणा बना।

छात्रों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम के बाद छात्रों ने कहा, “यह लेक्चर जीवन बदलने वाला था।” एक छात्रा ने बताया कि अब वो ईमेल शिष्टाचारी लिखेगी। शिक्षकों ने प्रो. दलाई की गहराई की तारीफ की। डॉ. रिया बसु ने संवाद को जीवंत बनाया। कुल मिलाकर, सभी ने शिष्टाचार और व्यावसायिक संप्रेषण पर लेक्चर का आयोजन को सफल बताया।

Srinath विश्वविद्यालय में शिष्टाचार और व्यावसायिक संप्रेषण पर लेक्चर का आयोजन एक मील का पत्थर साबित हुआ। प्रो. धृति रे दलाई के व्याख्यान ने सिखाया कि शिष्टाचार जीवन का मूल है। डिजिटल युग में विनम्रता से रिश्ते मजबूत होंगे, करियर चमकेगा। NEP के तहत ऐसे कार्यक्रम जरूरी हैं। अगर आप छात्र हैं, तो आज से शिष्टाचार अपनाएं। कुलपति प्रो. सिंह की तरह, मूल्यों को अपनाएं। यह लेक्चर साबित करता है कि शिक्षा बदलाव लाती है। आइए, हम सब मिलकर शिष्टाचारी समाज बनाएं!

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