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खर्च सीमा तय: मेयर 25 लाख और पार्षद 5 लाख तक ही कर सकेंगे चुनावी खर्च- Jharkhand Municipal Elections 2026

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On: January 18, 2026 12:20 PM
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Jharkhand municipal elections 2026 : झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग अब अपनी तैयारियों को अंतिम चरण में ले आया है। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और अनुशासित बनाने के लिए आयोग ने प्रत्याशियों के खर्च को नियंत्रित करने हेतु चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा तय कर दी है। यह फैसला चुनाव में धनबल के बढ़ते प्रभाव को रोकने और सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। आयोग का स्पष्ट कहना है कि नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

मुख्य आदेश और नियम

1) चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा तय

आयोग ने तय किया है कि अब नगर निकाय चुनाव में प्रत्याशी तय सीमा से अधिक खर्च नहीं कर सकेंगे।

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर चुनाव में ज्यादा पैसा खर्च करने वाले उम्मीदवारों को बढ़त मिल जाती है। खर्च सीमा तय होने से सामान्य और मध्यम वर्गीय प्रत्याशियों को भी चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही चुनाव प्रचार के दौरान फिजूलखर्ची पर रोक लगेगी। आयोग का उद्देश्य साफ है—चुनाव में धनबल नहीं, जनबल प्रभावी हो।

2) 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगम में मेयर 25 लाख तक खर्च कर सकेंगे

10 लाख से ज्यादा आबादी वाले नगर निगम में मेयर प्रत्याशी के लिए खर्च सीमा ₹25 लाख तय की गई है।

बड़े नगर निगमों में चुनाव क्षेत्र विशाल होता है, इसलिए प्रचार-प्रसार के लिए खर्च भी अधिक होता है। इसीलिए आयोग ने जनसंख्या के आधार पर खर्च की सीमा तय की है। ₹25 लाख की सीमा तय होने से उम्मीदवारों को प्रचार की सुविधा भी मिलेगी और खर्च पर नियंत्रण भी रहेगा। आयोग का मानना है कि इससे चुनाव अधिक संतुलित और निष्पक्ष बनेंगे।

3) पार्षद प्रत्याशी अधिकतम 5 लाख तक खर्च कर सकेंगे

दस लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगम में पार्षद प्रत्याशी ₹5 लाख तक ही खर्च कर सकेंगे।

वार्ड स्तर के चुनावों में अत्यधिक खर्च की जरूरत नहीं होती, फिर भी कई जगह अनावश्यक पैसा बहाया जाता है। ₹5 लाख की सीमा लागू होने से प्रचार सीमित और व्यवस्थित होगा। इससे बड़े-बड़े खर्चे, भीड़ जुटाने की राजनीति और अनावश्यक दिखावे पर भी रोक लगेगी। आयोग की मंशा यह भी है कि पार्षद चुनाव में जनता और मुद्दों की चर्चा ज्यादा हो।

4) जनसंख्या के आधार पर निकायों के लिए अलग-अलग खर्च सीमा

नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के लिए अलग-अलग खर्च सीमा निर्धारित की गई है।

झारखंड के हर नगर निकाय की जनसंख्या और क्षेत्रफल अलग-अलग है, इसलिए सबके लिए एक समान खर्च सीमा लागू करना व्यावहारिक नहीं होता। आयोग ने इसी वजह से निकायों को वर्गीकृत किया है। इससे जहां बड़े शहरों में चुनाव संचालन आसान होगा, वहीं छोटे निकायों में अनावश्यक खर्च को रोका जा सकेगा। यह व्यवस्था चुनाव को अधिक वैज्ञानिक और न्यायपूर्ण बनाएगी।

5) चुनाव खत्म होने के 30 दिन के अंदर खर्च का हिसाब देना अनिवार्य

चुनाव समाप्ति के 30 दिन के भीतर हर प्रत्याशी को रिटर्निंग ऑफिसर को खर्च का विवरण देना होगा।

यह नियम जवाबदेही तय करने के लिए बेहद जरूरी है। अक्सर चुनाव में पैसा खर्च तो होता है, लेकिन उसका हिसाब-किताब नहीं दिया जाता। अब समय-सीमा तय होने से प्रत्याशियों पर दबाव रहेगा कि वे पारदर्शिता रखें। इससे आयोग को यह जांचने में आसानी होगी कि खर्च तय सीमा के भीतर हुआ या नहीं। जनता का भी विश्वास बढ़ेगा कि चुनाव सही तरीके से हो रहा है।

6) निर्वाचन अभिकर्ता को खर्च का हिसाब रखना होगा

प्रत्याशी द्वारा नियुक्त निर्वाचन अभिकर्ता को खर्च के पूरे लेखे-जोखे की जिम्मेदारी दी गई है।

चुनावी खर्च कई तरह के मदों में होता है—प्रचार सामग्री, वाहन, सभाएं, कार्यकर्ता, सोशल मीडिया आदि। ऐसे में प्रत्याशी खुद हर खर्च का हिसाब नहीं रख पाता। इसलिए निर्वाचन अभिकर्ता को यह जिम्मेदारी सौंपना एक बेहतर और प्रैक्टिकल कदम है। इससे रिकॉर्ड व्यवस्थित रहेगा और जांच के दौरान गड़बड़ी की संभावना कम होगी।

7) 30 दिन में खर्च नहीं बताया तो सदस्यता रद्द, 3 साल तक प्रतिबंध

यदि जीतने वाला प्रत्याशी 30 दिन के भीतर हिसाब नहीं देता तो उसकी सदस्यता रद्द होगी और 3 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगेगी।

यह प्रावधान आयोग की सख्ती को दर्शाता है। आम तौर पर लोग जीतने के बाद नियमों को हल्के में लेने लगते हैं, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं होगा। सदस्यता रद्द होने का मतलब है कि जीतने के बाद भी कुर्सी बचना मुश्किल हो जाएगा। 3 साल प्रतिबंध का उद्देश्य यह है कि कोई भी उम्मीदवार नियम तोड़ने का साहस न करे। यह नियम चुनाव व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

8) सरकारी भवनों पर झंडा-बैनर लगाया तो FIR

यदि कोई प्रत्याशी सरकारी भवनों पर प्रचार सामग्री लगाता है तो FIR दर्ज की जाएगी।

सरकारी संपत्ति जनता की होती है और उसका चुनाव प्रचार में इस्तेमाल गलत माना जाता है। कई बार सरकारी भवनों की दीवारों पर पोस्टर-बैनर से सरकारी संपत्ति खराब होती है। इसलिए आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब ऐसे मामलों में सीधा कानूनी एक्शन होगा। इससे सरकारी भवनों की गरिमा बनी रहेगी और चुनावी प्रचार की मर्यादा भी सुरक्षित रहेगी।

9) निजी भवनों पर बैनर लगाने के लिए लिखित सहमति जरूरी

निजी भवनों में बैनर/झंडा लगाने के लिए भवन मालिक से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है।

अक्सर चुनाव के समय निजी घरों, दुकानों और दीवारों पर जबरन प्रचार सामग्री लगा दी जाती है, जिससे विवाद भी बढ़ते हैं। आयोग का यह नियम निजी संपत्ति के अधिकारों की रक्षा करेगा। लिखित सहमति से यह स्पष्ट रहेगा कि प्रचार सामग्री मालिक की अनुमति से लगी है। इससे झगड़े, मारपीट और शिकायतों में भी कमी आएगी।

📌 विशेष बिंदु (Quick Highlights)

✅ खर्च सीमा तय: चुनाव में धनबल पर नियंत्रण
✅ मेयर: ₹25 लाख (10 लाख+ आबादी वाले नगर निगम में)
✅ पार्षद: ₹5 लाख
✅ 30 दिन में खर्च का हिसाब जमा करना जरूरी
✅ हिसाब नहीं दिया: सदस्यता रद्द + 3 साल चुनाव प्रतिबंध
✅ सरकारी भवनों पर प्रचार सामग्री: FIR
✅ निजी भवनों पर प्रचार सामग्री: लिखित सहमति अनिवार्य

राज्य निर्वाचन आयोग का यह फैसला झारखंड नगर निकाय चुनाव को अनुशासित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। खर्च सीमा तय होने से धनबल के प्रभाव पर लगाम लगेगी और चुनाव में वास्तविक मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही खर्च का हिसाब देने तथा सरकारी भवनों पर प्रचार सामग्री पर प्रतिबंध जैसे नियम यह सुनिश्चित करेंगे कि चुनाव कानून के दायरे में रहकर ही लड़े जाएं।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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