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आधुनिक केज कल्चर पद्धति से बदली रामसिंह मुन्दुईया की तकदीर, मत्स्य पालन बना आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार

On: July 14, 2026 9:28 PM
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  • मत्स्य विभाग की पहल से पश्चिमी सिंहभूम में ग्रामीण आजीविका को मिल रही नई दिशा

मत्स्य विभाग: पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग द्वारा संचालित आधुनिक मत्स्य पालन कार्यक्रम ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रहे हैं। सदर प्रखंड के छोटा जयपुर गांव निवासी रामसिंह मुन्दुईया इसका जीवंत उदाहरण हैं। सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन करने वाले रामसिंह ने आधुनिक केज कल्चर पद्धति को अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। रामसिंह की उपलब्धि का प्रभाव केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी सफलता को देखकर गांव एवं आसपास के क्षेत्रों के अनेक युवा और किसान भी आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों के प्रति आकर्षित हुए हैं। इससे जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

रामसिंह मुंडुइया पहले पारंपरिक खेती और छोटे-मोटे कार्यों के सहारे परिवार का भरण-पोषण करते थे। आमदनी सीमित होने के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान उन्हें मत्स्य विभाग की केज कल्चर आधारित योजना की जानकारी मिली। विभागीय पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने इस तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया और आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त किया। योजना के तहत उन्हें 2.70 लाख रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया। साथ ही वैज्ञानिक ढंग से मत्स्य पालन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज का चयन, संतुलित आहार प्रबंधन, जल गुणवत्ता बनाए रखने तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने संबंधी तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया।

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विभागीय विशेषज्ञों के निरंतर मार्गदर्शन से उन्होंने जलाशय में आधुनिक केज स्थापित कर पंगास एवं तिलापिया प्रजाति की मछलियों का पालन प्रारंभ किया। आज रामसिंह मुन्दुईया प्रतिवर्ष लगभग 5 से 6 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें 3.5 से 4.5 लाख रुपये तक की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यकताओं तथा भविष्य की योजनाओं को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर पा रहे हैं।

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि “जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर पात्र लाभुकों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। रामसिंह मुन्डुईया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और प्रशासनिक सहयोग के समन्वय से ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं। उन्होंने जिले के युवाओं एवं किसानों से अपील की कि वे विभागीय योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ें।”

जिला मत्स्य पदाधिकारी श्री नवीन कुमार ने कहा कि “आधुनिक केज कल्चर पद्धति कम समय में बेहतर उत्पादन देने वाली प्रभावी तकनीक है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक इच्छुक मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण, तकनीकी परामर्श और योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए, ताकि जिले में मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ ग्रामीणों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि विभाग प्रत्येक चरण में लाभुकों को आवश्यक तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।”

लाभुक रामसिंह मुन्दुईया ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “पहले सीमित आय के कारण परिवार का खर्च चलाना कठिन था, लेकिन मत्स्य विभाग से मिले प्रशिक्षण और सहयोग ने मेरी जिंदगी बदल दी। आज मैं सम्मानजनक आय अर्जित कर रहा हूं और भविष्य को लेकर आश्वस्त हूं। मेरी सभी ग्रामीण भाइयों-बहनों से अपील है कि वे सरकारी योजनाओं पर विश्वास करें, प्रशिक्षण लें और आधुनिक मत्स्य पालन को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं।”

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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