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Drains की सफाई में घोर अनियमितता का आरोप जनसुविधा प्रतिनिधि ने उपायुक्त से जांच की मांग

On: June 4, 2026 6:32 PM
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जमशेदपुर: मानसून के आगमन से पहले शहर के बड़े Drains की सफाई को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक सरयू राय के जनसुविधा प्रतिनिधि मुकुल मिश्रा ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति(जेएनएसी) पर नालों की सफाई कार्य में गंभीर अनियमितता बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस संबंध में पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच किसी सक्षम पदाधिकारी से कराने की मांग की है।

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मुकुल मिश्रा का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम से पहले शहर के बड़े नालों की सफाई कराई जाती है ताकि बारिश के दौरान जल-जमाव और बाढ़ जैसी स्थिति से बचा जा सके। इस वर्ष भी जेएनएसी द्वारा कदमा और सोनारी क्षेत्र के बड़े नालों की सफाई का कार्य शुरू किया गया है, लेकिन सफाई कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई कार्य में मजदूरों की संख्या को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे कार्य की गति प्रभावित हो रही है।

निविदा के अनुसार 30 मजदूर लेकिन लगाए जा रहे कम श्रमिक

मुकुल मिश्रा ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि नालों की सफाई के लिए निविदा प्रक्रिया के माध्यम से 30 मजदूरों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके बावजूद कार्यस्थल पर निर्धारित संख्या से काफी कम मजदूर लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि निविदा की शर्तों के अनुसार मजदूरों को नहीं लगाया जाता है तो कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों प्रभावित होती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सोनारी क्षेत्र में 1 जून और 2 जून को नालों की सफाई कार्य के लिए केवल 17 मजदूरों को लगाया गया। इसी प्रकार कदमा क्षेत्र में 3 जून और 4 जून को मात्र 19 मजदूरों के सहारे सफाई कार्य कराया गया। जबकि निविदा की शर्तों के अनुसार 30 मजदूरों की तैनाती अनिवार्य थी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निर्धारित मजदूरों की संख्या कम क्यों की गई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।

सोनारी में सफाई कार्य बंद होने का आरोप

मुकुल मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्तमान समय में सोनारी क्षेत्र में नालों की सफाई का कार्य पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि मानसून के आगमन में अब अधिक समय नहीं बचा है और मौसम विभाग द्वारा भी शीघ्र बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। इसके बावजूद यदि सफाई कार्य अधूरा छोड़ दिया जाता है तो आने वाले दिनों में शहरवासियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि बड़े नालों की नियमित और समय पर सफाई नहीं होने से उनमें गाद, प्लास्टिक, कचरा और अन्य अपशिष्ट जमा रहते हैं। बारिश के दौरान यही अवरोध पानी के बहाव को रोकते हैं और निचले इलाकों में जल-जमाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसी स्थिति में लोगों के घरों और सड़कों पर पानी भर जाता है, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित होता है।

निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बनने की आशंका

जनसुविधा प्रतिनिधि ने अपने पत्र में विशेष रूप से कदमा और सोनारी के निचले क्षेत्रों का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई पूरी नहीं हुई तो इन क्षेत्रों में भारी जल-जमाव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। कई स्थानों पर स्थिति बाढ़ जैसी भी हो सकती है।

उन्होंने कहा कि पूर्व के वर्षों में भी बारिश के दौरान कई मोहल्लों में जलभराव की समस्या सामने आती रही है। ऐसे में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। यदि नालों की सफाई समय पर और पूरी क्षमता के साथ नहीं कराई गई तो आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

मुकुल मिश्रा ने कहा कि जल-जमाव केवल आवागमन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। गंदा पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है और डेंगू, मलेरिया तथा अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

जेएनएसी के अधिकारियों पर लगाया उदासीनता का आरोप

मुकुल मिश्रा ने अपने पत्र में जेएनएसी के उप नगर आयुक्त के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों की उदासीनता के कारण नालों की सफाई का कार्य प्रभावित हो रहा है। यदि अधिकारी नियमित रूप से निगरानी करते और निविदा की शर्तों का पालन सुनिश्चित कराते, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

उन्होंने कहा कि निर्धारित संख्या से कम मजदूरों को लगाकर सफाई कार्य कराया जाना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। इससे यह भी आशंका पैदा होती है कि कार्य के निष्पादन में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

उपायुक्त से जांच की मांग

मुकुल मिश्रा ने उपायुक्त से आग्रह किया है कि पूरे मामले की जांच किसी सक्षम और स्वतंत्र पदाधिकारी से कराई जाए। उन्होंने मांग की है कि यह पता लगाया जाए कि निविदा में निर्धारित मजदूरों की संख्या के बावजूद कम श्रमिकों को क्यों लगाया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो दोषी अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे भविष्य में ऐसी लापरवाही पर रोक लगेगी और सार्वजनिक कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

शहरवासियों की चिंता बढ़ी

मानसून की दस्तक से पहले Drains की सफाई को लेकर उठे इस विवाद ने स्थानीय नागरिकों की चिंता भी बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान जल-जमाव की समस्या सामने आती है, लेकिन इसके बावजूद समय रहते प्रभावी तैयारी नहीं की जाती। यदि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए तो इस वर्ष भी नागरिकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

शहरवासियों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराएगा और नालों की सफाई का कार्य तेजी से पूरा कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करेगा। ताकि मानसून के दौरान कदमा, सोनारी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में जल-जमाव की समस्या से लोगों को राहत मिल सके।

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