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Mango नगर निगम में विधायक सरयू राय और मेयर सुधा गुप्ता के बीच अधिकारों को लेकर तकरार, संवैधानिक शक्तियों पर छिड़ी बहस

On: August 21, 2026 8:04 AM
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जमशेदपुर: Mango नगर निगम में जनप्रतिनिधियों के अधिकार और कार्यकारी शक्तियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय द्वारा 19 अगस्त को मानगो नगर निगम कार्यालय में अपर नगर आयुक्त और उप नगर आयुक्त के साथ बैठक किए जाने के बाद मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मेयर ने कहा कि नगर निगम के कार्यकारी अधिकारों को लेकर स्पष्टता जरूरी है और किसी भी जनप्रतिनिधि को अपनी संवैधानिक एवं कानूनी सीमाओं को समझते हुए काम करना चाहिए।

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झारखंड में नगर निकायों के संचालन से संबंधित प्रावधान झारखंड नगरपालिका अधिनियम और उसके संशोधनों के तहत निर्धारित होते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर भी झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 और उसके संशोधनों को उपलब्ध कराया गया है।

19 अगस्त को नगर निगम कार्यालय पहुंचे विधायक सरयू राय

बताया गया है कि विधायक सरयू राय ने 19 अगस्त को मानगो नगर निगम कार्यालय में अपर नगर आयुक्त और उप नगर आयुक्त के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने नगर निगम से जुड़े अधिकारों और कार्यप्रणाली को लेकर अधिकारियों से चर्चा की।

बैठक के दौरान विधायक की ओर से यह कहा गया कि नगर निगम के कार्यकारी अधिकार अपर नगर आयुक्त और उप नगर आयुक्त के पास हैं, जबकि मेयर के पास ऐसे कार्यकारी अधिकार नहीं हैं।

इसी बयान के बाद मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक की भूमिका और उनके अधिकारों पर सवाल उठाए।

मेयर सुधा गुप्ता ने विधायक के अधिकार पर उठाया सवाल

मेयर सुधा गुप्ता ने कहा कि कार्यकारी अधिकार विधायक सरयू राय के पास भी नहीं हैं। उनके अनुसार विधायक का काम मुख्य रूप से अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा और संबंधित प्रशासनिक मंचों पर उठाना तथा विकास कार्यों की समीक्षा और समन्वय करना है।

मेयर ने यह भी कहा कि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और विकास योजनाओं की प्रगति को लेकर नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर सकते हैं, लेकिन ऐसी बैठक का स्वरूप प्रशासनिक नियंत्रण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

नगर निगम कार्यालय में अधिकारियों को अधिकार समझाने का अधिकार नहीं’

मेयर सुधा गुप्ता ने कहा कि विधायक अपने क्षेत्र की जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर अधिकारियों से जानकारी ले सकते हैं और समस्याओं के समाधान के लिए समन्वय कर सकते हैं। लेकिन उनके अनुसार नगर निगम के अधिकारियों को उनके अधिकारों की ‘शिक्षा’ देने का विषय अलग है।

उन्होंने कहा कि नगर निगम की अपनी संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था है, जिसमें निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की अलग-अलग भूमिकाएं निर्धारित हैं।

आपसी सहयोग के बिना विकास संभव नहीं

मेयर ने नगर निगम के कामकाज में आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कोई भी संस्थान बिना समन्वय और सहयोग के प्रभावी तरीके से काम नहीं कर सकता।

उन्होंने दावा किया कि मानगो की जनता के हित में उन्होंने काफी प्रयासों के बाद नगर निगम के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सकारात्मक सहयोग का वातावरण तैयार किया है।

मेयर के मुताबिक, इस वातावरण का उद्देश्य राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनता से जुड़े मुद्दों का समाधान करना और नगर निगम के विकास कार्यों को गति देना है।

सकारात्मक वातावरण में दरार पैदा करने की कोशिश’

सुधा गुप्ता ने आरोप लगाया कि विधायक सरयू राय की ओर से की जा रही इस तरह की गतिविधियों से नगर निगम के भीतर बने सकारात्मक माहौल पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच अधिकारों को लेकर टकराव बढ़ता है तो इसका सीधा असर आम जनता के विकास कार्यों पर पड़ सकता है।

मेयर ने इसे जनता के हित में उचित नहीं बताया और सभी जनप्रतिनिधियों से सहयोगात्मक भूमिका निभाने की अपील की।

मेयर ने की संवैधानिक व्यवस्था की व्याख्या

अपने बयान में मेयर सुधा गुप्ता ने विधायक के अधिकारों को लेकर संवैधानिक व्यवस्था की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था में विधायिका और कार्यपालिका की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं।

विधायक का प्रमुख दायित्व विधानसभा में कानून निर्माण की प्रक्रिया में भाग लेना, प्रस्तावों पर चर्चा करना, बजट पर विचार करना और सरकार से सवाल पूछना है।

इसके अलावा विधायक विधानसभा की समितियों के माध्यम से सरकार के कामकाज की समीक्षा और निगरानी भी करते हैं। हालांकि निगरानी की यह भूमिका अपने आप में प्रशासनिक कार्यकारी शक्ति के प्रयोग के समान नहीं है।

विधायक को कार्यकारी शक्ति कब मिलती है?

मेयर ने कहा कि विधायक को सामान्य रूप से केवल विधायक होने के कारण राज्य की कार्यकारी शक्ति प्राप्त नहीं होती। यदि कोई विधायक राज्य सरकार में मंत्री बनता है, तो वह मंत्रिपरिषद का हिस्सा बनकर कार्यपालिका से जुड़ता है।

संविधान के अनुच्छेद 163 और 164 राज्य में मंत्रिपरिषद तथा मंत्रियों से संबंधित व्यवस्था निर्धारित करते हैं। इसलिए विधायक और मंत्री की संवैधानिक भूमिका को एक समान मानना उचित नहीं है।

मेयर ने इसी अंतर का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति में विधायक सरयू राय के पास नगर निगम के प्रशासन को सीधे संचालित करने वाली कार्यकारी शक्ति नहीं है।

विधायक निधि को लेकर भी दी सफाई

मेयर सुधा गुप्ता ने विधायक निधि का उदाहरण देते हुए कहा कि विधायक निधि को लेकर भी अक्सर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति रहती है।

उनके अनुसार विधायक अपने क्षेत्र की विकास योजनाओं की सिफारिश कर सकते हैं, लेकिन योजना को लागू करने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया संबंधित सरकारी विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से होती है।

इसमें योजना की स्वीकृति, प्रशासनिक प्रक्रिया, कार्य का निष्पादन और संबंधित विभागीय कार्रवाई शामिल होती है। इसलिए विधायक निधि की सिफारिश करने की भूमिका को सीधे कार्यकारी प्रशासन चलाने के अधिकार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

मेयर और विधायक की भूमिका में अंतर

मानगो नगर निगम की मेयर ने कहा कि मेयर और विधायक दोनों निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं, लेकिन दोनों की संवैधानिक एवं प्रशासनिक भूमिकाएं अलग-अलग हैं।

नगर निगम के स्तर पर मेयर की भूमिका नगर निकाय की निर्वाचित राजनीतिक व्यवस्था से जुड़ी होती है। वहीं नगर निगम के अधिकारी प्रशासनिक और कार्यकारी व्यवस्था के तहत अपने निर्धारित दायित्वों का निर्वहन करते हैं।

विधायक का क्षेत्र विधानसभा क्षेत्र होता है, जबकि नगर निगम की निर्वाचित व्यवस्था पूरे नगर निकाय के कामकाज से जुड़ी होती है।

नगर निगम की बैठकों और विधायक की बैठक में अंतर

मेयर ने कहा कि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र से संबंधित समस्याओं की समीक्षा के लिए नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर सड़क, पानी, सीवरेज, सफाई, नाली और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर विधायक अधिकारियों से जानकारी ले सकते हैं।

लेकिन ऐसी बैठक का उद्देश्य मुख्य रूप से Review and Coordination यानी समीक्षा और समन्वय होना चाहिए।

दूसरी ओर, नगर निगम की औपचारिक बैठकों का अपना निर्धारित कानूनी ढांचा होता है, जिसमें निर्वाचित निकाय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

बजट और नीतिगत फैसलों का सवाल

मेयर ने कहा कि नगर निगम के बजट, नीतिगत प्रस्तावों और निगम के औपचारिक निर्णयों की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी व्यवस्था के तहत होती है।

इसलिए विधायक और नगर निगम के निर्वाचित प्रमुख की भूमिका को एक-दूसरे का विकल्प नहीं माना जा सकता। दोनों संस्थाओं के बीच समन्वय जरूरी है, लेकिन अधिकार क्षेत्र की स्पष्टता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं और राज्य सरकार की ओर से संबंधित अधिनियम एवं नियम उपलब्ध कराए जाते हैं।

विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर

मेयर सुधा गुप्ता ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के बीच अधिकारों को लेकर विवाद बढ़ने का असर अंततः जनता पर पड़ सकता है। उनके अनुसार नगर निगम में सड़क, पानी, सफाई, नाली, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल जरूरी है।

यदि राजनीतिक या प्रशासनिक स्तर पर लगातार मतभेद बने रहते हैं तो विकास योजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है।

जनता के हित में सहयोग जरूरी

मेयर ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन नगर निगम की प्राथमिकता मानगो की जनता की समस्याओं का समाधान होना चाहिए।

उनके अनुसार विधायक, मेयर, पार्षद और नगर निगम के अधिकारी यदि अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए एक-दूसरे के साथ सहयोग करें तो नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।

अधिकारों को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चा

विधायक सरयू राय और मेयर सुधा गुप्ता के बीच सामने आया यह विवाद केवल एक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय निकाय और विधानसभा प्रतिनिधि की भूमिकाओं को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

एक ओर विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से समन्वय और समीक्षा कर सकते हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की अपनी निर्वाचित और प्रशासनिक व्यवस्था है। ऐसे में दोनों स्तरों के बीच संतुलन और समन्वय आवश्यक है।

Mango नगर निगम में विधायक सरयू राय की 19 अगस्त की बैठक के बाद कार्यकारी अधिकारों को लेकर शुरू हुई बहस ने स्थानीय राजनीति को गर्म कर दिया है। मेयर सुधा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि विधायक की भूमिका मुख्य रूप से कानून निर्माण, सरकार की निगरानी, जनसमस्याओं को उठाने और विकास कार्यों के समन्वय से जुड़ी है, जबकि नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था अपने निर्धारित कानूनी ढांचे के अनुसार संचालित होती है।

मेयर ने यह भी कहा कि मानगो के विकास के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सहयोग जरूरी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में विधायक सरयू राय और नगर निगम नेतृत्व के बीच अधिकारों और कार्यप्रणाली को लेकर यह बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका मानगो के विकास कार्यों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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