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Bagabeda ग्रामीण जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई

On: March 21, 2026 7:33 PM
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आज 22 मार्च, विश्व जल दिवस के मौके पर हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी समस्या की जो झारखंड के जमशेदपुर के Bagabeda इलाके की लाखों जनता को सालों से सता रही है। बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है, और इसके कारण 21 पंचायतों के 113 गांवों और रेलवे बस्तियों के लोग आज भी बूंद-बूंद पानी को मोहताज हैं।

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इस योजना पर केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत भारी फंड दिए, लेकिन राज्य सरकार की लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत से यह परियोजना अधर में लटक गई है। सुबोध झा जैसे समाजसेवियों के नेतृत्व में जनता ने 793 आंदोलन किए, लेकिन न्यायालय से भी तारीख पर तारीख मिल रही है।

Bagabeda जल योजना का इतिहास

Bagabeda ग्रामीण जलापूर्ति योजना की शुरुआत 2005 से मानी जा सकती है, जब बागबेड़ा महानगर विकास समिति ने पानी की समस्या को लेकर आवाज बुलंद की। 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने शिलान्यास किया और 2018 तक हर घर में नल जुड़ने का वादा किया।

लेकिन योजना पर 237 करोड़ से ज्यादा खर्च होने के बाद भी 2026 में लोग नदी-तालाब से पानी ला रहे हैं। जल जीवन मिशन के तहत सुवर्णरेखा नदी से इंटेक वेल, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और 37 मिलियन लीटर प्रतिदिन की सप्लाई की योजना थी, जो 21 पंचायतों को कवर करेगी।

समस्या तब और गंभीर हुई जब 2019 में ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट रद्द हो गया, और उसके बाद काम रुक गया। छोटा गोविंदपुर योजना आधी-अधूरी पूरी हुई, लेकिन Bagabeda का हिस्सा आज भी अधूरा पड़ा है।

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भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

सुबोध झा ने खुलासा किया है कि योजना में भ्रष्टाचार चरम पर है। वर्ल्ड बैंक और केंद्र सरकार के फंड का गबन हुआ, जबकि अधिकारी झूठी रिपोर्ट केंद्र और न्यायालय को भेज रहे हैं। कभी 2020, कभी 2023, कभी 2025 और अब जून 2026 तक पानी मिलने का बहाना।

झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अभियंता, अधीक्षक अभियंता और कार्यपालक अभियंता पर आरोप है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को भी गुमराह कर रहे हैं। 4.5 करोड़ रुपये कनेक्शन शुल्क जनता से वसूले गए, लेकिन पानी नहीं पहुंचा।

Bagabeda हाउसिंग कॉलोनी में भी फिल्टर प्लांट का काम अधूरा है। सुबोध झा ने कहा कि उच्च स्तरीय जांच से बड़ा घोटाला उजागर होगा। जनता गर्मी में 20-30 रुपये बोतल का पानी खरीद रही है या 2-3 किमी दूर नदी से पानी भर रही है।

सुबोध झा और जनता का लंबा संघर्ष

Bagabeda महानगर विकास समिति के अध्यक्ष सुबोध झा 2005 से इस लड़ाई लड़ रहे हैं। 793 आंदोलन, धरना, भूख हड़ताल, विधानसभा-राजभवन घेराव – सब कुछ किया गया। 2022 में दिल्ली पदयात्रा के दौरान सांसद विद्युत वरण महतो का ध्यानाकर्षण हुआ।

सुबोध झा ने कई बार निरीक्षण किया, जैसे अप्रैल 2025 में बड़ौदा घाट पर। फरवरी 2025 और जून 2026 के आश्वासनों के बावजूद काम रुका हुआ है। उनकी अगुवाई में ट्रैक जाम जैसी चेतावनियां दी गईं।

यह संघर्ष सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकतांत्रिक लड़ाई है। जनता का धैर्य जवाब दे रहा है।

सांसद विद्युत वरण महतो की भूमिका

जमशेदपुर के लोकप्रिय सांसद विद्युत वरण महतो ने इस मुद्दे को लोकसभा में दो बार उठाया। पहली बार 25 मार्च 2022 को पदयात्रा के बाद, दूसरी बार 1 दिसंबर 2025 को।

इसके बाद 6 फरवरी 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने लिखित जवाब दिया। उन्होंने 50 करोड़ 58 लाख Bagabeda योजना और 1 करोड़ 88 लाख फिल्टर प्लांट के लिए फंड जारी होने की पुष्टि की। सांसद ने राज्य सरकार की उदासीनता पर सवाल उठाए।

सांसद महतो को सुबोध झा ने धन्यवाद दिया, और अब केंद्र सरकार पर ही भरोसा है।

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न्यायालय की भूमिका और जनहित याचिका

झारखंड हाईकोर्ट में सुबोध झा ने जनहित याचिका दायर की। अदालत के आदेश पर 2023 में काम शुरू हुआ, लेकिन अब तारीख पर तारीख मिल रही है। भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई की मांग है।

न्यायालय ने फंड जारी करने का आदेश दिया, लेकिन अधिकारी झूठी रिपोर्ट दे रहे हैं। जनता को न्याय मिलना चाहिए।

जल जीवन मिशन और केंद्र का योगदान

जल जीवन मिशन के तहत केंद्र ने झारखंड को 2020-21 में 572 करोड़ दिए। बागबेड़ा योजना इसी का हिस्सा है। राज्य की लापरवाही से लक्ष्य प्रभावित हो रहा है।

केंद्र सरकार हर ग्रामीण घर में 55 लीटर पानी पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, लेकिन राज्य स्तर पर फेलियर।

वर्तमान स्थिति और जनता की परेशानी

मार्च 2026 में भी योजना अधूरी है। 2 लाख 25 हजार लोग 11-15 साल से परेशान। सड़कें पाइपलाइन से खराब, फिल्टर प्लांट अधूरा। विश्व जल दिवस पर जनता तरस रही है।

12 किमी पाइपलाइन बिछी, 5 जलमीनार बने, लेकिन सप्लाई नहीं। जून 2026 का नया वादा।

भ्रष्टाचार रोकने के उपाय

ऐसी योजनाओं में पारदर्शिता जरूरी। उच्च स्तरीय जांच, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, जनता की भागीदारी। केंद्र-राज्य समन्वय बढ़ाएं। सुबोध झा जैसे कार्यकर्ताओं को सपोर्ट करें।

Bagabeda ग्रामीण जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई, लेकिन सांसद विद्युत वरण महतो और केंद्र सरकार से उम्मीद है। जल जीवन मिशन सफल होगा, अगर राज्य जिम्मेदार बने। सुबोध झा का संघर्ष रंग लाएगा। जल दिवस पर संकल्प लें – पानी सबका अधिकार है।

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