
लोकतंत्र का महापर्व चुनाव आ गया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 15 मार्च 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंक दिया। साथ ही 6 राज्यों में उपचुनाव भी होंगे। इस बार राजनीतिक दलों को अपने विज्ञापनों को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से पूर्व-प्रमाणित करवाना होगा। उम्मीदवारों को वास्तविक सोशल मीडिया खातों की जानकारी साझा करनी पड़ेगी। यह कदम फर्जी खबरों और भ्रामक विज्ञापनों पर लगाम लगाने के लिए है। आइए, विस्तार से समझें ये नए नियम और उनका महत्व।

ECI चुनाव कार्यक्रम घोषणा: नई शुरुआत
ECI ने 15 मार्च को पांच राज्यों और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों की तारीखें घोषित कीं। राजनीतिक दलों को अपने विज्ञापनों को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से पूर्व-प्रमाणित करवाना होगा – यह आदेश चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का प्रयास है। सोशल मीडिया पर विज्ञापन बिना प्रमाणन के नहीं चलेगा। इससे मतदाता सही जानकारी पाएंगे।
यह नियम लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर आधारित है। चुनाव समाप्ति के 75 दिनों में व्यय विवरण जमा करना अनिवार्य। राजनीतिक दलों को अपने विज्ञापनों को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से पूर्व-प्रमाणित करवाना होगा ताकि मिसइंफॉर्मेशन रोकी जा सके।
पूर्व-प्रमाणीकरण की प्रक्रिया: कैसे होगा?
राजनीतिक दलों को अपने विज्ञापनों को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति (MCMC) से पूर्व-प्रमाणित करवाना होगा। सभी विज्ञापन – टीवी, रेडियो, सार्वजनिक डिस्प्ले, ई-पेपर, एसएमएस, वॉयस मैसेज और सोशल मीडिया – पहले प्रमाणित होंगे।
- व्यक्ति/उम्मीदवार: जिला MCMC में आवेदन।
- राजनीतिक दल: राज्य-स्तरीय MCMC में।
- समय सीमा का पालन जरूरी।
अस्वीकृति पर अपील सीईओ की अध्यक्षता वाली समिति में। बिना प्रमाणन विज्ञापन जारी करने पर सख्त कार्रवाई। राजनीतिक दलों को अपने विज्ञापनों को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से पूर्व-प्रमाणित करवाना होगा – यह नियम डिजिटल युग में क्रांतिकारी है।
अपील प्रक्रिया सरल
निर्णय से असंतुष्ट? राज्य अपीलीय समिति में जाएं। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
सोशल मीडिया पर नई बाध्यताएं: खाते प्रमाणित
उम्मीदवार नामांकन के समय एफिडेविट में अपने वास्तविक सोशल मीडिया खातों की जानकारी साझा करनी होगी। फर्जी अकाउंट्स पर रोक। चुनाव व्यय में सोशल मीडिया परिचालन खर्च शामिल। इंटरनेट कंपनियों को भुगतान, कंटेंट डेवलपमेंट सब रिपोर्ट होगा।
राजनीतिक दलों को अपने विज्ञापनों को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से पूर्व-प्रमाणित करवाना होगा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (SMP) निगरानी रखेंगे। फेक न्यूज पर तत्काल एक्शन।
75 दिनों में ईसीआई को रिपोर्ट। इसमें विज्ञापन भुगतान, कंटेंट खर्च शामिल। उल्लंघन पर अयोग्यता।
ECI 19 मार्च की महत्वपूर्ण बैठक: जागरूकता अभियान
19 मार्च को सीईओ, पुलिस नोडल, आईटी नोडल और SMP प्रतिनिधियों की बैठक हुई। उम्मीदवारों को अपने वास्तविक सोशल मीडिया खातों की जानकारी साझा करनी होगी – इसकी जानकारी दी गई। फर्जी खबरों की जांच और कार्रवाई पर फोकस। असम से प. बंगाल तक सभी राज्यों में लागू।
यह बैठक चुनावी मिसइंफॉर्मेशन रोकने का मजबूत कदम। राजनीतिक दलों को अपने विज्ञापनों को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से पूर्व-प्रमाणित करवाना होगा अब सख्ती से लागू होगा।
भारत निर्वाचन आयोग ने आदेश जारी किया है कि किसी भी पंजीकृत राजनीतिक दल या किसी भी संगठन/संघ या किसी भी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार/व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (जैसे टीवी, रेडियो, सार्वजनिक स्थानों पर एवी डिस्प्ले, ई-पेपर, एक साथ अत्यधिक एसएमएस/वॉयस मैसेज) सहित सोशल मीडिया पर सभी राजनीतिक विज्ञापनों के प्रकाशन से पहले मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति (एमसीएमसी) को पूर्व-प्रमाणीकरण के लिए आवेदन करना होगा।
ECI व्यक्ति या चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार जिला मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति में विज्ञापनों के प्रमाणीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में मुख्यालय वाली सभी पंजीकृत राजनीतिक पार्टियां राज्य-स्तरीय मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति में ऐसे विज्ञापनों के प्रमाणीकरण के लिए आवेदन कर सकती हैं। आवेदन निर्धारित समय सीमा में जमा किए जाने चाहिए। जिला/राज्य मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति के निर्णयों के विरुद्ध अपीलों पर विचार करने के लिए राज्य-स्तर पर सीईओ की अध्यक्षता में एक अपीलीय समिति का भी गठन किया गया है।
संबंधित मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से पूर्व-प्रमाणन के बिना किसी भी राजनीतिक दल/उम्मीदवार द्वारा किसी भी इंटरनेट-आधारित मीडिया/वेबसाइट, जिसमें सोशल मीडिया वेबसाइटें भी शामिल हैं, पर कोई भी राजनीतिक विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा।
मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति मीडिया में भुगतान की गई खबरों के संदिग्ध मामलों पर भी कड़ी निगरानी रखेगी और उचित कार्रवाई करेगी।
नामांकन दाखिल करते समय उम्मीदवारों को अपने एफिडेविट में अपने प्रामाणिक सोशल मीडिया खातों का विवरण देना आवश्यक है।
ECI लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों को विधानसभा चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों में चुनाव आयोग को सोशल मीडिया वेबसाइटों सहित इंटरनेट के माध्यम से प्रचार पर किए गए व्यय का विवरण भी प्रस्तुत करना चाहिए।
इस प्रकार के व्यय में, अन्य बातों के अलावा, विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए इंटरनेट कंपनियों और वेबसाइटों को किए गए भुगतान और सामग्री विकास पर अभियान संबंधी व्यय और उनके सोशल मीडिया खातों को बनाए रखने के लिए किए गए परिचालन व्यय शामिल होंगे।
ECI फर्जी खबरों पर निगरानी पेड न्यूज पर लगाम

MCMC पेड न्यूज पर नजर रखेगी। भुगतान वाली खबरें संदिग्ध पाईं तो एक्शन। उम्मीदवारों को अपने वास्तविक सोशल मीडिया खातों की जानकारी साझा करनी होगी ताकि ट्रैकिंग आसान हो। सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री हटाई जाएगी।
SMP की जिम्मेदारी
फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स तुरंत रिपोर्ट करेंगे।
ये निर्देश मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट को मजबूत करेंगे। मतदाता भ्रमित नहीं होंगे। राजनीतिक दलों को अपने विज्ञापनों को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से पूर्व-प्रमाणित करवाना होगा से चुनाव निष्पक्ष होंगे। डिजिटल इंडिया में डिजिटल चुनावी सुधार जरूरी।
ECI उम्मीदवारों के लिए टिप्स
- समय पर आवेदन करें।
- खाते वेरीफाई रखें।
- व्यय रिकॉर्ड रखें।
अन्य राज्य में उपचुनाव एक समान नियम
6 राज्यों के उपचुनावों में भी यही नियम। उम्मीदवारों को अपने वास्तविक सोशल मीडिया खातों की जानकारी साझा करनी होगी। ECI का यह कदम पूरे देश के लिए मिसाल।
राजनीतिक दलों को अपने विज्ञापनों को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से पूर्व-प्रमाणित करवाना होगा और उम्मीदवारों को अपने वास्तविक सोशल मीडिया खातों की जानकारी साझा करनी होगी – ECI के ये नियम चुनाव को मजबूत बनाएंगे। मतदाता जागरूक रहें, सही उम्मीदवार चुनें।











