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झारखंड में Naksalwad को बड़ा झटका 27 माओवादियों ने हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण 33 लाख के इनामी भी शामिल

On: May 21, 2026 7:23 PM
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Naksalwad

झारखंड: में Naksalwad के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को गुरुवार को एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली। राजधानी रांची स्थित धुर्वा पुलिस मुख्यालय में एक साथ 27 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस आत्मसमर्पण ने राज्य में सक्रिय उग्रवादी संगठनों की कमर तोड़ने का काम किया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में कई बड़े नाम शामिल हैं, जिन पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था।

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राज्य पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के संयुक्त अभियान का यह अब तक का सबसे प्रभावशाली परिणाम माना जा रहा है। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री भी सुरक्षा बलों को सौंप दी। इससे साफ संकेत मिला है कि जंगलों में सक्रिय उग्रवादी संगठन अब लगातार कमजोर पड़ रहे हैं।

25 माओवादी और 2 जेजेएमपी सदस्य शामिल

आत्मसमर्पण करने वालों में प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के 25 सदस्य और झारखंड जन मुक्ति परिषद (जेजेएमपी) के 2 उग्रवादी शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन सभी नक्सलियों के खिलाफ राज्य के विभिन्न जिलों में हत्या, पुलिस मुठभेड़, लेवी वसूली, विस्फोट, अपहरण और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं।

इन 27 नक्सलियों पर कुल मिलाकर 426 नक्सल संबंधित मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादी लंबे समय से संगठन के सक्रिय और प्रभावशाली सदस्य रहे हैं।

33 लाख रुपये के इनामी नक्सली भी हुए शामिल

सरेंडर करने वालों में ऐसे कई बड़े उग्रवादी शामिल हैं, जिन पर राज्य सरकार ने भारी इनाम घोषित किया था। जानकारी के अनुसार, कुल 8 नक्सलियों पर मिलाकर 33 लाख रुपये का इनाम रखा गया था। इनमें कुछ एरिया कमांडर और सब-जोनल स्तर के उग्रवादी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन बड़े नक्सलियों के आत्मसमर्पण से संगठन की गतिविधियों को गंभीर झटका लगेगा। विशेष रूप से चाईबासा, लातेहार, गुमला, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम जैसे इलाकों में नक्सली नेटवर्क कमजोर होगा।

आधुनिक हथियार और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद

सरेंडर के दौरान उग्रवादियों ने जो हथियार सौंपे, उनमें कई आधुनिक हथियार शामिल थे। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, हथियारों में इंसास राइफल, एसएलआर, देसी हथियार, पिस्तौल, कारतूस और विस्फोटक सामग्री शामिल हैं।

इन हथियारों का इस्तेमाल पहले पुलिस बलों और विकास कार्यों को निशाना बनाने में किया जाता था। सुरक्षा एजेंसियों ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया है क्योंकि हथियारों की बरामदगी से भविष्य की कई संभावित घटनाओं को रोका जा सकेगा।

सरकार की आत्मसमर्पण नीति का दिख रहा असर

झारखंड सरकार की नई आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। राज्य सरकार ने Naksalwad को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए आर्थिक सहायता, रोजगार प्रशिक्षण, आवास और सुरक्षा जैसी कई सुविधाएं देने की घोषणा की थी।

इसी नीति के तहत बड़ी संख्या में उग्रवादी अब हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार अभियान और विकास योजनाओं ने नक्सलियों के मनोबल को कमजोर किया है।

जंगलों में बढ़ा सुरक्षा बलों का दबाव

पिछले कुछ महीनों में झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन ने जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए हैं। विशेष रूप से सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर नक्सलियों के ठिकानों को ध्वस्त किया गया।

सुरक्षा बलों की बढ़ती कार्रवाई के कारण Naksalwad को सुरक्षित ठिकाने नहीं मिल पा रहे हैं। यही कारण है कि अब कई उग्रवादी संगठन छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

विकास कार्यों ने बदली ग्रामीण इलाकों की तस्वीर

एक समय जिन इलाकों में Naksalwad का दबदबा था, वहां अब सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं। सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं।

सड़क निर्माण, मोबाइल नेटवर्क, स्कूल, अस्पताल और रोजगार योजनाओं ने स्थानीय युवाओं को नई दिशा दी है। इससे नक्सली संगठनों की पकड़ कमजोर हुई है और ग्रामीण जनता अब खुलकर सुरक्षा बलों का समर्थन कर रही है।

मुख्यमंत्री और डीजीपी ने दी बड़ी प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने इस सामूहिक आत्मसमर्पण को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को Naksalwad मुक्त बनाने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों से मुख्यधारा में लौटकर नया जीवन शुरू करने की अपील की।

वहीं, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने कहा कि सुरक्षा बलों की रणनीति और बेहतर समन्वय का यह परिणाम है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।

Naksalwad प्रभावित जिलों में पड़ेगा बड़ा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े सरेंडर का असर राज्य के कई नक्सल प्रभावित जिलों में देखने को मिलेगा। जिन इलाकों में नक्सली संगठन लंबे समय से सक्रिय थे, वहां अब संगठनात्मक ढांचा कमजोर होगा।

चाईबासा, खूंटी, गुमला, पलामू और लातेहार जैसे जिलों में सुरक्षा बलों को अभियान चलाने में और आसानी मिलेगी। साथ ही ग्रामीणों में भी विश्वास बढ़ेगा कि सरकार अब पूरी तरह नियंत्रण की स्थिति में है।

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मुख्यधारा में लौटने की बढ़ रही प्रवृत्ति

हाल के वर्षों में झारखंड में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई बड़े कमांडर पहले ही संगठन छोड़ चुके हैं। लगातार दबाव, संसाधनों की कमी और स्थानीय समर्थन घटने के कारण उग्रवादी संगठन कमजोर होते जा रहे हैं।

सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे अन्य सक्रिय उग्रवादियों को भी हथियार छोड़ने के लिए प्रेरणा मिल रही है।

झारखंड में Naksalwad के खिलाफ निर्णायक लड़ाई

झारखंड लंबे समय तक Naksalwad हिंसा से प्रभावित रहा है। लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। सुरक्षा बलों की रणनीतिक कार्रवाई, सरकार की विकास योजनाएं और स्थानीय लोगों का सहयोग मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई को मजबूत बना रहे हैं।

27 माओवादियों का एक साथ आत्मसमर्पण केवल एक प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि यह संकेत है कि राज्य में नक्सलवाद का प्रभाव लगातार घट रहा है। आने वाले समय में ऐसे और बड़े अभियान देखने को मिल सकते हैं, जिससे झारखंड को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य मजबूत होगा।

रांची में 27 माओवादियों का सामूहिक आत्मसमर्पण झारखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। 33 लाख के इनामी नक्सलियों सहित कई बड़े उग्रवादियों का हथियार छोड़ना यह दर्शाता है कि राज्य में नक्सलवाद अब कमजोर पड़ रहा है।

सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई, सरकार की पुनर्वास नीति और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों ने मिलकर इस बदलाव को संभव बनाया है। आने वाले समय में झारखंड में शांति, विकास और सुरक्षा का नया अध्याय और मजबूत होने की उम्मीद है।

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