जमशेदपुर: तहरीक-ए-पैगाम-ए-इस्लाम की ओर से जमशेदपुर के ओल्ड पुरुलिया रोड स्थित चिप्पा पुल के महल में Allah की रहमत और पैगंबर हजरत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की शिक्षाओं पर इंटरफेथ सिंपोजियम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों और सामाजिक वर्गों से जुड़ी जानी-मानी हस्तियों, विद्वानों, बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और युवाओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
सिंपोजियम का मुख्य उद्देश्य हजरत मुहम्मद ﷺ के जीवन और उनकी शिक्षाओं की रोशनी में शांति, भाईचारा, धार्मिक सहनशीलता, इंसानियत, सामाजिक एकता और आपसी सम्मान का संदेश समाज तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम में अलग-अलग धर्मों के वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि धर्म और आस्था अलग हो सकती है, लेकिन इंसानियत, शांति और भाईचारे की भावना सभी को एक-दूसरे से जोड़ती है।
पवित्र कुरान की तिलावत से कार्यक्रम की शुरुआत
इंटरफेथ सिंपोजियम की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे पवित्र कुरान की तिलावत के साथ हुई। इसके बाद TPI इंग्लिश स्कूल के विद्यार्थियों ने उर्दू और अंग्रेजी भाषा में नात-ए-पाक, कविताएं और भाषण प्रस्तुत किए।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। बच्चों की प्रस्तुतियों में धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ इंसानियत, प्रेम, शांति और सद्भाव का संदेश भी दिखाई दिया। कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रयास की प्रशंसा की और उन्हें आगे भी ऐसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
हज रज़ी नौशाद के निर्देशन में हुआ औपचारिक उद्घाटन
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन हज रज़ी नौशाद साहिब के निर्देशन में हुआ। इसके बाद विभिन्न वक्ताओं ने बारी-बारी से मंच से अपने विचार रखे और हजरत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ के जीवन, उनके आदर्शों तथा इंसानियत के प्रति उनके संदेश को वर्तमान समय के संदर्भ में सामने रखा।
वक्ताओं ने कहा कि आज जब समाज में विभिन्न कारणों से दूरी और तनाव की स्थिति दिखाई देती है, तब आपसी संवाद और एक-दूसरे के धर्म एवं विचारों का सम्मान करने की आवश्यकता और बढ़ जाती है।
जहीरुद्दीन ने पैगंबर की रहमत और इंसानियत पर रखे विचार
कार्यक्रम में मिस्टर जहीरुद्दीन साहिब ने हजरत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की रहमत, दया और इंसानियत के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पैगंबर की शिक्षाओं में इंसान के साथ करुणा, न्याय और सद्भाव का महत्वपूर्ण स्थान है।
उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम और दया की भावना को मजबूत करना वर्तमान समय की बड़ी जरूरत है। इंसानियत की सेवा, जरूरतमंदों की सहायता और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करके ही एक बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है।
रविंदर प्रसाद ने शांति और भाईचारे का दिया संदेश
मिस्टर रविंदर प्रसाद जी ने अपने संबोधन में शांति और भाईचारे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी राजनीति और अन्य सामाजिक परिस्थितियां लोगों के बीच दूरी पैदा करने का काम करती हैं। ऐसे समय में समाज के जिम्मेदार लोगों को विभाजनकारी सोच का विरोध करते हुए आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोगों को एक-दूसरे के साथ सम्मान और सद्भाव के साथ रहना चाहिए। समाज की मजबूती तभी संभव है, जब लोग अपने मतभेदों से ऊपर उठकर इंसानियत को प्राथमिकता दें।
सरदार सुरिंदर सिंह ने नफरत की राजनीति पर जताई चिंता
सरदार सुरिंदर सिंह ने मौजूदा परिस्थितियों और नफरत की राजनीति को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज में नफरत और विभाजन की भावना किसी भी देश या समाज के लिए लाभदायक नहीं हो सकती।
उन्होंने शांति, एकता और आपसी प्रेम को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सभी समुदायों को एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में विश्वास और भाईचारे का माहौल तैयार करना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
सुनील विमल ने सभी धर्मों की अच्छी शिक्षाओं का किया उल्लेख
बुद्धिस्ट सोसाइटी के मिस्टर सुनील विमल ने हजरत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की इंसानियत, शांति और भाईचारे से संबंधित शिक्षाओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का दिखावा वास्तविक अच्छाई का विकल्प नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्मों की परंपराएं और मान्यताएं अलग हो सकती हैं, लेकिन सभी धर्म इंसान को ईमानदारी, अच्छे कर्म, करुणा और सदाचार की शिक्षा देते हैं। इसलिए धार्मिक विविधता को आपसी दूरी का कारण बनाने के बजाय एक-दूसरे को समझने और सम्मान देने का माध्यम बनाया जाना चाहिए।
भगवान सिंह ने समाज को बांटने वाली सोच के बहिष्कार की अपील की
मिस्टर भगवान सिंह जी ने समाज को बांटने वाली सभी प्रवृत्तियों और विचारों का विरोध करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में एकता और भाईचारे को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर लोगों के बीच दूरी पैदा करने के बजाय सभी को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आपसी प्रेम और सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
ब्रह्माकुमारी वरुण कुमारी ने पैगंबर की शिक्षाओं को बताया मानवता के लिए प्रकाश
ब्रह्माकुमारी समाज की बहन वरुण कुमारी जी ने हजरत मुहम्मद ﷺ की शिक्षाओं पर अपने विचार रखते हुए कहा कि उनके संदेश को केवल एक समुदाय तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हजरत मुहम्मद ﷺ की शिक्षाएं इंसानियत के लिए मार्गदर्शन का संदेश देती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह प्रकृति की नेमतें जैसे सूरज और चांद किसी एक धर्म या समुदाय के लिए सीमित नहीं हैं, उसी तरह मानवता, शांति और सद्भाव का संदेश भी व्यापक होना चाहिए।
गौतम बोस ने वैश्विक हालात पर जताई चिंता
श्री गौतम बोस साहिब ने अपने संबोधन में मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष, हिंसा और अत्याचार की खबरें सामने आती रहती हैं। ऐसी परिस्थितियों में मानवता, शांति और न्याय के मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत या सामूहिक हित के लिए दूसरों पर अत्याचार करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता। समाज के दबे-कुचले, वंचित और कमजोर वर्गों को सम्मान एवं बराबरी दिलाने की दिशा में कार्य करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि हजरत मुहम्मद ﷺ की शिक्षाओं से इंसानियत, न्याय और कमजोरों के प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा ली जा सकती है।
पूर्व MLA कुणाल सारंगी ने हजरत मुहम्मद ﷺ के संघर्ष को किया याद
पूर्व विधायक श्री कुणाल सारंगी ने अपने भाषण में हजरत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ के जीवन और संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हजरत मुहम्मद ﷺ ने बचपन में ही अपने माता-पिता का साया खो दिया था, लेकिन कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने अपने जीवन से पूरी दुनिया के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि समाज में बातें करने वाले बहुत लोग होते हैं, लेकिन उन बातों को अपने जीवन में उतारकर दिखाने वाले कम होते हैं। हजरत मुहम्मद ﷺ का जीवन व्यवहार, संघर्ष और अच्छे आचरण का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि हजरत मुहम्मद ﷺ ने लोगों को ईश्वर की इबादत और अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित किया तथा व्यावहारिक जीवन में ईमानदारी, अच्छाई और बेहतर चरित्र के महत्व को सामने रखा।
चंदेश्वर खान ने इंसानियत और आपसी प्रेम पर दिया जोर
श्री चंदेश्वर खान साहिब ने भी सिंपोजियम को संबोधित किया। उन्होंने इंसानियत, भाईचारे और आपसी प्रेम की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि समाज में वास्तविक बदलाव केवल बाहरी व्यवस्थाओं से नहीं आएगा, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाना होगा। उन्होंने लोगों से अपने भीतर मानवता और करुणा की भावना को मजबूत करने की अपील की।
सैयद सैफुद्दीन असदुक चिश्ती ने दिया मुख्य संदेश
सिंपोजियम के अध्यक्ष तथा तहरीक-ए-पैगाम-ए-इस्लाम के संस्थापक एवं प्रमुख हजरत सैयद सैफुद्दीन असदुक चिश्ती ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कार्यक्रम के उद्देश्य और पैगंबर की शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, “अगर 15 अगस्त भारत की आजादी की तारीख है, तो रबीउल-अव्वल इंसानियत की आजादी की तारीख है।” उन्होंने कहा कि यदि अल्लाह तआला पूरी दुनिया का रब है, तो हजरत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ सभी दुनियाओं के लिए रहमत हैं।
उन्होंने कहा कि तलवार से सिर झुकाया जा सकता है, लेकिन दिल नहीं झुकाया जा सकता। उनके अनुसार पैगंबर ﷺ का पूरा जीवन रहम, न्याय और इंसानियत की सेवा का उदाहरण है।
न्याय और मानवता की शिक्षाओं पर दिया जोर
हजरत सैयद सैफुद्दीन असदुक चिश्ती ने कहा कि हजरत मुहम्मद ﷺ ने कठिन परिस्थितियों में भी सिद्धांतों और न्याय को महत्व दिया। उन्होंने बेटियों के साथ अच्छे व्यवहार, महिलाओं के अधिकार, कमजोरों के प्रति दया और समाज के सभी वर्गों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार की शिक्षा दी।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया को सबसे अधिक जरूरत नफरत को समाप्त करने, इंसान की गरिमा का सम्मान करने, धार्मिक सहनशीलता, शांति और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की है।
विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों का एक मंच पर आना बना विशेष संदेश
इंटरफेथ सिंपोजियम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि विभिन्न धर्मों और समुदायों से जुड़े वक्ता एक ही मंच पर उपस्थित हुए और उन्होंने शांति एवं इंसानियत की बात की।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि धर्म, जाति और आस्था में भिन्नता होने के बावजूद लोग शांति, प्रेम, सम्मान और भाईचारे के लिए एक साथ खड़े हो सकते हैं। समाज में संवाद और आपसी सम्मान को बढ़ावा देकर विभाजनकारी प्रवृत्तियों को कमजोर किया जा सकता है।
युवाओं और विद्यार्थियों की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में TPI इंग्लिश स्कूल के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नात, कविताओं और भाषणों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण दिया।
आयोजकों ने कहा कि युवा पीढ़ी को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सामाजिक सद्भाव, मानवता और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
आयोजन को सफल बनाने में कार्यकर्ताओं का योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में कन्वीनर श्री राहत हुसैन मोना के साथ तहरीक-ए-पैगाम-ए-इस्लाम के सक्रिय कार्यकर्ताओं श्री खालिद इकबाल, श्री काशिफ रजा खान और युवाओं की बड़ी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आयोजकों और स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में सहयोग किया। विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अतिथियों और वक्ताओं को किया गया सम्मानित
सिंपोजियम के अंत में सभी विशिष्ट अतिथियों और वक्ताओं का स्वागत एवं सम्मान किया गया। आयोजकों की ओर से अतिथियों को मोमेंटो और फूलों के गुलदस्ते भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने अतिथियों और वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम में उनके विचारों और संदेशों की सराहना की।
इंसानियत, शांति और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश
कार्यक्रम का समापन इंसानियत, शांति और सामाजिक एकता के संदेश के साथ हुआ। सिंपोजियम में वक्ताओं ने अलग-अलग दृष्टिकोण से इस बात पर जोर दिया कि समाज को नफरत और विभाजन के बजाय प्रेम, सहनशीलता, आपसी सम्मान और भाईचारे की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
आयोजकों ने कहा कि आज के समय में धार्मिक और सामाजिक संवाद की जरूरत पहले से अधिक है। विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे की भावनाओं और मान्यताओं का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश
इंटरफेथ सिंपोजियम का मुख्य संदेश रहा कि हजरत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की शिक्षाओं में इंसानियत, दया, न्याय, शांति और भाईचारे के मूल्यों को महत्व दिया गया है। इन मूल्यों को वर्तमान समाज में अपनाकर लोगों के बीच आपसी विश्वास और सद्भाव को मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम में यह भी संदेश दिया गया कि धर्म, जाति और विश्वास की विविधता समाज की वास्तविकता है, लेकिन इन विविधताओं के बावजूद मानवता के बंधन को मजबूत किया जा सकता है। समाज में नफरत और बंटवारे के बजाय प्रेम, सहनशीलता, सम्मान और एकता को बढ़ावा देना आज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है।























