
Real Hero: आज हम एक कहानी के बारे में जानेंगे एक आदिवासी लड़की के अपने सपने को पूरा करने की कहानी, जी हां नाम – मालती मुर्मू, पता: गाँव — जिलिंङ सेरेंङ, आजोधिया बुरू, पुरूलिया, पश्चिम बंगाल।

एक योद्धा महिला जिसने अपने गाँव के बच्चों के लिए एक बड़ा सपना देखा और उसे पूरा करने का फैसला किया। 2020 से उन्होंने अपना खुद का होम स्कूल बनाया, जहाँ वे गाँव के 85 परिवारों के बच्चों को पढ़ाती हैं।
यह स्कूल गाँव में सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया है। आजोधिया के ‘पहाड़’ से लगभग 25 किलोमीटर दूर, बसा हुआ पुरुलिया जिले का सुदूर और पिछड़ा गाँव जिलिंग सेरेंग है, इसी गांव से मालती मुर्मू ने भविष्य की नींव रखी है, मालती का कार्य दर्शाता है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी शक्ति है जो समाज को जोड़ती है।

Real Hero: A school of hope from a mud house.
उनके इस प्रयास ने स्थानीय समुदाय में एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया है। मालती मुर्मू 60 से ज़्यादा बच्चों को मुफ़्त में शिक्षा दे रही हैं।
सरकारी स्कूल गांव से दूर होने के कारण ज्यादातर बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते थे। किताबों से दूर होते हुए बच्चों को देखकर मालती मुर्मू ने फैसला किया –
“अब मैं अपने घर में ही स्कूल चलाऊँगी और सभी बच्चों को मुफ़्त में पढ़ाऊँगी।”

बस यही से शुरुआत हुआ एक नया अध्याय का। शुरुआत में तो काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बच्चे भी कम आते थे लेकिन धीरे-धीरे पूरे गाँव के बच्चे मालती दीदी के पास पढ़ने आने लगे आज मालती मुर्मू की दृढ़ इच्छाशक्ति देख कर पूरी दुनिया उन्हें प्रणाम कर रहा है।
आज तमाम मुश्किलों को पार करते हुए मालती मुर्मू न सिर्फ़ अपने गाँव, बल्कि पूरे भारत का गौरव और प्रेरणा बन गई हैं। मालती मुर्मू से हमें यह सीख मिलता है कि बदलाव के लिए संसाधन नहीं, संकल्प चाहिए।
- सौरभ कुमार, जादूगोड़ा








































