
बिहार: Saharsa जिले के महिषी ब्लॉक बलुआहा सरकारी मध्य विद्यालय में मिड-डे मील में मृत सांप मिलने से 250 से ज्यादा बच्चों बीमार पड़ गए। चावल-दाल खाने के बाद पेट दर्द, उल्टी, चक्कर की शिकायत हुई। FSL टीम ने सैंपल लिए, प्रशासन अलर्ट पर। इस ब्लॉग में घटना की पूरी डिटेल, इलाज, जांच और मिड-डे मील सुरक्षा पर चर्चा करेंगे। माता-पिता सावधान रहें!

बलुआहा स्कूल में क्या हुआ? घटना की पूरी टाइमलाइन
Saharsa मिड-डे मील में मृत सांप का मामला गुरुवार 7 मई 2026 का है। सुबह 10 बजे चावल-दाल परोसा गया। कुछ मिनट बाद बच्चे बीमार। स्कूल में अफरा-तफरी, अभिभावक पहुंचे।
टाइमलाइन:
- 10:00 AM: मिड-डे मील सर्व।
- 10:15 AM: शिकायतें शुरू।
- 10:30 AM: महिषी स्वास्थ्य केंद्र रेफर।
- दोपहर: FSL टीम पहुंची।
250+ बच्चे प्रभावित, ज्यादातर बलुआहा स्कूल के।
बच्चों की जुबानी क्या खाया, क्या हुआ?
रोहित (कक्षा 5): “चावल-दाल खाई, फिर पेट दर्द।” शिवानी (कक्षा 7): “सब बीमार हो गए।” मिड-डे मील में मृत सांप का बच्चा मिला।
इलाज और बच्चों की हालत अस्पताल में ड्रामा
बीमार बच्चों को महिषी CHC ले जाया। 115 को Saharsa सदर अस्पताल रेफर। सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद ने फूड पॉइजनिंग कहा। सभी खतरे से बाहर।
अस्पताल में भीड़, परिजन गुस्से में। Saharsa मिड-डे मील ने स्वास्थ्य केंद्र पर दबाव डाला।
डॉक्टरों का बयान
प्रशासन की जांच FSL सैंपल SDM का वादा
SDM श्रेयांश तिवारी: “रिपोर्ट आने पर कार्रवाई। FSL ने खाना, सबूत कलेक्ट। NGO ने मील सप्लाई किया। पुलिस जांच। मिड-डे मील में मृत सांप की पुष्टि रिपोर्ट से।
अभिभावकों का हंगामा, स्कूल बंद। Saharsa मिड-डे मील पर सवाल।
मिड-डे मील योजना बिहार में बार-बार हादसे क्यों?
मिड-डे मील गरीब बच्चों को पोषण देती। लेकिन लापरवाही से हादसे। Saharsa मिड-डे मील में मृत सांप जैसा चौंकाने वाला।
पिछले हादसे
सुधार के सुझाव
- किचन CCTV।
- सैंपल चेकिंग।
- ट्रेनिंग।
माता-पिताओं के लिए सलाह बच्चे सुरक्षित रखें
मिड-डे मील में मृत सांप से सीखें। घर से खाना दें या चेक करें।
5 टिप्स
- स्कूल मेनू चेक।
- बीमारी पर तुरंत डॉक्टर।
- RTI से जानकारी।
- अभिभावक कमिटी।
- शिकायत हेल्पलाइन।
Saharsa मिड-डे मील दोहराए न।
Saharsa मिड-डे मील में मृत सांप ने लापरवाही उजागर की। 250 बच्चों का हादसा टला, लेकिन सबक लें। प्रशासन सख्ती करे, माता-पिता सतर्क। मिड-डे मील पोषण दे, जहर न! बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो।















