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Karim सिटी कॉलेज में फ्रेम्स टू फिक्शन सत्यजीत राय पर शानदार कार्यक्रम

On: May 2, 2026 7:45 PM
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जमशेदपुर: Karim सिटी कॉलेज में साहित्य और सिनेमा का अनोखा संगम देखने को मिला। फ्रेम्स टू फिक्शन नामक इस कार्यक्रम में महान फिल्मकार और लेखक सत्यजीत राय को याद किया गया। अंग्रेजी विभाग की साहित्यिक संस्था KALA (KCC Arcadia for Literary Appreciation) के तहत आयोजित यह इवेंट सत्यजीत राय के जन्मदिवस पर हुआ। छात्र-छात्राओं ने स्किट, प्रेजेंटेशन, कहानी पाठ और फिल्म स्क्रीनिंग से भरा एक पूरा दिन समर्पित किया। प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज के उद्घाटन से शुरू होकर शाम 5 बजे समाप्त हुआ यह कार्यक्रम साहित्य प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय रहा। आइए, इसकी पूरी कहानी विस्तार से जानें।

कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन और प्राचार्य का संबोधन

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फ्रेम्स टू फिक्शन कार्यक्रम की शुरुआत Karim सिटी कॉलेज, साकची के ऑडिटोरियम में हुई। प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने सत्यजीत राय की फिल्मों और लेखन को याद करते हुए कहा कि राय साहब ने भारतीय सिनेमा को विश्व पटल पर पहुंचाया। उनके चित्रों में साधारण जीवन की गहराई ऐसी है जो दिल को छू जाती है।

विषय प्रवेश प्रो. एके दास ने किया। उन्होंने सत्यजीत राय के फेलुनीथी जैसे किरदारों और अपू त्रयी पर रोशनी डाली। यह उद्घाटन न सिर्फ औपचारिक था, बल्कि प्रेरणादायक भी। फ्रेम्स टू फिक्शन का मकसद छात्रों को साहित्य और सिनेमा के बीच के पुल को समझाना था, जो बखूबी कामयाब रहा।

छात्रों की शानदार प्रस्तुतियां स्किट और प्रेजेंटेशन

कार्यक्रम की असली जान छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियां थीं। सबसे पहले Rayrewinds नामक स्किट हुई, जिसमें विभाग के छात्रों ने सत्यजीत राय के जीवन के विभिन्न पहलुओं को जीवंत किया। स्किट में राय के बचपन से लेकर ओस्कर विजेता बनने तक की यात्रा को हास्य और संवेदना से बुना गया। दर्शक ठहाकों से गदगद हो गए।

इसके बाद सौरव और स्नेहा की जोड़ी ने एक शानदार प्रेजेंटेशन दिया। इसमें सत्यजीत राय के जीवन, उनके उपन्यास, कहानियां, फिल्में और मिले सम्मानों की पूरी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि राय ने 36 फिल्में बनाईं, जिनमें पाथेर पांचाली जैसी कालजयी रचनाएं हैं। फ्रेम्स टू फिक्शन में यह प्रेजेंटेशन छात्रों की रिसर्च स्किल्स का बेहतरीन नमूना था। उन्होंने स्लाइड्स के जरिए राय के फोटोज, क्लिप्स और फैक्ट्स दिखाए, जो सभी को मंत्रमुग्ध कर गया।

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सत्यजीत राय की कहानी पाठ और फिल्म स्क्रीनिंग

कार्यक्रम के मध्य में छात्रा खुशी कुमारी ने सत्यजीत राय की प्रसिद्ध कहानी Fritz का भावपूर्ण पाठ किया। यह कहानी राय के विज्ञान कथा शैली को दर्शाती है, जिसमें रहस्य और मानवीय भावनाओं का मिश्रण है। खुशी की आवाज ने ऑडिटोरियम को सन्नाटे में ला दिया।

चाय ब्रेक के बाद मुख्य आकर्षण था – सत्यजीत राय पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म The Story Teller। इस फिल्म में राय के सहयोगियों, परिवार और विशेषज्ञों के इंटरव्यू थे। यह दिखाती है कि कैसे राय ने बंगाली साहित्य को सिल्वर स्क्रीन पर उतारा। फ्रेम्स टू फिक्शन का यह हिस्सा छात्रों को राय की दुनिया में डुबो गया। शाम 5 बजे कार्यक्रम समाप्त हुआ, लेकिन चर्चाएं जारी रहीं।

प्रमुख अतिथि और संयोजक

फ्रेम्स टू फिक्शन में अंग्रेजी विभाग के चेयरमैन डॉ. एस एम यहिया इब्राहीम, डॉ. मोहम्मद मोइज अशरफ, डॉ. पी सी बनर्जी, डॉ. नेहा तिवारी, डॉ. साकेत कुमार और प्रो. मोहम्मद ईसा समेत कई शिक्षक मौजूद थे। उनका मार्गदर्शन कार्यक्रम को और समृद्ध बनाता रहा।

संयोजक प्रो. एके दास और डॉ. बसूधरा राय ने पूरे इवेंट को फ्लॉलेस बनाया। KALA संस्था ने साबित कर दिया कि कॉलेज स्तर पर साहित्यिक आयोजन कितने जीवंत हो सकते हैं।

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सत्यजीत राय एक कालजयी व्यक्तित्व

सत्यजीत राय का जिक्र आते ही अपू त्रयी याद आती है – पाथेर पांचाली, अपोरजित और अपू संतर। वे न सिर्फ निर्देशक थे, बल्कि लेखक, चित्रकार और संगीतकार भी। फ्रेम्स टू फिक्शन ने इन पहलुओं को उजागर किया। राय को लाइफटाइम अचीवमेंट ऑस्कर मिला, जो भारतीय सिनेमा का गौरव है। उनके फेलुनीथी कहानियां आज भी बच्चों को रोमांचित करती हैं। ऐसे आयोजन छात्रों को साहित्य के प्रति जागरूक करते हैं।

Karim सिटी कॉलेज का अंग्रेजी विभाग साहित्यिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। फ्रेम्स टू फिक्शन ने इसकी परंपरा को मजबूत किया। जमशेदपुर जैसे शहर में ऐसे प्रोग्राम सांस्कृतिक समृद्धि बढ़ाते हैं।

यह कार्यक्रम साबित करता है कि साहित्य और सिनेमा का मेल कितना शक्तिशाली है। छात्रों ने न सिर्फ सीखा, बल्कि रचनात्मकता भी दिखाई। कॉलेज को ऐसे और इवेंट आयोजित करने चाहिए। फ्रेम्स टू फिक्शन जैसी पहल युवाओं को राय जैसे महान व्यक्तित्वों से जोड़ती है।

फ्रेम्स टू फिक्शन ने सत्यजीत राय को नई पीढ़ी से जोड़ा। Karim सिटी कॉलेज ने साहित्य प्रेम का शानदार उदाहरण पेश किया। ऐसे आयोजन जारी रहें, ताकि राय जैसे कलाकारों की कहानियां अमर रहें। जमशेदपुर के साहित्यिक माहौल को सलाम!

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