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Trains की लेटलतीफी के खिलाफ आयोजित धरना में बोले सरयू राय यात्री ट्रेनें समय पर चलाएं वरना मालगाड़ी रोकेंगे

On: April 7, 2026 9:40 PM
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जमशेदपुर चक्रधरपुर: जमशेदपुर जैसे व्यस्त शहर में रोजाना हजारों लोग Trains पर निर्भर हैं, लेकिन Trains की लेटलतीफी ने सबकी जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। इसी मुद्दे पर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने टाटानगर स्टेशन पर धरना आयोजित किया, जहां उन्होंने साफ कहा कि अगर यात्री Trains समय पर नहीं चलीं तो मालगाड़ियां रोकनी पड़ेंगी।

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यह धरना न सिर्फ एक व्यक्ति की आवाज था, बल्कि पूरे समाज की पुकार था। सरयू राय ने 21 लोगों की समिति बनाने का ऐलान किया और दिल्ली जाकर रेल मंत्री से मिलने की बात कही। ट्रेनों की लेटलतीफी के खिलाफ सरयू राय का यह कदम यात्रियों के लिए उम्मीद की किरण है, क्योंकि यह समस्या चक्रधरपुर रेल मंडल में सालों से चली आ रही है।

Trains की लेटलतीफी एक लंबी जंग

Trains की लेटलतीफी कोई नई बात नहीं है, दोस्तों। सरयू राय ने धरने में कहा कि टाटानगर आने-जाने वाली सभी यात्री Trains रोज 4-5 घंटे लेट हो रही हैं और यह सिलसिला पिछले तीन-साढ़े तीन साल से चल रहा है। पहले सोचा था कि दो-चार दिनों में ठीक हो जाएगा, लेकिन ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता गया।

चक्रधरपुर रेल मंडल में मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने से यात्री Trains रुक जाती हैं। एक उदाहरण लीजिए – कदमा के एक व्यक्ति का परिवार ट्रेन में था, जो चार घंटे एक ही जगह खड़ी रही, जबकि 8 मालगाड़ियां निकल गईं। ऐसे में परिवार, बच्चे, बुजुर्ग सब परेशान। जनशताब्दी जैसी ट्रेनें 14 घंटे लेट, साउथ बिहार 5 घंटे – यह तो ट्रैक फेल हो गया है!

रेलवे के आश्वासन भी खोखले साबित हो रहे हैं। सांसद ने रेल मंत्री से बात की, डीआरएम से मिले, लेकिन 3-5 साल का समय मांगा। सरयू राय बोले, “क्या हम इतना इंतजार करेंगे?” यह सवाल हर यात्री का है।

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सरयू राय का धरना अब अकेले नहीं लड़ाई

धरना सरयू राय ने अकेले घोषित किया था, लेकिन दर्जन भर संगठनों ने समर्थन दिया। मारवाड़ी सम्मेलन, चेंबर ऑफ कॉमर्स, आजसू, विश्व हिंदू परिषद, आदिवासी हो समाज, मुंडा समाज जैसे संगठन साथ आए। यह आम आदमी का मुद्दा है, राजनीति नहीं।

उन्होंने कहा कि 20-21 लोगों की समिति बनेगी, जिसमें सभी तबके के लोग होंगे। सभी राजनीतिक दलों को पत्र भेजा गया। दिल्ली जाएंगे, रेल बोर्ड चेयरमैन और रेल मंत्री से मिलेंगे। पूछेंगे कि सांसद को क्या आश्वासन दिया और डीआरएम को रात में फोन क्यों नहीं करते?

धरना स्थल भी बदला गया – रेलवे ने रातोंरात कारपेट हटा दिए, बैनर फाड़ दिए। लेकिन जनता की आवाज दब नहीं सकती। संबोधन करने वालों में शिवशंकर सिंह, सुबोध श्रीवास्तव, हेमंत पाठक जैसे कई नाम थे।

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मालगाड़ी vs यात्री ट्रेन असली वजह क्या?

मुख्य समस्या मालगाड़ियों की प्राथमिकता है। सरयू राय ने डीआरएम से कहा, “यात्री Trains को रोककर मालगाड़ी आगे बढ़ाते हो।” व्यापारी बोले, माल दो-चार घंटे लेट हो तो फैक्ट्री को नुकसान कम, लेकिन यात्री को भारी दिक्कत। पैंट्रीकार न होने पर बियाबान में ट्रेन रुक जाए तो परिवार की क्या हालत?

चक्रधरपुर मंडल उपेक्षित है। अन्य मंडलों में काम हो चुका, यहां पिछड़ा। नई Trains कोविड में बंद पुरानी ट्रेनों को ही नया बता दिया। वंदे भारत छोड़कर पांच साल में कोई नई Trains नहीं। सीनियर डीसीएम का कागज पढ़कर हंसी आती है।

मजदूरों का नुकसान – चाकुलिया, बहड़ागोड़ा से मजदूर टाटा नहीं आ रहे, क्योंकि ड्यूटी मिस हो जाती है। समाज का कोई तबका अछूता नहीं।

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रेलवे प्रशासन का रवैया नीयत में खोट?

सरयू राय ने कहा, “यात्री Trains लेट हों तो नीयत में खोट है। कुछ अफसरों को अलग राजस्व मिलता है।” सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने माना Trains लेट हैं, प्रयास जारी हैं, पत्र भी दिया। लेकिन जागरूक लोग संतुष्ट नहीं। रेल बोर्ड के फरमान से ऊपर जनता की संवेदना होनी चाहिए।

डीआरएम तरुण हुरिया से बैठक हुई, नई लाइन बिछाने का प्लान है, लेकिन कितना समय लगेगा? धरना सफल बनाने में आशुतोष राय, नीरज सिंह जैसे कई कार्यकर्ताओं ने भूमिका निभाई।

Trains लेटलतीफी के व्यापक प्रभाव

यह समस्या सिर्फ जमशेदपुर तक सीमित नहीं। चक्रधरपुर मंडल में Trains 6 किमी/घंटा रफ्तार से चल रही हैं कभी। हावड़ा-मुंबई लाइन पर 130 किमी/घंटा की क्षमता, लेकिन 25 किमी औसत। यात्रियों ने Trains मैनेजर को बंधक बनाया भी।

मजदूर, व्यापारी, परिवार – सब प्रभावित। RTI का जवाब तक नहीं मिला। सरयू राय का धरना इस चुप्पी तोड़ने वाला है।

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भविष्य की योजना समिति और दिल्ली यात्रा

21 लोगों की समिति बनेगी, दायरा बढ़ेगा। दिल्ली जाकर रेल मंत्री से बात, आश्वासन लेंगे। अगर नहीं माने तो मालगाड़ी रोकेंगे। यह सामूहिक लड़ाई है।

रेलवे ने सीनियर डीसीएम के जरिए चुप्पी तोड़ी, लेकिन समाधान दूर। जनता जागेगी तो बदलाव आएगा।

 सरयू राय का धरना Trains की लेटलतीफी के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। यात्री Trains समय पर चलाएं वरना मालगाड़ी रोकेंगे यह चेतावनी रेलवे को झकझोर देगी। 21 लोगों की समिति और दिल्ली यात्रा से स्थायी समाधान निकलेगा। यह जनता का मुद्दा है, सबको साथ आना चाहिए। Trains की लेटलतीफी अब बर्दाश्त नहीं!

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