
आज की दुनिया जितनी तेज़ी से बदल रही है, उतनी ही तेज़ी से सामाजिक कुरीतियों का गहरा प्रभाव भी बढ़ रहा है। बाल श्रम, बाल विवाह और बच्चों के प्रति जागरूकता की कमी जैसे मुद्दे अब केवल घर–घर की समस्या नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की चिंता बन चुके हैं। इन्हीं चुनौतियों के बीच जमशेदपुर में दो दिवसीय ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम ने yuva पीढ़ी में एक नई सोच और जिम्मेदारी का बीज बोने का काम किया है। यह कार्यक्रम बाल कल्याण संघ और मिरेकल फाउंडेशन इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में तुलसी भवन, जमशेदपुर में 29 मार्च 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें पटमदा, बोड़ाम और घाटशिला प्रखंड के कई युवाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।

yuva संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य
yuva संवाद’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को बाल श्रम, बाल विवाह और अन्य सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक करना था। इसके तहत yuva को जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद पहले दिन संवाद सत्र और समूह चर्चा के माध्यम से युवाओं ने अपने क्षेत्रों की समस्याओं की पहचान की और उनके समाधान पर विचार साझा किए।
सामाजिक जिम्मेदारी क्या है?
कार्यक्रम में तुलसी भवन के सचिव प्रसेनजीत तिवारी ने सामाजिक जिम्मेदारी की अवधारणा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक जिम्मेदारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब यह जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्तर पर जाती है, तो यह राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन जाती है। उन्होंने yuva से आह्वान किया कि वे केवल समस्याओं को देखने वाले नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा बनें।
“जरूरत है संयम, सही जानकारी और सामाजिक जिम्मेदारी की। जब yuva ठान लेते हैं, तो वे न केवल अफवाहों को रोक सकते हैं, बल्कि समाज में फैली कुरीतियों को भी खत्म कर सकते हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी जोर दिया कि यदि युवा संकल्प लें, तो बाल श्रम और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को पहले परिवार, फिर समाज और अंततः राष्ट्र से समाप्त किया जा सकता है।

yuva बाल कल्याण संघ और मिरेकल फाउंडेशन की भूमिका
बाल कल्याण संघ की स्टेट हेड शिवानी प्रिया ने कहा कि आज के समय में हर yuva के पास समझ, ऊर्जा और क्षमता है, लेकिन असली बदलाव तब आता है जब यह सोच जमीन पर काम में बदलती है। उन्होंने yuva से अपील की कि वे छोटे-छोटे प्रयासों—जैसे बच्चों को स्कूल से जोड़ना, परिवारों को योजनाओं की जानकारी देना और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाना—को अपनी दैनिक जिम्मेदारी बनाएं।
मिरेकल फाउंडेशन इंडिया की स्टेट हेड नीपा दास ने बाल श्रम और बाल विवाह की पहचान के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई बच्चा स्कूल छोड़कर काम करता दिखे, या कम उम्र में विवाह की तैयारी हो रही हो, तो ऐसे मामलों में तुरंत सतर्क होकर उचित कदम उठाना जरूरी है।

yuva राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का विशेष अभियान
यह सभी yuva राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली के विशेष अभियान का हिस्सा हैं, जिसके तहत 1000 कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे बच्चों और उनके परिवारों को झारखंड सरकार के सहयोग से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने और उन्हें आजीविका से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी कड़ी में इन युवाओं को इस तरह प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वे अपने-अपने गांवों में बच्चों को स्कूल से जोड़ें, बाल श्रम और बाल विवाह को रोकें तथा समाज में जिम्मेदारी की भावना विकसित करें।

yuva इस अवसर पर बाल कल्याण संघ के स्टेट हेड शिवानी प्रिया ने कहा कि आज के समय में हर युवा के पास समझ, ऊर्जा और क्षमता है, लेकिन असली बदलाव तब आता है जब यह सोच जमीन पर काम में बदलती है। उन्होंने yuva से अपील की कि वे छोटे-छोटे प्रयासों—जैसे बच्चों को स्कूल से जोड़ना, परिवारों को योजनाओं की जानकारी देना और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाना—को अपनी दैनिक जिम्मेदारी बनाएं।
इस दौरान मिरेकल फाउंडेशन इंडिया के स्टेट हेड नीपा दास ने बाल श्रम एवं बाल विवाह की पहचान के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई बच्चा स्कूल छोड़कर काम करता दिखे, या कम उम्र में विवाह की तैयारी हो रही हो, तो ऐसे मामलों में तुरंत सतर्क होकर उचित कदम उठाना जरूरी
युवा संवाद जैसे मंचों पर खुलकर अपनी बात रखने से नई सोच को दिशा मिलती है। यहां युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, सामाजिक समानता, पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बदलाव की शुरुआत स्वयं से करनी होगी—चाहे वह परिवार में आपसी सम्मान बढ़ाना हो, बेटियों को समान अवसर देना हो या समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाना।

आज का युवा केवल समस्याओं की बात नहीं करता, बल्कि उनके समाधान भी सुझाता है। वह तकनीक का सही उपयोग कर समाज को जागरूक बनाने की कोशिश कर रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से सकारात्मक संदेश फैलाना, जरूरतमंदों की मदद करना और सामाजिक अभियानों में भाग लेना उसकी प्राथमिकता बनती जा रही है।
इस संवाद ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि युवा एकजुट होकर सही दिशा में प्रयास करें, तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। परिवार से शुरू हुआ यह संकल्प धीरे-धीरे पूरे समाज को प्रभावित करेगा और एक बेहतर, जागरूक और संवेदनशील भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।










