
GATE 2026 झारखण्ड के पश्चिम सिंहभूम के छोटे‑से शहर चक्रधरपुर की शिक्षा‑दुनिया ने एक बार फिर देशभर में अपना नाम दर्ज कराया है। टोकलो रोड स्थित “प्रेरणा केरियर इंस्टीट्यूट, चक्रधरपुर” के छात्र हर्ष विश्वकर्मा ने अभियांत्रिकी स्नातक अभिक्षमता परीक्षा (GATE 2026) में वाकई शानदार प्रदर्शन किया है और पूरे भारत में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 7 हासिल करके न केवल चक्रधरपुर, बल्कि पूरे झारखण्ड का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि के बाद संस्थान ने उनके सम्मान में एक विशेष समारोह भी आयोजित किया, जहाँ उनके परिवार और गुरुजनों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

GATE 2026 में हर्ष विश्वकर्मा का अद्भुत प्रदर्शन
हर्ष विश्वकर्मा ने GATE 2026 परीक्षा में कुल 100 अंकों में से 75.67 अंक प्राप्त किए और GATE स्कोर 992 बनाकर देशभर में बेहद ऊँची रैंक अर्जित की। इस परीक्षा में कुल मिलाकर 23,513 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से हर्ष विश्वकर्मा ने ऑल इंडिया रैंक 7 (AIR 7) हासिल कर अपना दृढ़ संकल्प और लगन की जानकारी दी।
आईआईटी गुवाहाटी द्वारा जारी GATE 2026 के लिए अपनाई गई तकनीकी रैंकिंग‑प्रणाली और COAP (Centralized Counseling for Advanced Postgraduate Programs) व्यवस्था के माध्यम से इस तरह की रैंक भारत के शीर्ष IITs (जैसे IIT बॉम्बे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर, खड़गपुर आदि) में एम.टेक प्रोग्राम के लिए लगभग निश्चित‑प्रवेश जैसा ही मानी जाती है। विशेष रूप से बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग में यह रैंक चयन‑प्रक्रिया में सबसे ऊपरी विकल्प देती है, जिससे हर्ष के लिए आईआईटी बॉम्बे जैसे संस्थानों में अपना एम.टेक‑कोर्स आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।
शिक्षा‑यात्रा 10वीं से लेकर बी.टेक और GATE तक
हर्ष विश्वकर्मा का जन्म‑स्थान चक्रधरपुर के संतोषी मंदिर क्षेत्र में है। उनके पिता उत्तम कुमार विश्वकर्मा और माता चंद्रकला शर्मा की देख‑रेख और समर्थन ने उनकी शिक्षा‑यात्रा में बड़ी भूमिका निभाई है।
- 10वीं की परीक्षा झारखण्ड एकेडेमिक काउंसिल (जैक बोर्ड) से किया,
- 11वीं और 12वीं की विज्ञान (सीबीएसई बोर्ड) की तैयारी प्रेरणा केरियर इंस्टीट्यूट चक्रधरपुर से की,
- फिर बाद में बी.टेक – बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेहरा, रांची से पूरी की।
यह दिखाता है कि उनकी सफलता अचानक नहीं आई, बल्कि 10वीं से लेकर इंजीनियरिंग और GATE तक लगातार दृढ़ योजना और कड़ी मेहनत का नतीजा है।

GATE 2026 प्रेरणा केरियर इंस्टीट्यूट चक्रधरपुर की भूमिका
GATE 2026 प्रेरणा केरियर इंस्टीट्यूट चक्रधरपुर को लगातार 9 वर्षों से 10वीं और 12वीं के परीक्षा‑परिणामों में शत‑प्रतिशत उत्तीर्णता के लिए जाना जाता है, जिसमें अधिकांश छात्र प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होते हैं। हर्ष विश्वकर्मा भी इसी संस्थान से 10वीं, 11वीं और 12वीं की विज्ञान‑कोचिंग कर चुके हैं, जहाँ उनके गणित के शिक्षक रहे संस्थान के निदेशक हिमांशु प्रधान की मार्गदर्शक भूमिका ने उनके विज्ञान और गणित के आधार को मजबूत बनाया।
इसी कड़ी में हर्ष ने अपने पूर्व गणित शिक्षक हिमांशु प्रधान से मिलने संस्थान भी पहुँचे थे, जहाँ उनकी उपलब्धि के बारे में सुनने और उनकी मेहनत को सलाम करने के लिए संस्थान परिवार ने एक विशेष सम्मान‑समारोह का आयोजन किया।
GATE 2026 सम्मान समारोह और भविष्य की योजना
GATE 2026 सम्मान समारोह के दौरान संस्थान के निदेशक हिमांशु प्रधान ने हर्ष विश्वकर्मा और उनके पिता उत्तम विश्वकर्मा को संस्थान का प्रतीक‑चिन्ह (प्रतीक‑स्मारिका) भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर निदेशक ने हर्ष को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वे उनके उज्जवल भविष्य की आशा करते हैं और उन्हें देश के शीर्ष आईआईटी में उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए आशीर्वाद दिया।
हर्ष विश्वकर्मा अब अपना अगला कदम आईआईटी बॉम्बे में एम.टेक (M.Tech) इन बायोटेक्नोलॉजी में उच्च‑शिक्षा पूरी करने की दिशा में उठाना चाहते हैं, जो उनके वैज्ञानिक मनोविज्ञान, अनुसंधान‑रुचि और देश की बढ़ती जैव‑तकनीकी ज़रूरतों के साथ बेहद संगत दिखता है।
GATE 2026 हर्ष विश्वकर्मा की यह उपलब्धि सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि चक्रधरपुर और पूरे पश्चिम सिंहभूम जिले के बच्चों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। यह दिखाता है कि छोटे शहर में भी अगर लगन, सही दिशा और मेहनत हो, तो देश के शीर्ष IITs में जगह बनाना कोई सपना नहीं बल्कि संभव योजना बन जाती है। GATE 2026 में AIR 7 जैसी रैंक ने हर्ष को न केवल उच्च शिक्षा के दरवाजे खोले, बल्कि उन्हें एक ऐसा रोल मॉडल बना दिया है, जो आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि लक्ष्य स्पष्ट रखो, योजना बनाओ और रोज‑रोज की मेहनत से बड़े‑बड़े सपने पूरे कर सकते हैं। GATE 2026 चाहे वह प्रेरणा केरियर इंस्टीट्यूट चक्रधरपुर जैसी संस्थानों का योगदान हो या परिवार का सहयोग, हर्ष की कहानी यह साबित करती है कि जिला‑स्तर से शुरू हुई मेहनत भी देश‑स्तरीय गौरव बन जाती है।











