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मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज के छात्र ने जहर खाकर की आत्महत्या, अस्पताल पहुँचने में हुई देर

On: August 22, 2025 9:42 PM
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जमशेदपुर । शहर के सिदगोड़ा थाना क्षेत्र में स्थित मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज में गुरुवार शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई। कॉलेज के एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र दिव्यांशु पांडेय (निवासी – काशीपुर, समस्तीपुर, बिहार) ने अपने हॉस्टल के कमरे में नशीली दवा (सल्फास की गोली) खाकर आत्महत्या कर ली।

अस्पताल पहुँचने में हुई देर

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दिव्यांशु की तबीयत बिगड़ने पर उसके सहयोगी छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन से एंबुलेंस की मांग की, लेकिन समय पर वाहन नहीं मिल सका। किसी तरह छात्रों ने उसे निजी वाहन से पहले मर्सी अस्पताल और फिर शाम 7 बजे टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) पहुँचाया। वहाँ डॉक्टरों ने जाँच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

पारिवारिक स्थिति

दिव्यांशु के पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। उनकी पढ़ाई का खर्च बड़े भाई सुधांशु शुभम उठा रहे थे। भाई ने बताया कि गुरुवार देर शाम तक दोनों के बीच सामान्य बातचीत हुई थी और किसी भी प्रकार की परेशानी की बात सामने नहीं आई थी। आत्महत्या का कारण अभी साफ नहीं है।

पुलिस और कॉलेज प्रबंधन की प्रतिक्रिया

घटना की जानकारी मिलते ही सिदगोड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुँची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने कहा कि आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है।

कॉलेज प्रबंधन की ओर से प्रो. प्रियंका सिंगल ने इसे “अफसोसजनक घटना” बताया और कहा कि शव को दिव्यांशु के भाई को सौंप दिया गया है।

हॉस्टल में दहशत

इस घटना के बाद कॉलेज हॉस्टल में छात्रों के बीच तरह-तरह की चर्चाएँ चल रही हैं। साथी छात्र सदमे में हैं और दिव्यांशु के इस कदम से गहरे आहत हैं।

यह बहुत गंभीर मुद्दा है। इस तरह की घटना के बाद कई सवाल उठते हैं, जिनका जवाब समाज, कॉलेज प्रशासन और पुलिस – सभी से अपेक्षित है।

दिव्यांशु पांडेय की आत्महत्या मामले में उठने वाले अहम सवाल

1. एंबुलेंस की देरी

  • जब छात्र की हालत बिगड़ी तो कॉलेज प्रबंधन ने तुरंत एंबुलेंस क्यों नहीं उपलब्ध कराई?
  • क्या मेडिकल कॉलेज जैसी जगह पर 24 घंटे एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए?

2. कॉलेज प्रबंधन की भूमिका

  • हॉस्टल में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग की क्या व्यवस्था है?
  • क्या कॉलेज प्रशासन ने समय रहते मदद या प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवाई?

3. सुरक्षा और निगरानी

  • हॉस्टल में खतरनाक दवाएँ या ज़हरीली चीज़ें छात्र तक कैसे पहुँचीं?
  • क्या हॉस्टल प्रबंधन छात्रों पर नियमित निगरानी रखता है?

4. पारिवारिक और आर्थिक दबाव

  • पिता के न रहने और भाई पर आर्थिक बोझ होने से क्या दिव्यांशु मानसिक दबाव में था?
  • क्या कॉलेज को ऐसे छात्रों की आर्थिक और मानसिक मदद के लिए विशेष व्यवस्था करनी चाहिए?

5. पुलिस जांच

  • पुलिस क्या आत्महत्या के पीछे शैक्षणिक दबाव, निजी कारण या प्रबंधन की लापरवाही की जांच कर रही है?
  • क्या इसमें किसी तरह का उत्पीड़न, रैगिंग या अन्य दबाव शामिल था?

6. व्यवस्था की विफलता

  • मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाला छात्र, जो खुद भविष्य में लोगों की जान बचाता, वह खुद समय पर इलाज न मिलने से क्यों मर गया?
  • क्या यह प्रबंधन और सिस्टम की असफलता का मामला नहीं है?

कुल मिलाकर, यह घटना सिर्फ एक छात्र की आत्महत्या नहीं बल्कि मेडिकल कॉलेज, हॉस्टल व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े करती है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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