
जमशेदपुर: NI एक्ट (NI Act – Negotiable Instruments Act) से जुड़े मामलों को जल्द से जल्द और दोस्ताना ढंग से निपटाया जाए। इसी उद्देश्य से आगामी 25 अप्रैल 2026 को जमशेदपुर के व्यवहार न्यायालय में स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, और इसे लेकर आज एक अति आवश्यक बैठक की गई।

इस ब्लॉग में हम सरल हिंदी में समझेंगे कि यह स्पेशल लोक अदालत क्या है, क्यों ज़रूरी है, किन‑किन लोगों को इससे फ़ायदा मिलेगा, और आप खुद इसमें कैसे जुड़ सकते हैं।
बैठक का मकसद अधिक से अधिक मामले निपटाना
जमशेदपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DALSA) के अध्यक्ष अरविंद कुमार पांडेय की अध्यक्षता में आज उनके चैम्बर में एक विशेष बैठक आयोजित की गई।
बैठक का मुख्य लक्ष्य था –
- 25 अप्रैल 2026 को होने वाली स्पेशल लोक अदालत के लिए रणनीति तय करना।
- एन आई एक्ट से संबंधित अधिक से अधिक मामलों को लोक अदालत के ज़रिए निष्पादित कराना।
जिला जज अरविंद कुमार पांडेय ने स्पष्ट रूप से जोर देते हुए कहा कि इस लोक अदालत में “अधिक से अधिक एन आई एक्ट मामलों का निष्पादन” होना चाहिए और जिले के सभी पक्षकारों को इस अवसर का फ़ायदा उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
कौन‑कौन उपस्थित थे बैंक, लॉयर और अधिकारी
बैठक में सिर्फ जज ही नहीं थे, बल्कि उसमें विभिन्न बैंकों के अधिकारी, पैनल लॉयर्स (जिले के पैनल वकील) और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DALSA) के सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी भी मुख्य रूप से शामिल थे।
इनकी मौजूदगी का एक साफ मतलब है –
- बैंकों को चाहिए था कि उनके चेक बाउंस या लोन‑संबंधी लंबित मामले जल्द निपटें।
- पैनल लॉयर्स को जरूरत थी कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार अपने मुवक्किलों को लोक अदालत में लाया जाए, ताकि आपसी समझौते से केस बंद हो सकें।
DALSA सचिव की उपस्थिति इस बात की गारंटी देती है कि प्रक्रिया पारदर्शी, नियमानुसार और आम जनता के लिए सुविधाजनक रहेगी।
स्पेशल लोक अदालत NI एक्ट और चेक बाउंस पर फोकस
यहां थोड़ी सी बेसिक जानकारी भी ज़रूरी है –
- एन आई एक्ट (Negotiable Instruments Act, 1881) वह कानून है जो चेक, बिल ऑफ़ एक्सचेंज और प्रोमिसरी नोट जैसे “परिवर्तनीय लिखत” को नियंत्रित करता है।
- अक्सर लोग ऐसे चेक बाउंस मामलों (धारा 138 NI Act) के लिए कोर्ट जाते हैं, जिनमें आर्थिक दावे और कानूनी दावे दोनों जुड़े होते हैं।
इन्हीं मामलों को निपटाने के लिए 25 अप्रैल को व्यवहार न्यायालय परिसर में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है।
इसमें मुख्यतः
- चेक बाउंस के मामले,
- बैंक‑लोन या हुंड़ी‑चेक विवाद,
- और अन्य NI Act से जुड़े व्यवसायिक दावों
को आपसी समझौते (मिडिएशन‑जैसा तरीक़ा) के ज़रिए बंद किया जाएगा।

क्यों ज़रूरी है यह लोक अदालत?
आम लोग अक्सर सोचते हैं – “क्यों लोक अदालत में जाना, जब फैसला तो न्यायालय ही देगा?” लेकिन इसके कई फ़ायदे हैं:
- समय और पैसे की बचत
- लोक अदालत में मामले जल्द निपटते हैं, क्योंकि दोनों पक्ष आपस में समझौता करते हैं।
- आम तौर पर अदालती लंबित मामलों में सालों तक फैसले रुक जाते हैं, लेकिन लोक अदालत में days या weeks में बात तय हो जाती है।
- रिश्तों में कम दरार
- अदालत में आमतौर पर एक पक्ष “जीतता है”, दूसरा “हारता है”, जिससे रिश्ते बिगड़ जाते हैं।
- लोक अदालत में दोनों पक्ष मिल‑बैठकर डील फाइनल करते हैं, जिससे व्यापारिक और निजी रिश्ते बचे रहते हैं।
- निर्णय भी एनफोर्स हो सकता है
- ज़्यादातर राज्यों में लोक अदालत में NI Act के तहत हुए समझौते को दीवानी न्यायालय द्वारा निष्पादन‑योग्य माना जाता है, यानी अगर कोई पक्ष डील तोड़ता है तो उसके खिलाफ वसूली की कार्रवाई की जा सकती है।
जमशेदपुर के जिला जज भी इन बातों को जानते हैं, इसीलिए उनका ज़ोर “अधिक से अधिक मामले लोक अदालत में लाने” पर है।
जनता के लिए संदेश आप क्या कर सकते हैं?
अगर आपके पास भी कोई NI Act‑संबंधी मामला है (जैसे चेक बाउंस, बैंक‑लोन विवाद या चेक‑हुंडी–प्रोमिसरी नोट वाला झगड़ा), तो आप अपने वकील से संपर्क करके इस स्पेशल लोक अदालत में शामिल हो सकते हैं।
आमतौर पर ऐसे कदम उठाए जाते हैं
- अपने वकील या बैंक से जानकारी लेना कि आपका मामला लोक अदालत में ले जाया जा सकता है या नहीं।
- अगर हां, तो जल्द से जल्द नोटिस या अर्जी तैयार करा लेना, ताकि 25 अप्रैल वाली लोक अदालत में दोनों पक्ष मौजूद रहें।
- खुद को समझौते के मूड में रखना – अगर आप थोड़ी‑सी रियायत देकर जल्द बात निकाल सकते हों, तो लोक अदालत आदर्श जगह है।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर के अध्यक्ष अरविंद कुमार पांडेय की अध्यक्षता में आगामी 25 अप्रैल 2026 को व्यवहार न्यायालय में एन आई एक्ट पर होने वाले स्पेशल लोक अदालत को लेकर आज प्रधान जिला जज के चैम्बर में एक अति आवश्यक बैठक का आयोजन किया गया ।
बैठक में बैंक के अधिकारियों के साथ पैनल लॉयर्स एवं डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी मुख्य रूप से उपस्थित रहे । जिला जज अरविंद कुमार पांडेय ने स्पेशल लोक अदालत में अधिक से अधिक एन आई एक्ट से सबंधित मामले को निष्पादन करने पर बल दिया ।











