
जमशेदपुर: Jamshedpur के टेल्को क्षेत्र से लेकर बिरसानगर तक फैला आस्था ट्विन सिटी अपार्टमेंट आज तकनीकी नवीनता और मॉडर्न लाइफस्टाइल के लिए बड़ा नाम बना रहा है। लेकिन हाल के दिनों में यहां रहने वाले सैकड़ों परिवारों की नाराजगी ने इसी “आधुनिक सिटी” की तस्वीर बदलकर रख दी है। फ्लैट खरीदने के लिए लोगों ने अपनी जमा‑पूंजी और बैंक लोन तक जमा कर दिए, लेकिन बदले में उन्हें पूरी कीमत पर अधूरी सुविधाएं और ठीक‑ठाक बुनियादी व्यवस्थाएं नहीं मिल पा रहीं।

आस्था ट्विन सिटी में फंसी जिंदगी
आस्था ट्विन सिटी Jamshedpur के बिरसानगर/टेल्को क्षेत्र में स्थित एक बड़ा रेडी‑टू‑मूव रिहायशी प्रोजेक्ट है, जहां बड़ी संख्या में परिवार फ्लैट खरीदकर बस गए हैं। निवासियों का कहना है कि बिल्डर और अपार्टमेंट प्रबंधन ने भरपूर विज्ञापनों के जरिए बढ़‑चढ़कर सुविधाओं का वादा किया था, जिनमें लिफ्ट, बिजली, पानी, गार्ड, सीसीटीवी, गार्डन, खेल के मैदान और सुरक्षित गेट जैसे बुनियादी बिंदु शामिल थे।
लेकिन असल जिंदगी में यही सुविधाएं या तो अधूरी हैं या लगातार खराब हो रही हैं, जिससे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। लोगों का गुस्सा इस बात से और बढ़ रहा है कि वे नियमित रूप से मेंटेनेंस शुल्क, बिजली और पानी के बिल भी अच्छे‑खासे देते हैं, फिर भी व्यवस्थाएं उसी स्तर की नहीं रहतीं।
क्या है मुख्य समस्याएं?
स्थानीय निवासियों और समाचार रिपोर्ट्स के अनुसार, आस्था ट्विन सिटी में रहने वाले लगभग 700 परिवार लंबे समय से निम्न समस्याओं से जूझ रहे हैं:
- बिजली की नियमित कटौती और गर्मियों में रोजाना लोड‑शेडिंग, जिससे कूलिंग और बेसिक उपकरण काम नहीं कर पाते।
- पानी की अनियमित आपूर्ति, टैंक भरे नहीं होना या दूषित/कम दबाव से आना, जिससे रसोई और स्नान दोनों में दिक्कत होती है।
- लिफ्ट की खराब स्थिति, जिससे ऊपरी मंजिलों में रहने वाले बुजुर्गों और छोटे बच्चों की लगातार तकलीफ है।
- गेट, गार्ड और सीसीटीवी तंत्र में लापरवाही, जिससे सुरक्षा को लेकर लोगों के मन में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
इन सभी बातों को लेकर लोगों का यह भी आरोप है कि जिन सुविधाओं का विक्रेता ने ब्रोशर और विज्ञापनों में विस्तार से जिक्र किया था, वे अभी तक वादे के अनुरूप नहीं दिखाई दे रहीं।
Jamshedpur निवासियों के गंभीर आरोप
आस्था ट्विन सिटी के निवासी बिल्डर और प्रबंधन पर तीन बड़े आरोप लगाते हैं:
- वादे के अनुरूप सुविधाएं न देना
लोगों का कहना है कि बिक्री के समय उन्हें 5‑स्टार शैली की सुविधाएं और “सभी सुविधाओं से युक्त लाइफस्टाइल” का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में यह देखना पड़ा कि वादों का पालन नहीं हुआ और कई चीजें बाद में “फ्यूचर प्लानिंग” में धकेल दी गईं। - निर्माण और रखरखाव में लापरवाही
निवासियों का आरोप है कि निर्माण के दौरान उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री और उचित इंजीनियरिंग का ध्यान नहीं रखा गया, जिससे लिफ्ट, पाइपलाइन, बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्रेनेज जैसे हिस्सों पर बार‑बार समस्या आती है। - शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई न करना
लोगों ने बताया कि उन्होंने बार‑बार लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, कई बैठकें भी बुलाईं, लेकिन प्रबंधन की ओर से जवाबात्मक या ठोस कदम नहीं देखने को मिले। “100 प्रतिशत मेंटेनेंस नहीं होने” का बहाना बनाकर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है, जबकि वे नियमित रूप से शुल्क जमा कर रहे हैं।
विरोध का स्वर कैसे तेज हुआ?
लगातार बिजली, पानी और लिफ्ट की समस्या से परेशान होकर आस्था ट्विन सिटी के निवासियों ने हाल ही में विरोध प्रदर्शन किया। शुक्रवार को एक बड़ा समूह मुख्य गेट पर जमा हो गया और गेट जाम कर मांग की कि बिजली, पानी और लिफ्ट की व्यवस्था तुरंत ठीक की जाए। इस दौरान लोगों ने बिल्डर और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने स्पष्ट किया कि अगर अगले कुछ दिनों में ठोस सुधार नहीं दिखता, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे, जिसमें शायद प्रशासन के दरवाजे पर धरना या उपभोक्ता आयोग से लेकर न्यायालय तक का रास्ता अपनाना भी शामिल हो सकता है। उनका तर्क है कि वे न केवल बड़ी रकम देकर घर खरीदे हैं, बल्कि अपने परिवारों की गुणवत्तापूर्ण जिंदगी का सपना भी इसी प्रोजेक्ट में जोड़ा है।
विशेषज्ञ और कानूनी दृष्टिकोण
Jamshedpur शहरी विकास और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी हाउसिंग प्रोजेक्ट में बिल्डर या प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है कि वे जो सुविधाएं विज्ञापन या अनुबंध में वादा करते हैं, वे उन्हें समय पर और व्यवस्थित तरीके से प्रदान करें। अगर ऐसा नहीं होता है, तो निवासियों को उपभोक्ता आयोग, राज्य आवास विकास प्राधिकरण, या न्यायालय में याचिका दायर करने का अधिकार है।
कई उदाहरणों में देखा गया है कि समूह के रूप में उपभोक्ताओं की शिकायतें अधिक असर डालती हैं और विभागों को जरूरी















