
नई दिल्ली: देश में बढ़ते डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के साथ-साथ साइबर ठगी के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम बैंक ग्राहकों को राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। RBI ने डिजिटल फ्रॉड के शिकार उपभोक्ताओं को मुआवजा देने संबंधी एक नया ड्राफ्ट गाइडलाइन जारी किया है, जिसके तहत पात्र ग्राहकों को ठगी गई राशि का 85 प्रतिशत या अधिकतम ₹25,000 तक का मुआवजा दिया जा सकेगा।

यह प्रस्ताव देश में डिजिटल भुगतान प्रणाली पर लोगों का भरोसा बढ़ाने और ऑनलाइन धोखाधड़ी से होने वाले वित्तीय नुकसान को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
क्या है नया प्रस्ताव?
RBI द्वारा जारी ड्राफ्ट गाइडलाइन के अनुसार, यदि कोई ग्राहक डिजिटल फ्रॉड का शिकार होता है और निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए समय पर शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे कुल नुकसान की राशि का 85 प्रतिशत या अधिकतम ₹25,000 तक का मुआवजा मिलेगा। दोनों में जो राशि कम होगी, वही भुगतान की जाएगी।
यह सुरक्षा उन मामलों में लागू होगी जहां डिजिटल फ्रॉड की राशि ₹50,000 तक हो।
मुआवजे की प्रमुख शर्तें
पात्रता के लिए जरूरी बातें
✅ फ्रॉड की शिकायत 5 दिनों के भीतर दर्ज करनी होगी।
✅ शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर 1930 या संबंधित बैंक में करनी होगी।
✅ मुआवजा योजना का लाभ जीवन में केवल एक बार मिलेगा।
✅ यह व्यवस्था प्रारंभिक रूप से एक वर्ष के लिए लागू रहेगी।
✅ बाद में इसकी समीक्षा कर नियमों में संशोधन किया जा सकता है।
कैसे मिलेगा मुआवजा?
RBI ने मुआवजे की लागत को साझा करने का प्रस्ताव भी रखा है।
भार का विभाजन
- RBI वहन करेगा: 65%
- ग्राहक के बैंक का योगदान: 10%
- लाभ प्राप्त करने वाले बैंक का योगदान: 10%
- शेष राशि अन्य निर्धारित तंत्र से वहन की जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली और नियामक संस्था के बीच जिम्मेदारी का संतुलित वितरण करना है।
OTP साझा करने पर भी राहत संभव
ड्राफ्ट गाइडलाइन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में ग्राहक द्वारा दबाव, धोखे या सामाजिक इंजीनियरिंग (Social Engineering) के तहत OTP या बैंकिंग विवरण साझा कर देने के मामलों में भी मुआवजा मिलने की संभावना रखी गई है।
हालांकि ऐसे मामलों में प्रत्येक शिकायत की अलग-अलग जांच की जाएगी और पात्रता का निर्धारण तथ्यों के आधार पर होगा।
डिजिटल भुगतान पर बढ़ेगा भरोसा
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य छोटे मूल्य वाले डिजिटल फ्रॉड मामलों में ग्राहकों को आंशिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। वर्तमान में कई मामलों में ग्राहकों को लंबी शिकायत प्रक्रिया और अनिश्चित परिणामों का सामना करना पड़ता है।
नई व्यवस्था से:
- शिकायत प्रक्रिया सरल होगी।
- उपभोक्ताओं को जल्दी राहत मिलेगी।
- डिजिटल भुगतान पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
- बैंकिंग प्रणाली में जवाबदेही मजबूत होगी।
1 जुलाई 2026 से लागू होने की तैयारी
RBI के प्रस्ताव के अनुसार यह गाइडलाइन 1 जुलाई 2026 से लागू की जा सकती है। फिलहाल यह ड्राफ्ट चरण में है और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं। सुझावों पर विचार के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।
बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के बीच बड़ा कदम
भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान बाजारों में से एक बन चुका है। UPI, मोबाइल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों में भी वृद्धि देखी गई है। ऐसे में RBI का यह प्रस्ताव लाखों डिजिटल उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।
मुख्य बातें:
उदाहरण से समझिये
यदि किसी व्यक्ति के खाते से ₹20,000 की ऑनलाइन ठगी होती है, तो उसे लगभग ₹17,000 (85%) तक मुआवजा मिल सकता है।
वहीं यदि ₹50,000 की ठगी होती है, तो 85 प्रतिशत राशि ₹42,500 बनती है, लेकिन अधिकतम सीमा ₹25,000 निर्धारित होने के कारण उसे केवल ₹25,000 तक का ही मुआवजा मिलेगा।
दो समस्या के उदाहरण:
| फ्रॉड राशि | मुआवजा | RBI का भाग | बैंक का भाग |
|---|---|---|---|
| ₹20,000 | ₹17,000 (85%) | ₹13,000 (65%) | ₹4,000 (20%) |
| ₹50,000 | ₹25,000 (कैप) | ₹19,118 (65%) | ₹5,882 (20%) |
डिजिटल युग में वित्तीय सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। RBI की नई मुआवजा योजना ऑनलाइन ठगी के शिकार लोगों को राहत देने के साथ-साथ बैंकिंग प्रणाली में विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो डिजिटल फ्रॉड से प्रभावित लाखों ग्राहकों को बड़ी राहत मिल सकती है।










