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MP युवक संघ शीतला माता मंदिर में भव्य नवरात्रि जवांरा पूजा विसर्जन शोभायात्रा

On: March 29, 2026 12:54 AM
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नवरात्रि का त्योहार तो हर साल धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन जब बात सार्वजनिक जवांरा पूजा की हो, तो उत्साह दोगुना हो जाता है। इस वर्ष भी एमपी युवक संघ, शीतला माता मंदिर, मरार पारा सोनारी में नवमी के दिन पूरे विधि-विधान से जवांरा पूजा कर विशाल विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। MP युवक संघ शीतला माता मंदिर के इस आयोजन ने हजारों श्रद्धालुओं को एकजुट किया। बाजे-गाजे, नगाड़े और छत्तीसगढ़ी वेशभूषा के साथ निकली यह शोभायात्रा न्यु कपाली नदी घाट पर पहुंची, जहां 27 ज्योति कलशों का विसर्जन हुआ। आइए, इस भव्य कार्यक्रम की पूरी कहानी जानते हैं और समझते हैं कि ऐसे आयोजन हमारी संस्कृति को कैसे जीवंत रखते हैं।

नवरात्रि जवांरा पूजा का महत्व और परंपरा

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नवरात्रि सिर्फ नौ दिनों का त्योहार नहीं, बल्कि शक्ति उपासना का प्रतीक है। MP युवक संघ शीतला माता मंदिर में होने वाली सार्वजनिक जवांरा पूजा की परंपरा वर्षों पुरानी है। जवांरा यानी जौ के अंकुर, जो मां दुर्गा की कृपा का प्रतीक होते हैं। नवमी के दिन इनकी पूजा के बाद विसर्जन शोभायात्रा निकालना एक ऐसा रिवाज है, जो समुदाय को जोड़ता है।

इस बार का आयोजन प्रत्येक वर्ष की भांति खास था। मंदिर प्रांगण में सुबह से ही विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू हो गई। पंडितों ने मंत्रोच्चार के बीच ज्योति कलशों को प्रज्वलित किया। श्रद्धालु मां शीतला माता के चरणों में माथा टेकते नजर आए। बाजे-गाजे की धुन पर लोग झूम उठे। छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में सजे युवा और महिलाएं शोभायात्रा को और आकर्षक बना रही थीं। यह दृश्य देखकर लग रहा था मानो पूरा सोनारी इलाका मां दुर्गा के जयकारों से गूंज रहा हो।

ऐसे आयोजन न सिर्फ धार्मिक होते हैं, बल्कि सामाजिक एकता को भी मजबूत करते हैं। शहर के कोने-कोने से लोग पहुंचे, जो सामान्य दिनों में शायद न मिलें। नवरात्रि जवांरा पूजा विसर्जन शोभायात्रा ने साबित कर दिया कि परंपराएं आज भी प्रासंगिक हैं।

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MP युवक संघ शोभायात्रा का भव्य स्वरूप

शोभायात्रा मंदिर प्रांगण से शुरू होकर न्यु कपाली नदी घाट तक पहुंची। रास्ते भर नगाड़े, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज सुनाई दे रही थी। हजारों श्रद्धालु पैदल चलते हुए मां के जयकारे लगा रहे थे। छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य और वेशभूषा ने इसे सांस्कृतिक रंग दे दिया। बच्चे, बूढ़े, युवा-सब शामिल थे।

नदी घाट पर पहुंचते ही 27 ज्योति कलशों का विसर्जन किया गया। यह पल बेहद भावुक था। कलशों को नदी में विसर्जित करते हुए सभी ने मां से प्रार्थना की कि आने वाला वर्ष सुख-समृद्धि लाए। पुलिस प्रशासन ने भी आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने में पूरा सहयोग किया। कोई भी असुविधा नहीं हुई, जो समिति की बेहतर योजना का प्रमाण है।

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आयोजन में प्रमुख लोगों की भूमिका

MP युवक संघ शीतला माता मंदिर का यह आयोजन समिति के संरक्षक प्यारे लाल साहू के नेतृत्व में सफल रहा। अध्यक्ष भोला साहू ने सभी को धन्यवाद दिया। उपाध्यक्ष अवध राम साहू, कोषाध्यक्ष प्रीतम साहू ने व्यवस्था संभाली। पंचम जंघेल, बोधन राम साहू, यशवन्त साहू, जीवन साहू, चमन लाल साहू, मोहन पटेल, संतोष साहू, सत्यदेव साहू, महेश साहू, उदय नारायण, बालेश्वर साहू, रमेश साहू, भीम साहू, मनोज साहू, कृष्णा साहू, जैलाल पटेल, दीप साहू, गौवरभ साहू जैसे सदस्यों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।

महिला समिति की महिलाओं ने भी कमाल कर दिखाया। चंदा बाई, पंचवती साहू, विजय लक्ष्मी, गायत्री देवी, राधा देवी, बिना साहू, गुड्डी लोधी, हेमा साहू, सुरजा बाई, जानकी साहू, भारतीय साहू, पूजा साहू, शांति देवी, इन्दू देवी, सूरजा बाई, नेहा पटेल आदि ने पूजा, सजावट और भोजन वितरण में योगदान दिया। महिलाओं की भागीदारी ने आयोजन को और मजबूत बनाया।

ये सभी लोग बिना थके सेवा में लगे रहे। उनकी मेहनत से ही नवरात्रि जवांरा पूजा विसर्जन शोभायात्रा इतनी सफल हुई। समिति का यह प्रयास सराहनीय है, जो हर वर्ष दोहराया जाता है।

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समिति के प्रयास और भविष्य की योजनाएं

MP युवक संघ न सिर्फ धार्मिक आयोजन करता है, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय है। नवरात्रि के दौरान जरूरतमंदों को भोजन वितरण, रक्तदान शिविर जैसे कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। इस बार भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला। अध्यक्ष भोला साहू ने बताया कि अगले वर्ष और भव्य आयोजन की योजना है। अधिक कलश, बड़ा पंडाल और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे।

ऐसे प्रयास से सोनारी क्षेत्र की पहचान बन रही है। स्थानीय लोग गर्व महसूस करते हैं। एमपी युवक संघ शीतला माता मंदिर को सभी का सहयोग चाहिए ताकि परंपरा बनी रहे।

नवरात्रि के अन्य आयोजन और सांस्कृतिक महत्व

नवरात्रि में गरबा, डांडिया और रामलीला जैसे कार्यक्रम भी होते हैं। लेकिन जवांरा पूजा का अलग महत्व है। यह प्रकृति पूजा का प्रतीक है। जौ के अंकुर उगाना वर्षा, फसल और समृद्धि की कामना करता है। छत्तीसगढ़ी संस्कृति का समावेश इसे अनोखा बनाता है।

इस आयोजन ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। प्लास्टिक मुक्त शोभायात्रा और नदी सफाई ने जागरूकता फैलाई। हजारों लोग जुड़ने से सामुदायिक भावना मजबूत हुई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गए, जो आयोजन की लोकप्रियता दिखाते हैं।

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स्थानीय समुदाय पर प्रभाव

सोनारी, मरार पारा जैसे इलाकों में ऐसे आयोजन पर्यटन को बढ़ावा देते हैं। लोग दूर-दूर से आते हैं। इससे स्थानीय व्यापार को फायदा होता है। बच्चे परंपराओं से जुड़ते हैं, जो आने वाली पीढ़ी के लिए जरूरी है। नवरात्रि जवांरा पूजा ने एक बार फिर साबित किया कि धार्मिक आयोजन सामाजिक विकास का माध्यम बन सकते हैं।

MP युवक संघ शीतला माता मंदिर का यह नवरात्रि जवांरा पूजा विसर्जन शोभायात्रा एक यादगार आयोजन साबित हुआ। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी, समिति के प्रयास और सांस्कृतिक रंग ने इसे अविस्मरणीय बना दिया। ऐसे आयोजन हमारी जड़ों से जोड़ते हैं और समाज को मजबूत बनाते हैं। आइए, हम सभी मिलकर ऐसी परंपराओं को निभाएं। मां दुर्गा सबको आशीर्वाद दें।

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