
जमशेदपुर: जनता दल ने BPM मध्य विद्यालय के शिक्षकों के तीन माह से लंबित वेतन भुगतान के मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मंगलवार को जदयू बर्मामाइंस मंडल अध्यक्ष बबलू कुमार सिंह के नेतृत्व में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों के अप्रैल, मई और जून 2026 के वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल में जदयू जिला उपाध्यक्ष दुर्गा राव, अर्जुन मुखी सहित कई कार्यकर्ता शामिल थे। नेताओं ने कहा कि शिक्षकों का वेतन सरकार द्वारा जारी किए जाने के बावजूद अब तक उनके खातों में नहीं पहुंचा है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने जारी कर दी राशि फिर भी नहीं मिला वेतन
ज्ञापन में बताया गया कि BPM मध्य विद्यालय एक एडेड विद्यालय है, जहां शिक्षकों के वेतन की राशि सरकार द्वारा विद्यालय के सचिव के खाते में भेजी जाती है। इसके बाद संबंधित राशि शिक्षकों के व्यक्तिगत खातों में स्थानांतरित की जाती है।
जदयू नेताओं का कहना है कि अप्रैल, मई और जून 2026 का वेतन सरकार द्वारा जारी कर विद्यालय के सचिव के खाते में भेज दिया गया है। इसके बावजूद तीन माह बीत जाने के बाद भी शिक्षकों को उनका वेतन प्राप्त नहीं हुआ है। यह स्थिति न केवल शिक्षकों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
नेताओं ने कहा कि जब वेतन की राशि पहले से उपलब्ध है, तब भुगतान में देरी का कोई औचित्य नहीं बनता। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
पुरानी प्रबंधन समिति भंग शिक्षा विभाग के अधीन विद्यालय संचालन
जदयू द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 24 अप्रैल 2026 को जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा विद्यालय की पुरानी प्रबंधन समिति को भंग कर दिया गया था। इसके बाद विद्यालय का संचालन शिक्षा विभाग के अधीन कर दिया गया।
वर्तमान में क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी को समिति का अध्यक्ष तथा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में विद्यालय से संबंधित प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर है।
जदयू नेताओं का कहना है कि जब विद्यालय का संचालन सीधे शिक्षा विभाग के नियंत्रण में है, तब शिक्षकों के वेतन भुगतान में हो रही देरी को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
बैंक खाता फ्रीज होने के तर्क पर उठाए सवाल
वेतन भुगतान में देरी के संबंध में जब संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगी गई, तो बताया गया कि बैंक द्वारा विद्यालय की पुरानी समिति के खाते को फ्रीज कर दिया गया है। इसी कारण भुगतान प्रक्रिया बाधित हो रही है।
हालांकि जदयू नेताओं ने इस तर्क पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब 24 अप्रैल 2026 को पुरानी समिति को भंग कर दिया गया था, तो उसके बाद बैंक खाते को फ्रीज करने की नौबत कैसे आई?
उन्होंने पूछा कि यदि समिति पहले ही अस्तित्व में नहीं थी, तो शिक्षा विभाग ने समय रहते बैंक में नए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं का नाम अपडेट क्यों नहीं कराया? यदि यह प्रक्रिया समय पर पूरी कर ली जाती तो आज शिक्षकों को वेतन के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता।
शिक्षा विभाग की निष्क्रियता पर जदयू का आरोप
जदयू नेताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग इस मामले में पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। उनका कहना है कि यदि क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक चाहें तो बैंक को आवश्यक निर्देश देकर भुगतान प्रक्रिया को तत्काल पूरा कराया जा सकता है।
लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी द्वारा ठोस पहल नहीं की गई है। इसका खामियाजा विद्यालय के शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। कई शिक्षक अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकारी अधिकारियों की उदासीनता के कारण शिक्षकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
पूर्व में भी हुआ था ऐसा विवाद, तब हुआ था समाधान
जदयू नेताओं ने बताया कि इससे पहले भी विद्यालय से संबंधित मामला न्यायालय में लंबित रहा था। उस समय भी वेतन भुगतान को लेकर समस्या उत्पन्न हुई थी।
लेकिन जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा बैंक को आवश्यक पत्र जारी किए जाने के बाद शिक्षकों का वेतन भुगतान संभव हो पाया था। इससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर उचित पहल की जाए तो समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
नेताओं ने कहा कि वर्तमान मामले में भी उसी प्रकार की कार्रवाई की आवश्यकता है। यदि शिक्षा विभाग तत्परता दिखाए तो शिक्षकों का लंबित वेतन तुरंत जारी किया जा सकता है।
आर्थिक संकट से जूझ रहे शिक्षक
तीन माह से वेतन नहीं मिलने के कारण विद्यालय के शिक्षक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। अधिकांश शिक्षकों की मासिक आय का प्रमुख स्रोत उनका वेतन ही होता है। ऐसे में लगातार तीन माह तक वेतन न मिलने से परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।
शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च, चिकित्सा, बैंक ऋण और अन्य आर्थिक दायित्वों का निर्वहन करने में परेशानी हो रही है। जदयू नेताओं ने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके साथ इस प्रकार की उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षकों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया गया तो इसका असर उनके मनोबल पर पड़ेगा, जिससे शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होगी।
विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा असर
जदयू का कहना है कि वेतन भुगतान में देरी केवल शिक्षकों की व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
आर्थिक तनाव और अनिश्चितता की स्थिति में शिक्षकों के लिए पूरी एकाग्रता के साथ शिक्षण कार्य करना कठिन हो जाता है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग को इस विषय को संवेदनशीलता के साथ लेना चाहिए, क्योंकि यह मामला केवल वेतन भुगतान का नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
उपायुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
जदयू प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मांग की कि वे मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप करें। साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर शिक्षकों के अप्रैल, मई और जून 2026 के लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराएं।
पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो शिक्षकों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। इसलिए प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाना चाहिए।
BPM मध्य विद्यालय के शिक्षकों के तीन माह से लंबित वेतन भुगतान का मामला अब प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सरकार द्वारा राशि जारी किए जाने के बावजूद शिक्षकों को वेतन न मिलना चिंता का विषय है। जनता दल (यूनाइटेड) ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए जिला प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो शिक्षकों की आर्थिक परेशानियां और बढ़ सकती हैं, जिसका प्रभाव विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।












































