मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया

Navadurga वंदना: कवि करुणामय मंडल की सुंदर स्तुति माँ दुर्गा के नौ रूपों की

810c92dedce0cbe5e9d700a4ea327a2e
On: March 21, 2026 5:42 PM
Follow Us:
NAVDURGA
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1

कवि करुणामय मंडल ने Navadurga की वंदना के माध्यम से माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की हृदयस्पर्शी स्तुति रची है। पूर्व जिला पार्षद पोटका, पूर्वी सिंहभूम झारखंड से जुड़े इस कवि ने सरल शब्दों में भक्ति का समंदर उड़ेल दिया है। नवदुर्गा की वंदना नवरात्रि के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं के लिए अमृत तुल्य है। आज हम इस कविता का भावार्थ, प्रत्येक रूप का महत्व, कवि की कल्पना और भक्ति भाव पर विस्तार से चर्चा करेंगे। नवदुर्गा की वंदना पढ़कर मन शुद्ध हो जाता है और माँ की कृपा प्राप्त होती है।

A 2

कविता का पूरा पाठ माँ के नौ रूपों की दिव्य वंदना

कवि करुणामय मंडल की यह रचना नवदुर्गा को समर्पित है:

नमामी मां “शैलपुत्री”
विश्व वृषभ वाहिनी।
शिव योगी सीमंतिनी
देवी “ब्रह्मचारिणी”।।

चंद्रज्योति “चंद्रघंटा”
“कुष्मांडा” रूपिणी।
नमामी “स्कंध माता”
नमः नमः कात्यायनी।।

जय देवी “कालरात्रि”
“महागौरी” रूपिणी।
जय जय “सिद्धि दात्री”
जय मां जगत जननी।।

जय नव रात्रि नव दुर्गे
देवी दुर्गति विनाशिनी।
मां बसंती चैताली मां
नमामी विश्व पालिनी।।

Navadurga की वंदना में कवि ने संस्कृत मंत्र शैली अपनाई है, जो भक्ति को गहरा बनाती है। प्रत्येक पंक्ति माँ के गुणों को उजागर करती है।

THE NEWS FRAME

प्रत्येक रूप का भावार्थ शक्ति के नौ स्वरूप

Navadurga की वंदना में माँ दुर्गा के नौ रूप नवरात्रि के नौ दिनों में पूजे जाते हैं। आइए समझें:

शैलपुत्री शक्ति और स्थिरता की देवी

पहला रूप शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं, जो वृषभ पर सवार रहती हैं। Navadurga की वंदना में “विश्व वृषभ वाहिनी” कहकर कवि उनकी स्थिरता दर्शाते हैं। यह रूप साहस और आधार प्रदान करता है।

ब्रह्मचारिणी तपस्या की साधिका

दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी तप और संयम की प्रतीक हैं। “शिव योगी सीमंतिनी” से कवि भगवान शिव से विवाह पूर्व की तपस्या का जिक्र करते हैं। Navadurga की वंदना में यह त्याग की शक्ति सिखाती हैं।

चंद्रघंटा साहस की घंटाध्वनि

मस्तक पर चंद्रमा घंटा रूपी चंद्रघंटा शत्रुओं का नाश करती हैं। “चंद्रज्योति” से कवि शीतल शक्ति का वर्णन करते हैं। Navadurga की वंदना साहस जगाती है।

कुष्मांडा सृष्टि रचयिता

ब्रह्मांड की रचना करने वाली कुष्मांडा को “रूपिणी” कहा गया। यह रूप सूर्य को ग्रहों को जीवन देने वाली हैं। Navadurga की वंदना सृजन की ऊर्जा देती हैं।

स्कंधमाता ममता की मूर्ति

कार्तिकेय की माता स्कंधमाता संरक्षण का प्रतीक हैं। कवि ने “नमामी स्कंध माता” से मातृत्व भाव जागृत किया। Navadurga की वंदना परिवार रक्षा का संदेश देती हैं।

कात्यायनी दुष्ट नाशक

दुष्टों का संहार करने वाली कात्यायनी को “नमः नमः” से प्रणाम। यह रूप महिषासुर मर्दिनी का प्रतीक है। Navadurga की वंदना बुराई पर अच्छाई की जीत दिखाती हैं।

कालरात्रि भय नाशिनी

भयंकर रूप वाली कालरात्रि अंधकार मिटाती हैं। “जय देवी कालरात्रि” से कवि भक्ति का आह्वान करते हैं। Navadurga की वंदना निडरता प्रदान करती हैं।

महागौरी शांति और पवित्रता

सफेद वस्त्र धारण महागौरी शुद्धता की देवी हैं। “रूपिणी” से सौंदर्य वर्णन। Navadurga की वंदना शांति का आशीर्वाद देती हैं।

सिद्धिदात्री सिद्धि प्रदायिनी

सभी सिद्धियां देने वाली सिद्धिदात्री अंतिम रूप हैं। “जय जय सिद्धि दात्री” सफलता का वरदान। Navadurga की वंदना कल्याण की कामना करती हैं।

कवि की कल्पना शक्ति ब्रह्मांड की आधार शक्ति

Navadurga की वंदना में कवि करुणामय मंडल की कल्पना अनुपम है। माँ को “जगत जननी” और “विश्व पालिनी” कहकर उन्होंने ब्रह्मांड की माता बनाया। “बसंती चैताली” से वसंत और चैत्र नवरात्रि का संकेत – नवजीवन का प्रतीक। कवि की imagery में माँ सृष्टि, पालन और संहार की त्रिमूर्ति हैं। कभी वृषभ पर शांत, कभी कालरात्रि रूप में उग्र। Navadurga की वंदना भक्ति को चित्रित करती है।

यह कल्पना झारखंड के पोटका क्षेत्र की सरलता से उपजी लगती है, जहां नवरात्रि में गरबा और कन्या पूजन आम है। कवि ने लोकभाषा में संस्कृत शैली मिलाकर सभी को जोड़ा।

नवरात्रि में Navadurga पूजन महत्व और विधि

Navadurga की वंदना नवरात्रि उत्सव का सार है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में नौ दिनों प्रत्येक रूप की पूजा। विधि: कलश स्थापना, गहत पूजन, हवन। फलाहार रखें, कन्या भोजन कराएं। Navadurga की वंदना पढ़कर मंत्र जाप करें। लाभ: शक्ति, समृद्धि, संरक्षण।

Navadurga पूजन तालिका

दिनरूपप्रतीक गुणभोग
1शैलपुत्रीस्थिरताअर्पण
2ब्रह्मचारिणीतपस्याफल
3चंद्रघंटासाहसदूध
4कुष्मांडासृष्टिमालपुए
5स्कंधमाताममतापनीर
6कात्यायनीसंहारकोकोनट
7कालरात्रिभय नाशजल
8महागौरीशांतिहलवा
9सिद्धिदात्रीसिद्धितीखा खाना

समाज में Navadurga भक्ति: झारखंड का विशेष महत्व

झारखंड में Navadurga की वंदना जैसी रचनाएं लोकप्रिय हैं। पूर्वी सिंहभूम के पोटका में सरल जीवन वाले लोग माँ को जीवन शक्ति मानते हैं। नवरात्रि में झूमकर नाचते हैं। कवि करुणामय मंडल ने सामाजिक सेवा से प्रेरित होकर यह लिखा। Navadurga की वंदना नारी शक्ति का प्रतीक भी है।

आज के दौर में तनाव, भय से घिरे लोगों को यह भक्ति शांति देती है। महिलाओं को सशक्त बनाती।

Navadurga की वंदना कवि करुणामय मंडल की अमूल्य देन है। माँ के नौ रूपों की स्तुति से जीवन उज्ज्वल होता है। जय माँ दुर्गा! नवरात्रि में इसे अवश्य पढ़ें। माँ की कृपा सब पर बनी रहे। भक्ति में लीन होकर दुर्गति नष्ट करें।

समापन भाव
यह कविता केवल स्तुति नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और शक्ति का संगम है। इसमें कवि माँ दुर्गा के सभी रूपों को स्मरण कर उनसे सुरक्षा, शक्ति और कल्याण की कामना करता है।

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM

Leave a Comment

Link copied