
भारत: हर साल 5 अप्रैल को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय समुद्री दिवस भारत की गौरवपूर्ण समुद्री परंपरा का प्रतीक है। आज, 5 अप्रैल 2026 को PM श्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को याद किया और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के योगदान की सराहना की।

यह दिन न केवल इतिहास को जीवंत करता है, बल्कि भविष्य की योजनाओं को भी दिशा देता है। आइए, हम इस विशेष अवसर, PM के संदेश और भारत के समुद्री क्षेत्र की प्रगति पर विस्तार से चर्चा करें।
राष्ट्रीय समुद्री दिवस का महत्व
राष्ट्रीय समुद्री दिवस की शुरुआत 1964 में हुई थी, जब पहला भारतीय जहाज ‘सेवन स्टार्स’ मुंबई से अमेरिका के न्यूयॉर्क पहुंचा। यह दिन समुद्री व्यापार, बंदरगाहों और नौसेना की भूमिका को रेखांकित करता है। भारत एक प्रायद्वीपीय देश है, जहां 7500 किमी से अधिक तट रेखा है।
समुद्री क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था का रीढ़ है – 95% व्यापार समुद्र मार्ग से होता है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि समुद्री क्षेत्र का समर्पण अर्थव्यवस्था, व्यापार और संपर्क को मजबूत करता है। यह दिन हमें चाणक्य कालीन व्यापार से लेकर आज के सागरमाला प्रोजेक्ट तक की यात्रा याद दिलाता है।
भारत का समुद्री इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू होता है, जहां लोथल बंदरगाह था। प्राचीन काल में चोल साम्राज्य ने दक्षिण-पूर्व एशिया तक समुद्री विजय की। आजादी के बाद इस क्षेत्र को मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई।
PM मोदी का संदेश और प्रतिबद्धता
2026 में PM मोदी ने कहा, “राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर, हम भारत की समुद्री विरासत और इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के अमूल्य योगदान को याद करते हैं।” उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई कि समुद्री क्षेत्र की अपार क्षमता से समृद्ध भविष्य सुनिश्चित होगा।
पिछले वर्षों में बंदरगाहों की कार्गो क्षमता दोगुनी हुई है। हजारों किमी सड़कें और रेल लाइनें बंदरगाहों से जोड़ी गईं। ‘समृद्धि के लिए बंदरगाह’, ‘प्रगति के लिए बंदरगाह’ जैसे मंत्रों से ढांचागत विकास हो रहा है। कोस्टल शिपिंग बिल से तटीय व्यापार बढ़ेगा और स्वदेशी जहाजों को बढ़ावा मिलेगा।
PM ने जलमार्गों के विकास पर जोर दिया। गंगा, ब्रह्मपुत्र जैसे आंतरिक जलमार्गों से माल ढुलाई सस्ती होगी। यह पर्यावरण अनुकूल भी है।
भारत की समुद्री विरासत प्राचीन से आधुनिक
भारत का समुद्री इतिहास गौरवपूर्ण है। कुषाण, गुप्त काल में रोम तक व्यापार होता था। चोल नाविकों ने दक्षिण चीन सागर पार किया। पुर्तगाली, डच आए, लेकिन भारतीय नाविकों की कुशलता कम न हुई।
आधुनिक भारत में सागरमाला परियोजना क्रांतिकारी है। 500 से अधिक प्रोजेक्ट्स से 7 लाख करोड़ का निवेश। जेएनपीटी, मुंद्रा जैसे बंदरगाह विश्वस्तरीय बने। 2025 में आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष घोषित हुआ, जो 2026 में और मजबूत होगा।
नौसेना दिवस से जुड़कर समुद्री सुरक्षा मजबूत हुई। 1971 युद्ध में नौसेना की कराची बंदरगाह पर विजय यादगार है।
समुद्री क्षेत्र में चुनौतियां और समाधान
समुद्री क्षेत्र में चुनौतियां हैं – जलवायु परिवर्तन, समुद्री डकैती, प्रदूषण। PM सरकार ने ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा दिया। सतत विकास से मछली पालन, पर्यटन बढ़ेगा।
कोस्टल शिपिंग बिल से ईंधन बचत और प्रदूषण कम होगा। ड्रेजिंग, ऑटोमेशन से दक्षता बढ़ी। युवाओं के लिए स्किल इंडिया से नाविक, इंजीनियर तैयार हो रहे।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत को समुद्री सुपरपावर बनाना।

आर्थिक प्रभाव और रोजगार सृजन
समुद्री क्षेत्र जीडीपी में 3% योगदान देता है। सागरमाला से 2 करोड़ रोजगार। मछुआरों, लॉजिस्टिक्स वर्कर्स को लाभ। महिलाओं के लिए भी अवसर बढ़े।
बंदरगाहों से निर्यात बढ़ा – पेट्रोलियम, कोयला, अनाज। चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में भारत आगे। 2026 में आसियान सहयोग से व्यापार दोगुना होगा।
भविष्य की योजनाएं: विकसित भारत 2047
विकसित भारत के लिए समुद्री क्षेत्र महत्वपूर्ण। PM ने कहा, जब समुद्री क्षेत्र मजबूत होता है, दुनिया को फायदा मिलता है। ग्रीन पोर्ट्स, हाइड्रोजन हब, डीप सी माइनिंग पर काम।
आसियान के साथ समुद्री निगरानी, आपदा राहत मजबूत। 2026 समुद्री सहयोग वर्ष से ब्लू इकॉनमी बूम।
समुद्री क्षेत्र के नायक
समुद्री क्षेत्र के नायक – मछुआरे, नाविक, डॉक वर्कर्स। PM ने उनके समर्पण को सलाम किया। बाबा साहब आंबेडकर ने भी जलशक्ति पर जोर दिया था।
PM ने राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर भारत की समुद्री विरासत को याद कर सही संदेश दिया। समुद्री क्षेत्र से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, रोजगार बढ़ेंगे। आइए, हम सब मिलकर ‘अमृत काल’ में भारत को समुद्री महाशक्ति बनाएं।










