मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश | विशेष रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से एक बेहद चिंताजनक और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां कुत्ते के काटने (Dog Bite) के लगभग चार महीने बाद एक 17 वर्षीय किशोर में रेबीज के गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे हैं। डॉक्टरों के अनुसार किशोर की हालत बेहद नाजुक है और जीवित बचने की संभावना बहुत कम बताई जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर लोगों को कुत्ते के काटने के बाद पूरे वैक्सीन कोर्स की अनिवार्यता की याद दिला दी है।
घटना कहां और कैसे हुई
यह मामला मिर्जापुर जिले के कछवा थाना क्षेत्र के जोगीपुरवा गांव का है। जानकारी के अनुसार गांव निवासी भाईलाल का 17 वर्षीय बेटा करन नवंबर 2025 में अपने ननिहाल हरौवा गांव गया हुआ था।
इसी दौरान उसे एक कुत्ते ने काट लिया। परिवार ने शुरुआती स्तर पर इलाज तो करवाया, लेकिन लापरवाही के कारण एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स नहीं कराया गया।
सूत्रों के अनुसार करन को डॉक्टरों ने कुल तीन इंजेक्शन लेने की सलाह दी थी, लेकिन परिवार केवल दो इंजेक्शन ही लगवा पाया। तीसरा इंजेक्शन नहीं लगने के कारण शरीर में मौजूद वायरस धीरे-धीरे सक्रिय हो गया।

चार महीने बाद दिखने लगे डरावने लक्षण
कुत्ते के काटने के लगभग चार महीने बाद करन की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
परिजनों के अनुसार किशोर के व्यवहार में कई असामान्य बदलाव दिखाई देने लगे हैं।
अब वह:
- कुत्ते की तरह भौंकने लगा है
- उसके चलने और बैठने का तरीका बदल गया है
- पानी देखकर डर महसूस करता है
- शरीर में ऐंठन और बेचैनी बढ़ गई है
इन लक्षणों के सामने आने के बाद परिवार तुरंत उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचा।
डॉक्टरों ने बताई गंभीर स्थिति
किशोर को इलाज के लिए मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में भर्ती कराया गया है। अस्पताल के डॉक्टर डॉ. सचिन किशोर ने बताया कि जब किसी व्यक्ति में रेबीज के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तो उसे बचाना बेहद कठिन हो जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार:
- रेबीज एक 100 प्रतिशत घातक बीमारी मानी जाती है
- लक्षण दिखाई देने के बाद इलाज की संभावना बहुत कम रह जाती है
- इस समय मरीज को केवल सहायक उपचार (supportive treatment) दिया जा सकता है
डॉ. सचिन किशोर ने कहा कि करन की हालत बेहद गंभीर है और डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं।
क्या है रेबीज और क्यों है इतना खतरनाक
रेबीज एक वायरल संक्रमण है जो आमतौर पर कुत्ते, बंदर, बिल्ली या अन्य संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। यह वायरस सीधे तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे दिमाग तक पहुंच जाता है।
रेबीज के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
- पानी से डर लगना (हाइड्रोफोबिया)
- तेज बेचैनी और घबराहट
- असामान्य व्यवहार
- गले में ऐंठन
- आवाज बदलना या भौंकने जैसी प्रतिक्रिया
यदि समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है।
डॉक्टरों की चेतावनी
इस घटना के बाद डॉक्टरों ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले, तो उसे हल्के में बिल्कुल नहीं लेना चाहिए।
डॉक्टरों के अनुसार:
- तुरंत घाव को साबुन और साफ पानी से कम से कम 10-15 मिनट तक धोना चाहिए
- जितनी जल्दी हो सके एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना चाहिए
- डॉक्टर द्वारा बताए गए पूरा वैक्सीन कोर्स पूरा करना बेहद जरूरी है
अगर वैक्सीन का कोर्स अधूरा रह जाता है, तो वायरस शरीर में सक्रिय हो सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों ने लोगों को निम्नलिखित सावधानियां अपनाने की सलाह दी है:
✔ कुत्ते के काटने पर तुरंत घाव को धोएं
✔ बिना देरी के नजदीकी अस्पताल में जाएं
✔ डॉक्टर द्वारा बताए गए सभी इंजेक्शन समय पर लगवाएं
✔ वैक्सीन का पूरा कोर्स पूरा करें
मिर्जापुर का यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। कुत्ते के काटने को अक्सर लोग मामूली घटना समझ लेते हैं, लेकिन समय पर सही इलाज न मिलने पर यह जानलेवा बीमारी बन सकती है।
डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि रेबीज से बचाव का एकमात्र तरीका समय पर पूरा टीकाकरण है। इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही जीवन के लिए खतरा बन सकती है।
Note : अगर किसी को रेबीज़ के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें; लापरवाही जान ले सकती है।












