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रक्त अधिकोष, Chaibasa का अनुज्ञप्ति निर्गत कराया जाए: जनहित की आवाज़

On: March 30, 2026 12:08 AM
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झारखण्ड के पश्चिम सिंहभूम जिला मुख्यालय Chaibasa में सिहत‑सेवा और जन‑विश्वास के बीच एक बार फिर विरोधाभास दिख रहा है। पूर्व सिंहभूम कांग्रेस के प्रवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता त्रिशानु राय ने शनिवार को Chaibasa परिसदन में झारखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट मांग की है कि “रक्त अधिकोष, Chaibasa ” का अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) शीघ्र निर्गत करवाया जाए। यह मांग केवल एक विभागीय तकनीकी जरूरत नहीं, बल्कि जिले की आम जनता की जान‑बचाओ अपील बन चुकी है।

Chaibasa ज्ञापन में क्या कहा गया?

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ज्ञापन में त्रिशानु राय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में Chaibasa सदर अस्पताल “संजीवनी” की भूमिका निभा रहा है और यहाँ पूरे जिले‑सहित दूर‑दूर के इलाकों के लोग अपनी चिकित्सा के लिए आते हैं। फिर भी रक्त अधिकोष, Chaibasa में अभी केवल रक्त भंडारण की सुविधा है, वहाँ अनुज्ञप्ति नहीं होने के कारण पूर्ण रक्त‑आपूर्ति और रिप्लेसमेंट व्यवस्था नहीं बन पाई है।

उन्होंने बताया कि आपातकालीन ऑपरेशन, ट्रॉमा‑केस या अचानक रक्तक्षरण वाले मरीजों के लिए समय‑समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता, जिसके कारण मरीजों को जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल या राँची तक रेफर करना पड़ रहा है। यह सिर्फ दूरी‑दूरी की बात नहीं, बल्कि जान‑बचाने वाले समय के लाखों किलोमीटर‑सफर की दर्दनाक कहानी है।

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अनुज्ञप्ति न होने से स्थानीय लोगों पर क्या असर पड़ रहा है?

ज्ञापन में बताया गया है कि रक्त अधिकोष का लाइसेंस न मिलने के कारण स्थानीय लोग दो‑तरीके से परेशान हैं:

  • आपातकालीन जरूरत के लिए ज़रूरी रक्त यहाँ उपलब्ध नहीं हो पाता, इसलिए ऑपरेशन या ईलाज टालना पड़ता है या तुरंत रेफर करना पड़ता है।
  • सदर अस्पताल व Chaibasa के अन्य निजी अस्पतालों में ईलाज‑रत मरीजों के परिजनों को एमजीएम, जमशेदपुर या अन्य सेंटरों से रक्त लाने पर मजबूर होना पड़ता है, जो समय, धन और स्वास्थ्य दोनों पर बोझ बन गया है।

इससे सिर्फ मरीज की स्थिति नाजुक नहीं होती, बल्कि एक आकस्मिक घटना में कोई भी अप्रिय घटना (जैसे रक्त‑संक्रमण या जान गंवाना) भी उभर सकती है, जिसका भय लगातार परिजनों और डॉक्टरों के दिमाग में बना रहता है।

Chaibasa में रक्त संकट की पृष्ठभूमि

Chaibasa सदर अस्पताल के रक्त अधिकोष में पहले भी रक्त‑कमी और गड़बड़ी के कई चौंकाने वाले मामले सामने आ चुके हैं। पिछले समय में यहाँ एक घटना में कुछ बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाने के आरोप लगे, जिसके बाद राज्य व न्यायपालिका ने भी गहन जांच और निगरानी तंत्र लागू किया।

इसी वजह से राज्य सरकार ने रक्त‑आपूर्ति‑प्रक्रिया बदल दी, जिसमें अब स्थानीय‑स्तर चढ़ाए जाने वाले रक्त को जांच और रिप्लेसमेंट के लिए जमशेदपुर भेजा जाता है। इस लंबी प्रक्रिया के कारण रक्त‑स्टॉक लगातार कम होता जा रहा है और Chaibasa के ब्लड बैंक में कई बार खून दो‑तीन दिनों तक “शून्य यूनिट” रह चुका है।

Chaibasa मे अनुज्ञप्ति से क्या आशा है?

त्रिशानु राय की मांग का मूल सार यह है कि रक्त अधिकोष, Chaibasa को पूर्ण रक्त‑संस्थान की अनुज्ञप्ति मिले, जिससे:

  • आपातकालीन रक्त‑आपूर्ति तेजी से की जा सके,
  • लोकल ऑपरेशन, सीजेरियन, ट्रॉमा‑सर्जरी आदि यहाँ ही बिना रेफर‑ज़दगी के हो सकें,
  • स्वस्थ मनोवैज्ञानिक सुरक्षा देश‑स्तरीय मानकों के अनुरूप बन पाए, जिससे रक्त‑संक्रमण जैसे जोखिम भी कम हों।

अनुज्ञप्ति के साथ उचित प्रशिक्षित कार्यकर्ता, निगरानी व जांच व्यवस्था का भी सुझाव दिया गया है, ताकि गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों को साथ लेकर चला जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री की प्रतिक्रिया

ज्ञापन सौंपने के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने त्रिशानु राय को आश्वासन दिया कि इस मामले पर शीघ्र और यथोचित पहल की जाएगी तथा रक्त अधिकोष, Chaibasa के लाइसेंस‑प्रक्रिया पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

यह आश्वासन जरूर राहत की बात है, लेकिन स्थानीय जनता की उम्मीद यह है कि आश्वासन शब्दों पर ही न ठहरकर तेज़‑तेज़ कार्रवाई के रूप में दिखे, ताकि Chaibasa सदर अस्पताल न केवल “संजीवनी” बना रहे, बल्कि रक्त आपूर्ति के मामले में भी ग्रामीण जनता के लिए विश्वास‑योग्य व भरोसेमंद हस्पताल बन सके।

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