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इंडिया Pharma 2026 – भारत को वैश्विक फार्मा नवाचार केंद्र बनाने की दिशा

On: April 11, 2026 4:59 PM
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भारत: इंडिया Pharma 2026 सिर्फ एक और फार्मा सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र के भविष्य को नया आकार देने वाला मंच है। 13–14 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाला यह 9वां संस्करण औषध विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, फिक्‍की (FICCI) और इंडियन Pharma फार्मास्युटिकल एलायंस (IPA) के सहयोग से हो रहा है। इसका विषय है – “भारत में खोजें: जीवन विज्ञान नवाचार में अभूतपूर्व प्रगति”, जिसके तहत भारत को “वैश्विक फार्मा नवाचार केंद्र” बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा होगी। इस ब्लॉग में हम इंडिया फार्मा 2026 के नीति, नवाचार, उद्योग और वैश्विक सहयोग से जुड़े पहलुओं को आसान भाषा में समझेंगे।

इंडिया Pharma 2026 क्या है और इसका उद्देश्य

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इंडिया Pharma , भारत सरकार के औषध विभाग की एक फ्लैगशिप घटना है, जो हर साल फार्मास्युटिकल नीतियों, नियमों, निर्यात और नवाचार पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा करती है। 2026 का यह 9वां संस्करण फेडरेशन हाउस, नई दिल्ली में 13–14 अप्रैल को हो रहा है और इसका उद्घाटन केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा और राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल करेंगी।

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है:

  • भारत की औषध उत्पादन और R&D (अनुसंधान एवं विकास) क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना।
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और भारत को निर्भरता के बजाय नवाचार पर आधारित भागीदार बनाना।
  • देश के फार्मा सेक्टर को अब सिर्फ “मात्रा–आधारित” उद्योग से बाहर निकालकर एक मूल्य‑आधारित और नवाचार‑आधारित वैश्विक शक्ति के रूप में परिवर्तित करने की दिशा में कदम बढ़ाना।

विषय और दृष्टिकोण – “भारत में खोजें”

2026 के इंडिया Pharma का विषय “भारत में खोजें: जीवन विज्ञान नवाचार में अभूतपूर्व प्रगति” है। यह भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है कि भविष्य की दवा उद्योग की राह मात्र बड़े‑बड़े जेनेरिक उत्पादन की नहीं, बल्कि नए दवा अणुओं, जैव‑औषध (बायोलॉजिक्स), बायोसिमिलर्स और डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी पर बनेगी।

इस दृष्टिकोण से जोड़े गए उद्देश्य हैं:

  • स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना – खासकर कम आय वाले देशों में किफायती दवाओं की आपूर्ति जारी रखना।
  • आर्थिक विकास को बढ़ाने – फार्मा और मेडटेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देकर रोजगार और निर्यात दोनों बढ़ाना।
  • वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना – महामारी जैसी स्थितियों में भी भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला बनाना।

नीति निर्माता, वैश्विक नेता और उद्योग का बड़ा जमावड़ा

इंडिया Pharma 2026 एक लाइव जीवन विज्ञान संवाद का प्लेटफॉर्म है, जिसमें नीति निर्माता, वैश्विक फार्मा नेता, शोधकर्ता और नवाचारकर्ता एक साथ जुड़ते हैं।

कुछ प्रमुख भागीदार इस तरह हैं:

  • सरकारी और नीति स्तर:
    • श्री मनोज जोशी – सचिव, औषध विभाग
    • श्रीमती पुण्या सलीला श्रीवास्तव – सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
    • प्रोफेसर विनोद के. पॉल – नीति आयोग सदस्य, जो स्वास्थ्य और नवाचार पर अहम भूमिका निभा रहे हैं।
    • डॉ. रेणु स्वरूप (पूर्व सचिव, बायोटेक विभाग) और डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन (सीईओ, नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) जैसे शोध‑नेता।
  • नियामक और वैश्विक मानक:
    • डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी – ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI)
    • डॉ. ए. विसाला – जॉइंट ड्रग कंट्रोलर, इंडिया (CDSCO)
    • श्री ग्रेगरी स्मिथ – यूएस एफडीए, इंडिया कंट्री डायरेक्टर
      ये वक्ता भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय ड्रग नियमों, गुणवत्ता मानकों और अनुपालन प्रणालियों पर गहरी चर्चा करेंगे।
  • बड़े फार्मा‑घराने और उद्योग नेता:
    • श्री दिलीप संघवी – सन फार्मा
    • श्री पंकज पटेल – ज़ाइडस लाइफसाइंसेज
    • श्री अर्जुन जुनेजा – मैनकाइंड फार्मा (FICCI फार्मा कमेटी हेड)
    • श्री अचिन गुप्ता – सिप्ला लिमिटेड (वैश्विक सीईओ)
    • श्री विंसलो टकर – एली लिली एंड कंपनी (इंडिया)
    • श्री कार्तिक राजेंद्रन – एबॉट इंडिया
      ये नेता भारत की वैश्विक फार्मा मान्यता, निर्यात संभावनाएं और नवीन तकनीकी निवेश पर अपने विचार रखेंगे।

प्रमुख सत्र जहां नवाचार की नीति तय होती है

इंडिया Pharma 2026 का कार्यक्रम दो दिनों में छह प्रमुख पूर्ण सत्रों और एक विशेष सत्र “स्टार्ट‑अप शोकेस” के साथ आयोजित होगा।

1. नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत दिशा–निर्देश

इस सत्र में सरकारी नीतियों पर चर्चा होगी, जैसे:

  • अनुसंधान‑प्रोत्साहन योजनाएं (रिसर्च ग्रांट, टैक्स छूट, IP संरक्षण)।
  • नई दवा अनुमोदनों की प्रक्रिया में गति लाने के उपाय।
  • अकादमिक‑उद्योग सहयोग को बढ़ावा देने की रणनीतियां।

2. नियामक तंत्र को सक्षम बनाना

भारतीय ड्रग नियमन (CDSCO, DCGI) और अंतर्राष्ट्रीय नियामकों के बीच समन्वय पर चर्चा होगी। इसमें हर्ष अनुमोदन, डिजिटल सबमिशन, बायोलॉजिक्स और एडवांस्ड थेरेपी के लिए नए गाइडलाइन शामिल होंगे।

3. AI और नई तकनीकों का उपयोग

इस सत्र में जोर रहेगा:

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और
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