- यशोदा हॉस्पिटल्स ने झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच मजबूत करने पर दिया जोर, उन्नत गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी की विशेषज्ञता से कराया अवगत
जमशेदपुर | 22 अगस्त 2026
झारखंड के मरीजों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ उपचार से जोड़ने की दिशा में यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद ने अपनी स्वास्थ्य सेवाओं और उन्नत सर्जिकल सुविधाओं को लेकर जमशेदपुर में विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के उपचार, उन्नत लैप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जरी तथा मरीज-केंद्रित चिकित्सा सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि झारखंड और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तक बेहतर पहुँच उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के मैनेजर–मार्केटिंग सत्यजीत रॉय ने अस्पताल समूह की चिकित्सा सेवाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक तकनीक और मरीज-केंद्रित उपचार व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यशोदा हॉस्पिटल्स का उद्देश्य केवल अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों को सही समय पर विशेषज्ञ परामर्श और उपचार विकल्पों की जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं के साथ आधुनिक डायग्नोस्टिक और सर्जिकल सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को एक ही स्वास्थ्य व्यवस्था के अंतर्गत व्यापक उपचार सुविधा मिल सके। झारखंड के मरीजों के साथ अपने संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से अस्पताल की टीम राज्य में स्वास्थ्य सेवा संबंधी जागरूकता और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी पहुँचाने पर भी जोर दे रही है।
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं को नजरअंदाज न करने की सलाह
कार्यक्रम में यशोदा हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, लैप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. वाई. श्रीमन्नारायण भी उपस्थित रहे। डॉ. श्रीमन्नारायण की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं में MS (General Surgery), DNB (Surgical Gastroenterology), FMAS, FIAGES, FICRS (Robotic) और FALS (Robotic) शामिल हैं। उन्हें सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी के क्षेत्र में लगभग आठ वर्षों का अनुभव है।
डॉ. श्रीमन्नारायण ने गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और गैस्ट्रिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समय पर निदान और उचित उपचार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पेट से संबंधित कई समस्याएँ शुरुआत में सामान्य प्रतीत हो सकती हैं, लेकिन यदि लक्षण लगातार बने रहें या बार-बार सामने आएँ तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से लगातार या बार-बार होने वाला पेट दर्द, एसिडिटी या रिफ्लक्स, निगलने में कठिनाई, बार-बार उल्टी, मल त्याग की आदतों में बदलाव और अन्य लगातार बनी रहने वाली गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल शिकायतों को लेकर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता बताई।
उनके अनुसार, अनुभवी विशेषज्ञ द्वारा समय पर जाँच कराने से बीमारी के मूल कारण की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इसके बाद मरीज की स्थिति के अनुसार यह निर्धारित किया जा सकता है कि उसे दवाओं के माध्यम से उपचार की आवश्यकता है अथवा किसी प्रकार की सर्जिकल प्रक्रिया की।
आधुनिक तकनीक से सर्जरी में आए महत्वपूर्ण बदलाव
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और विशेष रूप से रोबोटिक एवं मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा हुई। डॉ. श्रीमन्नारायण ने बताया कि चिकित्सा तकनीक में लगातार हो रहे विकास के कारण कई जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं को पहले की तुलना में अधिक सटीकता और बेहतर विजुअलाइजेशन के साथ करने की सुविधा उपलब्ध हुई है।
उन्होंने बताया कि रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी में सर्जन को प्रक्रिया के दौरान बेहतर नियंत्रण, उन्नत विजुअलाइजेशन और सूक्ष्म स्तर पर अधिक सटीकता हासिल करने में मदद मिल सकती है। वहीं, लैप्रोस्कोपिक एवं अन्य मिनिमली इनवेसिव तकनीकों में छोटे चीरे के माध्यम से उपचार किया जाता है, जिससे उपयुक्त मरीजों में ऑपरेशन के बाद की असुविधा कम होने, अस्पताल में रहने की अवधि घटने और सामान्य गतिविधियों में अपेक्षाकृत जल्दी लौटने जैसे संभावित लाभ मिल सकते हैं।
हालांकि, डॉ. श्रीमन्नारायण ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक मरीज के लिए रोबोटिक या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। सर्जरी की तकनीक का चयन मरीज की बीमारी, उसकी गंभीरता, समग्र स्वास्थ्य स्थिति और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों के विस्तृत मूल्यांकन के बाद ही किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञ उपचार तक पहुँच बढ़ाने की पहल
यशोदा हॉस्पिटल्स के प्रतिनिधियों ने कहा कि झारखंड जैसे राज्य में मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के बारे में सही जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। कई बार गंभीर बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को सामान्य समस्या समझकर लोग उपचार में देरी कर देते हैं। ऐसी स्थिति में बीमारी के बढ़ने के साथ उपचार की जटिलता भी बढ़ सकती है।
अस्पताल की ओर से लोगों को सलाह दी गई कि लंबे समय तक बनी रहने वाली या बार-बार होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए। विशेष रूप से पाचन तंत्र और पेट से संबंधित लगातार बनी रहने वाली समस्याओं के मामले में विशेषज्ञ चिकित्सक से उचित जाँच और सलाह लेना महत्वपूर्ण हो सकता है।
मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा पर जोर
सत्यजीत रॉय ने कहा कि यशोदा हॉस्पिटल्स झारखंड के मरीजों और चिकित्सा समुदाय के साथ अपने स्वास्थ्य सेवा संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। अस्पताल का उद्देश्य मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श, आधुनिक उपचार तकनीक और आवश्यक चिकित्सा सहायता के बारे में बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उचित चिकित्सा विकल्पों तक पहुँच मिल सके।
उन्होंने कहा कि मरीज और उनके परिवार अस्पताल की सेवाओं, विशेषज्ञ परामर्श, उपचार विकल्पों, अपॉइंटमेंट और अन्य स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए अस्पताल के प्रतिनिधियों से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने झारखंड के मरीजों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की पहुँच को और बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
यशोदा हॉस्पिटल्स की ओर से बताया गया कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, अनुभवी विशेषज्ञों और उन्नत सर्जिकल तकनीकों के माध्यम से अस्पताल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समेत विभिन्न जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहा है। जमशेदपुर में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अस्पताल ने झारखंड के लोगों को समय पर चिकित्सा सलाह लेने, बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करने और आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाने का संदेश दिया।
मरीज सहायता के लिए संपर्क
सत्यजीत रॉय
मैनेजर–मार्केटिंग, यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद
संपर्क: +91 7992311411
नोट: किसी भी सर्जरी या उपचार की उपयुक्तता मरीज की व्यक्तिगत चिकित्सकीय स्थिति और विशेषज्ञ चिकित्सकीय मूल्यांकन पर निर्भर करती है।



















